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IFS Success Story: हिंदी पृष्ठभूमि की वजह से हुई थी परेशानी पर नहीं मानी हार, पढ़ें IFS प्रवीन कासवान की कहानी

IFS Success Story: सिविल सेवा को पास करने वाले प्रवीन कासवान हिंदी पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते थे। इस वजह से उन्हें शुरुआत में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएफएस अधिकारी बन गए। 

IFS Success Story: हिंदी पृष्ठभूमि की वजह से हुई थी परेशानी पर नहीं मानी हार, पढ़ें IFS प्रवीन कासवान की कहानी
IFS Success Story: हिंदी पृष्ठभूमि की वजह से हुई थी परेशानी पर नहीं मानी हार, पढ़ें IFS प्रवीन कासवान की कहानी

IFS Success Story: यदि मन में किसी काम को करने की चाह हो, तो फिर कोई भी मुश्किल मायने नहीं रखती है। साथ ही यह यदि लक्ष्य बड़ा भी हो, तो फिर आपकी पृष्ठभूमि मायने नहीं, बल्कि आपकी मेहनत और लगन मायने रखती है। आज हम आपको प्रवीन कासवान की कहानी बताने जा रहे हैं, जिनकी पृष्ठभूमि हिंदी थी। ऐसे में उन्हें शुरुआत में काफी परेशानी हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पढ़ाई पूरी करने के साथ उन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित व कठिन परीक्षाओं में शुमार सिविल सेवा को पास किया और आईएफएस अधिकारी बन गए। तो आइये जानते हैं उनके आईएफएस बनने के सफर के  बारे में। 

 

प्रवीन कासवान का परिचयः

परवीन मूल रूप से राजस्थान के हनुमानगढ़ जिला स्थित मिर्जावाली मेर गांव के निवासी हैं। परिवार में पिता हंसराज कासवान हैं। उन्होंने एक ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी थी कि उनकी मां की जब शादी हुई थी तब उनकी मां की उम्र सिर्फ 13 साल थी। वहीं, जब प्रवीन कासवान का जन्म हुआ तो मां की उम्र सिर्फ 16 साल थी। 



गेट परीक्षा में हासिल की 191वीं रैंक   

परवीन कासवान ने 2008 में एमिटी यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस, एयरोनॉटिकल एंड एयरोनॉटिकल/स्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद प्रवीन ने साल 2012 में गेट जैसी कठिन परीक्षा दी, जिसमें उन्होंने 191वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से स्कॉलरशिप दी गई। उन्होंने स्नातक के बाद IISc बेंगलुरु से इंजीनियरिंग डिजाइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वहीं, 2016-2018 में उन्होंने देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट से फॉरेस्ट्री में मास्टर्स डिग्री को पूरा किया।

 

हिंदी पृष्ठभूमि होने की वजह से हुई परेशानी

प्रवीन मध्यवर्गीय परिवार से थे। उनकी पृष्ठभूमि हिंदी थी। ऐसे में उन्हें इस वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने जब कॉलेज में दाखिला लिया तो, वहां का माहौल बिल्कुल अलग था। बच्चे अंग्रेजी में बात किया करते थे और प्रवीन हिंदी बोलते थे। शुरुआत में उन्हें थोड़ी परेशानी हुई। हालांकि, परेशान होने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया। 



यूपीएससी में हासिल की 81वीं रैंक

प्रवीन कासवान का सिविल सेवाओं के प्रति रूझान था। उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत के साथ तैयारी की। वह साल 2015 की सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुए और 81वीं रैंक हासिल कर सफलता का स्वाद चखा। मीडिया संस्थानों को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि उन्होंने आईएफएस की नौकरी पाने के लिए कड़ी मेहनत की, क्योंकि इसकी कटऑफ बाकी प्रशासनिक सेवाओं के मुकाबले अधिक रहती है। ऐसे में उन्हें इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। वहीं, उन्होंने इस नौकरी को पाने के लिए एनसीईआरटी किताबें, मॉक टेस्ट व अखबार को आधार बनाया। 






सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहते हैं प्रवीन

प्रवीन कासवान सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहते हैं। वह वन्यजीवों से जुड़े तस्वीरें व उनके बारे में जानकारी को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करते रहते हैं। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर फोलोर्स की संख्या लाखों में है। वहीं, ट्वीटर पर भी उन्हें अधिक लोग फॉलो करते हैं। लोग उनकी फोटोग्राफी को भी पसंद करते हैं।

 

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