1. Home
  2. Hindi
  3. IAS Success Story: कोचिंग में महंगी फीस देने के बजाय Youtube से पढ़कर सिविल सेवा में हासिल की 14वीं रैंक

IAS Success Story: कोचिंग में महंगी फीस देने के बजाय Youtube से पढ़कर सिविल सेवा में हासिल की 14वीं रैंक

IAS Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में हर साल लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं। हालांकि, इसमें कुछ ही अभ्यर्थी सफलता का स्वाद चखते हैं। इसी में शामिल हैं तरूणी पाण्डेय, जिन्होंने सोशल मीडिया को हथियार बनाकर सिविल सेवा में परीक्षा में सफलता हासिल कर अपना परचम लहराया है।  

IAS Success Story: कोचिंग में महंगी फीस देने के बजाय  Youtube से पढ़कर सिविल सेवा में हासिल की 14वीं रैंक
IAS Success Story: कोचिंग में महंगी फीस देने के बजाय Youtube से पढ़कर सिविल सेवा में हासिल की 14वीं रैंक

IAS Success Story: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए समय, निष्ठता और एक्रागता की जरूरत होती है। इसके लिए छात्र टाइम टेबल बनाकर अपनी तैयारी को धार देते हैं। वहीं, कुछ छात्र तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह से दूरी बना लेते हैं। हालांकि, यदि सोशल मीडिया को ठीक तरह से इस्तेमाल किया जाए, तो इससे काफी मदद मिलती है। यह सच कर दिखाया पश्चिम बंगाल की रहने वाले तरूणी पाण्डेय ने। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से तरूणी की ऐसी ही कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने बिना कोचिंग के सोशल मीडिया के माध्यम से तैयारी की और सिविल सेवा परीक्षा में 14वीं रैंक के साथ सफलता हासिल की। 

मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली तरुणी ने पश्चिम बंगाल से ही 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने 12वीं की पढ़ाई जामताड़ा से जेबीसी प्लस टू हाई स्कूल से पूरी की। तरुणी ने साल 2019 में मिहिजाम कोड़ापाड़ा स्थित इंदिरा गांधी नेशनल ओपेन यूनिवर्सिटी (IGNOU) से स्नातक की शिक्षा पूरी की। वहीं, साल 2021 में अग्रेंजी साहित्य से अपनी मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान कभी भी कोई कोचिंग या ट्यूशन की मदद नहीं ली।

 

पढ़ाई के लिए यूट्यूब को बनाया स्त्रोत

तरूणी ने सिविल सेवा की परीक्षा के लिए किसी कोचिंग संस्थान में दाखिला नहीं लिया था। बल्कि, वह खुद से ही तैयारी करती थी। संसाधनों का रोना रोने के बजाय वह सोशल मीडिया पर मौजूद पठन सामाग्री की मदद लेती थी। इसके लिए उन्होंने यूट्यूब पर मौजूद सिविल सेवा से जुड़ी पठन सामाग्री का अध्ययन करना शुरू किया। यही नहीं तरुणी ने सिर्फ सात महीनों की तैयारी के बाद UPSC की परीक्षा दी और अपने पहले प्रयास में ही सफलता का स्वाद चखा। 

 

कभी डॉक्टर बनने का देखा था सपना

ऐसा नहीं था कि तरूणी ने बचपन से ही सिविल सेवा में जाने का मन बना रखा था, बल्कि वह बचपन से ही बड़े होकर डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। हालांकि, इस बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में कमांडेंट रहे शहीद प्रमोद कुमार, जो कि उनके मौसा थे, से मिली प्रेरणा के बाद उन्होंने और कुछ बड़ा करने का फैसला लिया। तरुणी के मुताबिक, "मौसा सभी की निशुल्क भाव से मदद करने के लिए हमेशा आगे रहते थे। उन्हीं से मिली प्रेरणा के बाद मैंने इस राह पर चलने का निर्णय किया था।"

इस तरह सिविल सेवा में जाने के लिए बनाया मन 

तरुणी के मुताबिक, उनके मौसा जब शहीद हुए, तो वह मौसा के शहीद होने के बाद उनके घर पहुंची। वहां उनकी बात कई अधिकारियों से हुई। तरूणी के मुताबिक, अधिकारियों की शालीनता और सौम्य व्यवहार को देखकर उनके मन में भी सिविल सेवक बनने की इच्छा जागी। यही वह क्षण था, जब उन्होंने सिविल सेवा में करियर बनाने का मन बना लिया था। उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी और 14वीं रैंक हासिल कर सफलता हासिल कर ली।

 

तरूणी कहती हैं कि इस परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए सबसे जरूरी है कठिन परिश्रम और कड़ी मेहनत। अभ्यर्थियों में धैर्य रखने की क्षमता भी होनी चाहिए। साथ ही स्वयं के प्रति ईमानदारी भी जरूरी है। अंग्रेजी विषय को लेकर तरुणी का कहना है कि ऐसा जरूरी नहीं है कि UPSC की तैयारी के लिए उम्मीदवार की अंग्रेजी बहुत अच्छी हो। इस परीक्षा को 22 भाषाओं में दिया जा सकता है। यह बात समझनी होगी कि अंग्रेजी ज्ञान का पैमाना नहीं है।