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Incredible India: देश के ऐसे 8 भव्य किले जिनकी वास्तुकला और सुन्दरता का नहीं है कोई जोड़

देश में कई ऐसे भव्य किले हैं जिनकी वास्तुकला और सुन्दरता का देश क्या विश्व में भी कोई जोड़ नहीं है. ये किले भारतीय वास्तुकला के बेजोड़ उदाहरण हैं, आइये जानें देश के ऐसे 8  भव्य किलों और उनकी सुन्दरता के बारे में

8 Beautiful Forts of India
8 Beautiful Forts of India

Incredible India: किसी देश की वास्तुकला उस देश की समृद्धि और संस्कृति का प्रतीक होती है. भारतीय वास्तुकला को  यहाँ के भव्य किलों और महलों में देखा जा सकता है. देश के अलग-अलग कोनों में अलग-अलग राजवंशों ने शासन किया और सभी ने अपने पसंद से अलग-अलग प्रकारों के अनेक भव्य किलों का निर्माण करवाया है. ये किले भारतीय वास्तुकला के बेजोड़ नमूने हैं. किसी किले में भव्य कला कृतियां और निक्काशी है तो कोई अपनी मजबूती और कठोर शिल्पकला के लिए विख्यात है. आइये जानें भारत के 8 विश्व प्रसिद्ध और मजबूत किलों के बारे में  

1. कुम्भलगढ़ किला :
राजस्थान के उदयपुर से 84 किमी उत्तर में स्थित, अरावली रेंज में जंगलों के बीच स्थित है, कुंभलगढ़ मेवाड़ क्षेत्र में चित्तौड़गढ़ के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण गढ़ है. इस दुर्ग का निर्माण 15 वीं शताब्दी में राणा कुंभा द्वारा करवाया गया था. ये महाराणा प्रताप की जन्म स्थली भी है. ये किला अत्यंत ही मजबूत है जिसे आज तक कोई दुश्मन पार नहीं कर पाया है इस किले की दीवारे अत्यंत चौड़ी है. इनकी चौड़ाई लगभग 36 किलोमीटर तक फैली हुई है जो आठ घोड़ों के बराबर है. कुम्भलगढ़ किले की दीवारे अंत्यंत मजबूत हैं जिस कारण इसे ग्रेट वाल ऑफ़ इंडिया कहा जाता है. वर्ष 2013 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है. किला में सात विशाल द्वार हैं. इस भव्य किले के अंदर की मुख्य इमारतों में बादल महल, शिव मंदिर, वेदी मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर और मम्मदेव मंदिर प्रमुख हैं. इस किले में लगभग 360 मंदिर हैं, जिनमें 300 जैन मंदिर और अन्य  हिंदू हैं.

2. मेहरानगढ़ किला :
मेहरानगढ़ अर्थात "सूर्य का गढ़ ". ये किला भारत के सबसे भव्य किलों में से एक है. ये राजस्थान के जोधपुर में स्थित है. इसका निर्माण 500 वर्षों से भी अधिक समय पहले हुआ था, ये देश के सबसे बड़े किलों में से एक है. इस किले का निर्माण राव जोधा ने करवाया था. इस किले में 7 द्वार हैं जो राजा के किसी न किसी विजय के उपलक्ष्य में बनवाये गयें हैं. आपको जान कर हैरानी होगी कि इस किले का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास नहीं बल्कि जोधपुर के शाही परिवार के पास है. ये किला अपनी बेजोड़ वास्तुकला, अत्यंत सुन्दर महलों, भव्य प्रांगणों और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित एक संग्रहालय के लिए प्रसिद्ध है. ये किला लगभग 1200 एकड़ में विस्तृत और लगभग 400 फीट ऊँचा है. सरकारी विश्लेषणों के अनुसार, जोधपुर ग्रुप-मलानी इग्निअस सुइट कॉन्टैक्ट के नाम से प्रसिद्ध चट्टानी अंश पर खड़ा है, जो पूर्व-कैंब्रियन युग की आग्नेय गतिविधि के अंतिम चरण का साक्षी है। इसके कारण इस किले को एक राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक घोषित किया गया है. मुगलों और मारवाड़ क्षेत्र के बीच राजनीतिक सम्बन्ध होने के कारण इस किले में दोनों ही वस्तुकलाओं को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. इस किले की अन्तरम द्वार पर स्थित लोह पोल एक दिलचस्प संरचना है, इस संरचना में उन 15 रानियों के हाथों के निशान मौजूद हैं, जिन्होंने यहाँ खुद को सती किया था। लाल पत्थरों पर बने ये निशान चारों ओर भयग्रस्त माहौल पैदा करते हैं. 

3. आगरा का किला :
आगरा में स्थित ये किला मुग़ल वास्तुकला का एक खुबसूरत नमूना है. इस किले का निर्माण मुग़ल बादशाह अकबर ने वर्ष 1565 में करवाया था. इस किले की चारदीवारी के भीतर एक पूरा नगर बसा है जिनमें प्राचीन उत्कृष्ट इमारतें भी शामिल है. इसमें सफेद संगमरमर से निर्मित मोती मस्जिद, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, मुसम्मन बुर्ज स्थित है, मुसम्मन बुर्ज में ही वर्ष 1666 में शाहजहां का इंतकाल हुआ था. जहांगीर पैलेस, खास महल और शीश महल यहाँ की अन्य खुबसूरत वास्तुकला के नमूनों में से एक हैं. ये किला यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है.

4. ग्वालियर का किला :
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित है इस किले का निर्माण 8 वीं शताब्दी में करवाया गया था और तबसे इसमें अनेक वंशो के अलग-अलग वंशों के अनेक राजाओं ने शासन किया. जिस कारण इसमें अलग-अलग वास्तुकला के नमूने और मंदिर मिलते हैं. ये मध्य भारत में स्थित खुबसूरत स्थापत्य कलाओं में से एक है. इस किले में बेहतरीन नक्काशी, मध्यकालीन वास्तुकला, के बेजोड़ नमूने स्थित हैं.यहाँ के सबसे प्रसिद्ध स्मारकों में तेली का मंदिर और मान सिंह का महल है. तेली का मंदिर इस किले में बने सबसे ऊँचे स्मारकों में से एक है. ये मंदिर द्रविड़ वास्तुकला में निर्मित है. यहाँ बनी भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ की भव्य प्रतिमा एक  लोकप्रिय आकर्षण का केंद्र है. मानसिंह का महल तोमर शासक मानसिंह ने 15वीं सदी में बनवाया था ये नीले रंग की सिरेमिक टाइलों से निर्मित एक भव्य इमारत है. यहाँ जैन तीर्थकरों की भी अनेक विशाल मूर्तियाँ हैं.  

5. चित्तौड़गढ़ का किला :
ये किला राजस्थान में स्थित है. ऐसी मान्यता है कि इस किले का निर्माण 7 वीं शताब्दी में मौर्यों ने करवाया था. और इसके अनेक साक्ष्य भी मिलें हैं. मध्य काल में इसका निर्माण बप्पा रावल ने 724 ईस्वी करवाया था. जिसके बाद कई शासकों ने यहाँ शासन किया है. वर्ष 1303 में अल्लाउद्दीन खिलजी ने इस किले पर हमला किया जिसके बाद यहाँ की रानी पद्मावती ने जौहर कर के खुद को अग्नि के हवाले कर दिया था. कहा जाता है कि महारानी पद्मावती अत्यंत सुंदर थी और खिलजी उनको पाना चाहता था जिसके कारण उसने चित्तौडगढ़ पर चढ़ाई कर दी. रानी पद्मावती ने दुश्मन के हाथ आने से अच्छा खुद को मृत्यु दंड देना स्वीकार किया. दूसरी बार गुजरात के राजा बहादुर शाह ने मुगल सम्राट अकबर के साथ मिल कर 1567 में किले पर हमला किया, जो महाराणा उदय सिंह पर कब्जा करना चाहते थे और उसके बाद अंतिम बार 1616 में मुगल सम्राट जहांगीर ने किला फतह करने के लिए इस पर हमला किया. इस किले में कई प्रवेश द्वार हैं जिनमे पहला प्रवेश द्वार पैदल पोल के नाम से जाना जाता है इसके बाद भैरव पोल, हनुमान पोल, गणेश पोल, जोली पोल, लक्ष्‍मण पोल और आखिर में राम पोल स्थित है.
 
6. सोनार का किला 
ये किला राजस्थान के जैसलमेर में स्थित है. इस किले पर जैसे ही सूर्य की रौशनी पडती है ये सोने के जैसा चमकने लगता है. इसी कारण इसे सोनार किला कहा जाता है. ये किला रेगिस्तान के बीच में स्थित है जिस कारण इसे रेगिस्तान का दुर्ग भी कहा जाता है. इस किले के चारों और 99 गढ़ बने हैं. 

7. गोल कुंडा का किला :
गोल कुंडा हैदराबाद में स्थित एक प्रसिद्ध किला है. इस किले का निर्माण काकतीयों राजाओं द्वारा करवाया गया था.यह कुतुब शाही राजवंश का एक किला और गढ़ भी है, जो 120 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है. ये किला ग्रेनाईट की पहाड़ियों पर स्थित है जिसे देख कर ऐसा लगता है मानो ये पहाड़ पर खड़ा हो. इस किले में 8 भव्य द्वार और 87 बुर्ज हैं.    

8. आमेर का किला 
ये किला जयपुर में स्थित है. इस किले का निर्माण 16वीं सदी हुआ था. ये किला राजस्थानी कला और संस्कृति का एक अद्भुत नमूना है. इस किले के निर्माण की शुरुआत 16वीं शताब्दी के अंत में राजा मान सिंह ने की थी, जिसे सवाई जय सिंह द्वितीय और राजा जय सिंह प्रथम ने पूरा करवाया था. इस किले के निर्माण में 100 वर्ष का समय लगा था.