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Entrepreneur: IIT जाने के बजाय खुद का Business कर 150 लोगों को दिया रोजगार, पढ़ें राशि अग्रवाल की कहानी

Entrepreneur: इस लेख के माध्यम से हम आज आपको राशि अग्रवाल की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी जुड़वा बहन की तरह आईआईटी में दाखिला लेने के बजाय अपने करियर को उद्यमी बनकर पंख लगाए। तो, आइये जानते हैं राशि की कहानी।

Entrepreneur:  IIT जाने के बजाय, खुद का Business कर 150 लोगों को दिया रोजगार, पढ़ें राशि अग्रवाल की कहानी
Entrepreneur: IIT जाने के बजाय, खुद का Business कर 150 लोगों को दिया रोजगार, पढ़ें राशि अग्रवाल की कहानी

Entrepreneur: सभी घरों में बच्चों को लेकर माता-पिता सपने संजोते हैं। वे बच्चों को या तो अपने नक्शे कदम पर चलाते हुए उन्हें अपनी तरह करियर चुनने पर जोर देते हैं, या फिर भाई या बहन से प्रेरणा से लेते हुए करियर की सलाह देते हैं। हालांकि, बच्चे उस राह पर चलने की कोशिश करते हैं, लेकिन असफल होने पर वह राह से हट जाते हैं। हालांकि, कुछ ऐसे बच्चे भी होते हैं, जो एक जगह से असफल होने पर किसी दूसरे क्षेत्र में अपने करियर को उड़ान देते हैं। आज हम आपको राशि की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी जुड़ाव बहन की तरह आईआईटी में जाने के बजाय खुद का पर्यावरण के अनुकूल खुद का व्यावसाय शुरू किया। साथ ही 150 लोगों को रोजगार भी दिया।

 

आर्किटेक्चर करने के बाद सपनों की दिशा में किया काम 

राशि मूलरूप से गुजरात के सूरत की रहने वाली हैं। उनकी बहन का आईआईटी में दाखिला हो गया था। हालांकि, 22 वर्षीय राशि ने अपने लिए अलग ही रास्ता तय कर रखा था। उन्होंने आर्किटेक्चर में डिग्री हासिल करने के बाद अपने सपनों की दिशा में काम करने का फैसला किया। राशि ने पर्यावरण के अनुकूल और हस्तनिर्मित व्यवसाय बनाने की आवश्यकता से प्रेरित होकर प्लानर्स पर काम किया। दरअसल, प्लानर्स एक बुकलेट की तरह होता है, जिसे योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बाजार में यह अलग-अलग दाम व आकार में मिल जाते हैं।  

 

रूहानी रंग नाम से शुरू किया स्टेशनरी का कारोबार

राशि ने अपने पंखों को उड़ान देते हुए 'रूहानी रंग' नाम से स्टेशनरी का कारोबार शुरू किया। उनके उत्पाद इंस्टाग्राम पर मशहूर हैं। यहां उनके  39,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं। वह अपने उत्पादों को लेकर इंस्टाग्राम पर पोस्ट डालती रहती हैं। 



राशि के मुताबिक, "लोगों ने इसे एक शौक कहा था, लेकिन मुझे पता था कि यह मेरा जुनून था। जब मैंने कपास के कचरे से बने और ग्रामीण कारीगरों द्वारा हाथ से सिले अपने प्लानर्स को लांच किया, तो लोगों ने मेरी सराहना की,"।

 

150 लोगों को दिया रोजगार 

राशि सिर्फ अपने उत्पादों को पर्यावरण के अनुकूल नहीं बना रही हैं, बल्कि उन्होंने रोजगार देने की दिशा में भी काम किया है। उन्होंने ग्रामीण स्तर पर 150 लोगों के हाथों में रोजगार दिया, जिससे लोगों का घर चल सके। इसके तहत वह अपने उत्पादों को ग्रामीणों से बनवाती हैं और उन उत्पादों की सोशल मीडिया के माध्यम से ब्रांडिंग भी करती हैं। 

 

प्लानर्स के अलावा यह उत्पाद भी करवाती हैं तैयार

राशि ग्रामीण कारीगरों से प्लानर्स के अलावा दस्तकारी डायरी, कैलेंडर, यात्रा पत्रिकाएं, मग और नोटबुक भी डिजाइन करवाती हैं। इसके लिए वह मधुबनी और वारली जैसे पारंपरिक कलाओं को एक आधुनिक रूप देकर अपने उत्पादों का प्रचार करती हैं। राशि कहती हैं कि वह इस बात की गारंटी दे सकती हैं कि उन्हें अपने व अपने व्यवसाय के ऊपर विश्वास है।

 

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