1. Home
  2. Hindi
  3. IFS Success Story: पिता लाते थे किताब और मां जोर से पढ़कर सुनाती थी, पढ़ें देश की पहली दृष्टिबाधित IFS Beno Zephine की कहानी

IFS Success Story: पिता लाते थे किताब और मां जोर से पढ़कर सुनाती थी, पढ़ें देश की पहली दृष्टिबाधित IFS Beno Zephine की कहानी

IFS Success Story: देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा को क्रैक करना मुश्किल होता है। यदि आपके साथ  पहले से ही कोई परेशानी है, तब यह परीक्षा और भी मुश्किल हो जाती है। आज हम इस लेख के माध्यम से देश की पहली दृष्टिहीन आइएफएस अधिकारी एनएस बेनो जेफिने के संघर्ष की कहानी पढ़ेंगे।

IFS Success Story: पिता लाते थे किताब और मां जोर से पढ़कर सुनाती थी, पढ़ें देश की पहली  दृष्टिबाधित IFS Beno Zephine की कहानी
IFS Success Story: पिता लाते थे किताब और मां जोर से पढ़कर सुनाती थी, पढ़ें देश की पहली दृष्टिबाधित IFS Beno Zephine की कहानी

IFS Success Story: यदि जीवन में सफल होना है, तो संसाधनों से अधिक हौंसले की जरूरत होती है। कठिन मेहनत के साथ हौंसला रखकर बड़े से बड़े मुकाम को हासिल किया जा सकता है। यह साबित किया है देश की पहली दृष्टिहीन आइएफएस अधिकारी बेनो जेफिने ने, जिन्होंने मुश्किलों के बाद भी अपना हौंसला नहीं खोया। उन्होंने दृष्टिहीन होने के बावजूद भी  कठिन परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लिया, जिसमें उनके परिवार ने पूरा सहयोग दिया और अंत में वह देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में शामिल सिविल सेवा को क्रैक कर अधिकारी बन गई। तो आइये बेनो जेफिने की कहानी पढ़ते हैं, जो निश्चित ही कई लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन सकती है। 

 

पिता लाते थे किताब और मां पढ़ने में करती थी मदद

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बेनो अपना सपना पूरा करने के लिए जहां भी जाना चाहती थी, उनके पिता उन्हें लेकर जाते थे। साथ ही उनके कहने पर पढ़ने के लिए किताब भी लाकर देते थे। उन किताबों को पढ़ने में उनकी मां मदद किया करती थी। मां किताबों को जोर से पढ़कर बेनो को सुनाया करती थीं। बेनो की मां गृहणी हैं, जबकि पिता ल्यूक एंथोनी चार्ल्स रेलवे में कार्यरत हैं।

 

दिव्यांगता को दिमाग से निकालना जरूरी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बेनो ने मीडिया में दिए साक्षात्कार में बताया कि बेनो के कोई भी रोल मॉडल नहीं है। वह खुद पर ही यकीन रखती हैं। वह अक्सर स्कूल और कॉलेज में होने वाली डीबेट में लगातार हिस्सा लेती थी। बेनो का कहना है कि इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। हिम्मत रखकर काम करना चाहिए, सब काम हो जाते हैं। यहां ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि कुछ करने के लिए अक्षम होने या दिव्यांगता को दिमाग से निकालना बेहद जरूरी है।

 

सॉफ्टवेयर की मदद से की तैयारी

बेनो के मुताबिक, यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कठिन थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने ब्रेल बुक्स को पढ़ा। साथ ही जेएडब्ल्यूएस नाम का सॉफ्टवेयर भी तैयारी में उपयोगी रहा। यह सॉफ्टवेयर दृृष्टि बाधितों को कंप्यूटर स्क्रीन से किताबों को स्कैन करके पढ़ने में मदद करता है। बेनो का यह भी कहना है कि यदि दृृष्टिबाधितों को किताबें पढ़ने की सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो कई लोग अपना अधिकारी बनने का सपना पूरा कर सकते हैं।

 

शिक्षण संस्थानों में सफल होने के दिए टिप्स

बेनो ने सफलता का स्वाद चखने के बाद कई शिक्षण संस्थानों में छात्रों को सफलता के टिप्स दिए। कई दृष्टिबाधित छात्र भी उनसे सफल होने के लिए मूल मंत्र लेते हैं। इसके साथ ही चेन्नई में उन्हें लोगों द्वारा प्रेरणा स्त्रोत के तौर पर खूब पसंद किया जाता है। यही वजह है कि वह सोशल मीडिया पर भी जाना-पहचाना नाम है।

 

Read: IAS Success Story: सुबह जिम और दिनभर पढ़ाई , पहले IPS फिर IAS बने अभिषेक