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Difference: रेलवे में कोच और बोगी में क्या होता है अंतर, जानें

Difference: क्या आप भी कोच को बोगी कहकर पुकारते हैं। यदि हां, तो आप कोच को गलत नाम से पुकारते हैं। क्योंकि, कोच और बोगी दोनों ही अलग चीज है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से कोच और बोगी के बारे में अंतर बताने जा रहे हैं। जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें। 

Difference: रेलवे में कोच और बोगी में क्या होता है अंतर, जानें
Difference: रेलवे में कोच और बोगी में क्या होता है अंतर, जानें

Difference: रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर हम अक्सर ढूंढते हैं कि हमारी सीट वाला कोच किस जगह आकर रूकेगा। कुछ लोग कोच को बोगी बोलकर उसके रूकने के स्थान तक पहुंचते हैं। वहीं, जब किसी को अपना पता बताना होता है, तो अक्सर कहा जाता है कि हम फलां बोगी में बैठे हैं। यदि आप भी इसी तरह से बोगी बोला करते हैं, तो आप गलत बोलते हैं। क्योंकि, कोच और बोगी दोनों ही अलग-अलग चीजें हैं। आज हम आपको इस लेख  माध्यम से कोच और बोगी के बीच अंतर को बताएंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि कोच के अंदर क्या-क्या होता है। 

 

क्या होती है बोगी

 

बोगी पर बैठकर आप सवारी नहीं कर सकते हैं। क्योंकि, बोगी रेलवे कोच का एक भाग होता है, जिस पर कोच टिका होता है। यानि जो आप रेलवे के पहिये देखते हैं वह एक बोगी से जुड़े होते हैं। चार से छह पहियों को एक्सल से जोड़ा जाता है, जिसके बाद एक बोगी तैयार होती है। वहीं, एक कोच में दो बोगी होती हैं,  जिस पर कोच को जोड़ा जाता है। यानि एक कोच में कुल आठ पहिये होते हैं, जो कि दो बोगियों से जुड़े होते हैं।

 

बोगियों में फिट होते हैं ब्रेक्स और स्प्रिंग

ट्रेन को रोकने के लिए बोगियों में ही ब्रेक्स को फिट किया जाता है। इसके लिए बोगी में हर पहिये पर ब्रेक फिट होते हैं, जिससे पूरी ट्रेन को एक समान रोका जा सके। वहीं, ट्रेन को हिचकोलों से बचाने के लिए बोगी में स्प्रिंग को फिट किया जाता है, जिनकी संख्या 04 से 06 रहती है। यह मोटी स्प्रिंग होती हैं, जो ट्रेन चलने के दौरान बड़ों झटकों को झेल जाती है।  



क्या होता है कोच 

 

ट्रेन के जिस डिब्बे में बैठकर आप यात्रा करते हैं, उसे कोच या कार कहा जाता है। रेलवे आपसे इसी कोच में दी जाने वाली सीट का किराया वसूल करता है। इसमें आप को एसी और नॉन एसी की सुविधा मिल जाती है। यह जनरल से लेकर फर्स्ट क्लास एसी तक होते हैं, जिसमें उसकी श्रेणी के हिसाब से किराया तय होता है। 

 

कोच में बने होते हैं कंपार्टमेंट

एक पैसेंजर ट्रेन में एसी, नॉन एसी, जनरल और लगेज कोच को मिलाकर 24 कोच तक लगाए जाते हैं। कई बार इनकी संख्या कम या ज्यादा हो सकती है। अब आपको बता दें कि एक कोच में सीटों को लेकर कंपार्टमेंट बने होते हैं। एक कंपार्टमेंट में छह से आठ सीटे होती हैं, जिसे हम 02 लोअर बर्थ, 02 मीडिल बर्थ, 02 अपर बर्थ और 02 साइड बर्थ के रूप में जानते हैं। ऐसी कोच में यह संख्या 06 हो जाती है। 

 

एक कोच में कितनी होती हैं सीटें

एक कंपार्टमेंट में छह से आठ सीटें होती हैं। वहीं, एक कोच में अधिकतम 09 कंपार्टेमेंट होते हैं। ऐसे में एक कोच में अधिकतम 72 सीटें होती हैं। एक कोच में एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे तक गुजरने वाले रास्ते को लॉन कहा जाता है। यह लॉन साइड बर्थ और छह एक साथ दी गई सीटों के बीच होता है। 

 

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