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IAS Success Story: कैंसर से जूझ रही थी मां, बेटी ने नहीं हारी हिम्मत, सिविल सेवा में पाई सफलता

IAS Success Story: सिविल सेवा की परीक्षा पास करना आसान नहीं होता है। यह और भी तब मुश्किल हो जाता है, जब परिवार में कोई गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से पल्लवी वर्मा की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी इस मुश्किल परीक्षा को मेहनत से पास किया।

IAS Success Story: कैंसर से जूझ रही थीं मां, बेटी ने नहीं हारी हिम्मत, सिविल सेवा में पाई सफलता
IAS Success Story: कैंसर से जूझ रही थीं मां, बेटी ने नहीं हारी हिम्मत, सिविल सेवा में पाई सफलता

IAS Success Story: सिविल सेवा परीक्षा को पास कर अधिकारी बनना अधिकांश युवाओं का सपना होता है। हालांकि, यह सपना सच करना आसान नहीं होता है। क्योंकि, इस परीक्षा को पास करने के लिए कठिन मेहनत की जरूरत होती है। वहीं, यदि घर में कोई अपना किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो, तो फिर एकाग्र होकर इस परीक्षा के लिए तैयारी करना और मुश्किल होता है। आज हम आपको पल्लवी वर्मा की कहानी बताने जा रहे हैं, जिनकी मां कैंसर से पीड़ित थी, लेकिन पल्लवी ने फिर भी एकाग्र होकर अपनी तैयारी को जारी रखा और सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की।



इंदौर में हुआ पालन-पोषण, चेन्नई में लगी नौकरी

पल्लवी वर्मा का जन्म और पालन-पोषण इंदौर में हुआ, जहां से उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की। वह अपने परिवार की पहली लड़की हैं, जो पढ़ने के लिए यूनिवर्सिटी भी गई। पल्लवी एक साधारण निम्न-मध्यम वर्गीय रूढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखती थीं। बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पल्लवी एक एमएनसी के लिए सॉफ्टवेयर टेस्टर के रूप में चेन्नई चली गईं।



एमएनसी में नौकरी के दौरान सिविल सेवा का लिया निर्णय 

एमएनसी में अपनी नौकरी के 10-11 महीने पूरे करने के बाद 2013 में उन्होंने महसूस किया कि वह सिविल सेवा परीक्षा का प्रयास करना चाहती थी। हालांकि, यह उतना आसान नहीं था जितना उन्होंने सोचा था। पल्लवी पहली बार 2013 में परीक्षा में शामिल हुई थी, जब वह फेल हो गई थी। उन्होंने पेपर पैटर्न को जानने का प्रयास न करने और इस परीक्षा की गहराई का अच्छी तरह से अध्ययन न करने की गलती की। 

 

पल्लवी ने दूसरा व तीसरा प्रयास किया, लेकिन  प्रारंभिक परीक्षा में भी सफल नहीं हो सकीं। वह अपने चौथे प्रयास में प्रीलिम्स को क्रैक करने में सफल रहीं, लेकिन वह मेन्स को क्रैक नहीं कर पाई और अपने छठे प्रयास में वह अपने यूपीएससी सिविल सेवा के साक्षात्कार में असफल रही।

 

पल्लवी उस परीक्षा में 6 बार अनुत्तीर्ण हुई थी, जिसे वह उत्तीर्ण करना चाहती थी। उन्होंने अपने प्रयास में अपनी सारी उम्मीद खो दी थी, लेकिन उनके माता-पिता इतने सहायक थे कि उन्होंने पल्लवी को हार नहीं मानने दी।

 

2020 में पता चला कि कैंसर से जूझ रही है मां

2020 में उन्हें पता चला कि उनकी मां कैंसर से जूझ रही थीं और उनकी कीमोथेरेपी चल रही थी। वह अपनी मां के पास जाना चाहती थी और उनके लिए वहां रहना चाहती थी, लेकिन फिर भी उन्होंने अपना धैर्य बनाए रखा और परीक्षा के लिए अंतिम प्रयास किया। वह इस बार सफल हुई। सूची में उनकी 340 रैंक थी।

 

अपनी तैयारी के दौरान हर समय पल्लवी वर्मा ने कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने हर प्रयास के साथ अपनी कमजोरियों को सुधार कर परीक्षा को अच्छे अंकों से पास किया। पल्लवी वर्मा ने अपने धैर्य से साबित किया है कि जिंदगी में किसी भी मुश्किल मुकाम को हासिल किया जा सकता है। 

 

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