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फार्मास्युटिकल फर्मों के मार्केटिंग तरीकों की सरकार करेगी समीक्षा, जानें किसकी अध्यक्षता में बनी कमेटी?

Committee for pharma companies: केंद्र सरकार ने फार्मास्युटिकल फर्मों के विपणन प्रथाओं को विनियमित करने के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है.इस समिति की अध्यक्षता वी.के पॉल करेंगे. विनोद कुमार पॉल वर्तमान में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) है.  

फार्मास्युटिकल फर्मों के मार्केटिंग तरीकों की सरकार करेगी समीक्षा
फार्मास्युटिकल फर्मों के मार्केटिंग तरीकों की सरकार करेगी समीक्षा

Committee for pharma companies: केंद्र सरकार ने फार्मास्युटिकल फर्मों के विपणन प्रथाओं को विनियमित करने के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है. इस समिति की अध्यक्षता वी.के पॉल करेंगे. विनोद कुमार पॉल वर्तमान में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) है. जो फार्मास्युटिकल फर्मों के मार्केटिंग तरीकों से जुड़े मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और साथ ही उचित सुझाव देगी ताकि फार्मास्युटिकल फर्मों के विपणन प्रथाओं को सुधारा जा सके.

कमेटी के अन्य सदस्य:

वी.के पॉल की अध्यक्षता वाली इस कमेटी के अन्य सदस्यों में एस अपर्णा (सचिव-फार्मास्युटिकल विभाग),केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष नितिन गुप्ता, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण और एक अन्य सदस्य के रूप में कार्मिक विभाग (DoP) के एक संयुक्त सचिव (नीति) शामिल है. इसके कानूनी पहलू को ध्यान में रखते हुए इसमे कानून से जुड़े किसी विशेषज्ञ को भी जोड़ा जा सकता है.  

कमेटी का गठन क्यों किया गया?

  • इस कमेटी का गठन फार्मास्युटिकल फर्मों की विपणन सम्बन्धी अनियमितताओं का समाधान निकालने के लिए किया गया है. फार्मास्युटिकल फर्मों में व्याप्त इस प्रकार की खामियों को दूर करके एक संतुलित फार्मास्युटिकल मार्केट को स्थापित किया जा सकता है. 
  • यह उन प्रावधानों की जांच करेगा जो सरकारी विभागों के अधीन फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रथाओं को विनियमित करने और स्वास्थ्य सेवा उद्योग के हस्तक्षेपों से सम्बंधित है. साथ ही कमेटी फर्मों के विपणन प्रथाओं को विनियमित करने के लिए 'कानूनी रूप से लागू करने योग्य' तंत्र पर भी विचार करेगी.
  • इसके गठन का एक मुख्य कारण यह भी था कि कुछ फार्मा कंपनियां दवाओं के प्रचार और प्रचार पर अत्यधिक राशि खर्च कर रही हैं. हाल के कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान एंटी फीवर मेडिसिन डोलो 650mg के रिकॉर्ड बिक्री की थी. डोलो 650mg के विपणन बजट के कारण इस उच्च स्तरीय समिति पर विचार होने लगा था.

फार्मास्युटिकल मार्केटिंग के लिए दिशानिर्देश:

फार्मास्युटिकल मार्केटिंग के लिए दिशानिर्देश पहले से ही बने हुए है. वर्ष 2015 में दवा कंपनियों के लिए DoP की यूनिवर्सल कोड ऑफ फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस (UCPMP) लागू हुई थी. जिसमे कहा गया है कि चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 के तहत, भारतीय चिकित्सा परिषद (व्यावसायिक आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 स्वास्थ्य पेशेवरों और दवा कंपनियों के बीच संबंध स्थापित करता है. 

UCPMP के बारें में:

यूनिवर्सल कोड ऑफ फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस 1 जनवरी, 2015 से लागू है. इसका उद्देश्य फार्मास्युटिकल कंपनियों द्वारा अनैतिक व्यवहारों को रोकना साथ ही मार्केटिंग के संदर्भ में दवा कंपनियों के आचरण को नियंत्रित करना है. इसमे चिकित्सकों के आतिथ्य, नकद या मौद्रिक अनुदान से संबंधित प्रावधानों पर भी दिशानिर्देश हैं.