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Diwali 2022: जानें क्या होते हैं ग्रीन पटाखें और क्या अंतर है पारम्परिक पटाखों और ग्रीन पटाखों में

दिवाली का त्यौहार पटाखों की कमी से सुना न लगे इसके लिए राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान यानी नीरी ने ग्रीन पटाखें तैयार किये हैं, आइये जानें क्या हैं ये ग्रीन पटाखें और कैसे अलग हैं ये पारम्परिक पटाखों से  

Diwali 2022
Diwali 2022

Diwali 2022: दिवाली आते ही बड़ों से लेकर बच्चों तक सभी के बीच पटाखें जलाने का उत्साह होता है. लेकिन दिवाली के बीतते ही अत्यधिक पटाखें जलाने के कारण शहरों में वायु प्रदूषण के कारण स्मोग की एक लेयर बन जाती है, ऐसे में लोगों का त्यौहार भी फीका न पड़ें और शहर भी प्रदूषण रहित रहें इसके लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT ने ग्रीन पटाखों जलाने का सुझाव दिया है. चूँकि ये पटाखें जलाने, आवाज और रंगों में सामान्य पटाखों के जैसे ही होते हैं जिससे आपका दिवाली पर पटाखें जलाने का उत्साह भी फीका नहीं होगा और पर्यावरण को किसी तरह की हानि भी नहीं पहुंचेगी.  आइये जानें क्या होते हैं ग्रीन पटाखे और कैसे होती हैं इनकी पहचान

क्या होते हैं ग्रीन पटाखें?
ग्रीन पटाखों की खोज राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान यानी नीरी ने की है. ये पटाखें भी पारम्परिक पटाखों के जैसे ही होते हैं लेकिन इनमें पारम्परिक पटाखों की तुलना में प्रदूषण बहुत कम होता है. ग्रीन पटाखें सामान्य पारम्परिक पटाखों की तुलना में पर्यावरण में 40 से 50 प्रतिशत तक कम प्रदूषण फैलाते हैं अर्थात ये पटाखें भी पूरी तरह से प्रदूषण फ्री नहीं होते हैं लेकिन सामान्य पटाखों की तुलना में ये प्रदूषण बहुत ही कम फैलाते हैं.  

सामान्य पटाखों को जलाने से बड़ी मात्रा में नाइट्रोजन और सल्फर गैस का उत्सर्जन होता है जो कि वायु मंडल में प्रदूषण का कारण बनता है. जबकि ग्रीन पटाखों को बनाते हुए ये ध्यान रखा गया है कि, इनसे नाइट्रोजन और सल्फर जैसी गैसों का उत्सर्जन बहुत ही कम मात्रा में हो. 

ग्रीन पटाखें 3 तरह के होते हैं- SWAS, SAFAL और STAR 

SWAS- ये ऐसे पटाखें होतें हैं, जो वाटर रिलीजर करते हैं, ये हवा में जलवाष्प छोड़ कर निकलने वाली धूल को दबा देता है. इसमें पोटैशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल नहीं होता है और निकलने वाले धूलकण लगभग 30 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं.
  
SAFAL- इसमें पटाखें एल्यूमीनियम से सुरक्षित होते है इसमें एल्यूमीनियम का न्यूनतम उपयोग होता है. इसमें  एल्यूमीनियम के स्थान पर मैग्नीशियम का उपयोग किया जाता है. इससे पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम आवाज होती है.

STAR- ये थर्माइट सुरक्षित पटाखें हैं इसमें पोटेशियम नाइट्रेट का प्रयोग नहीं किया जाता है और सल्फर के कारण इसमें  कम कणों का उत्सर्जन और कम आवाज होती है.

पारम्परिक पटाखें ग्रीन पटाखों से कई गुना अधिक जहरीली धातुएं उत्सर्जित करते हैं. जो स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण और वायुमंडल के लिए भी हानिकारक होते हैं. पटाखों से निकलने वाला सफेद रंग एल्युमिनियम, मैग्नीशियम और टाइटेनियम के कारण होता है, जबकि नारंगी रंग का कारण कार्बन या आयरन होता है इसी तरह, पीले रंग का कारण सोडियम यौगिक और   नीले - लाल रंग का कारण कॉपर के यौगिक और स्ट्रोंटियम कार्बोनेट के कारण और हरा रंग बेरियम मोनो क्लोराइड लवण या बेरियम नाइट्रेट या बेरियम क्लोरेट के कारण होता है.