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Incredible India : जानें जगन्नाथ मंदिर के वो रहस्य, यहाँ होती हैं अनोखी घटनाएँ

देश में कई ऐसे प्रसिद्ध भगवान विष्णु के मंदिर हैं जहाँ कई ऐसी घटनाएँ होती हैं जिनका कारण बताने में विज्ञान भी हो जाता है फेल, ऐसा ही मंदिर है पुरी का जगन्नाथ मंदिर, आइये जानें क्या हैं इस भव्य मंदिर के रहस्य   

Jagannath Temple
Jagannath Temple

Incredible India : देश में कई ऐसे मंदिर हैं जो न केवल अपनी कलाकृति, मान्यता और प्रसिद्धी में आगे हैं बल्कि अपनी अनोखी घटनाओं के कारण भी फेमस हैं. ये मंदिर कई सौ वर्षों से लेकर कई हजार वर्षों तक के बने हैं. इनमें से एक है  ओडिशा स्थित जगन्नाथ मंदिर है. ओडिशा स्थित जगन्नाथ मंदिर भगवान विष्णु के 8वें अवतार भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है. ये मंदिर चार धामों में से एक है हिन्दू धर्म में चार धामों के प्रति ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु जब चारों धाम पर बसे तो सबसे पहले बदरीनाथ गए और वहां उन्होंने स्नान किया, जिसके बाद वो गुजरात के तट पर स्थित द्वारिका गए और वहां उन्होंने कपड़े बदले. इसके पश्चात् वे ओडिशा के पुरी गए और वहां भोजन किया और आखिर में तमिलनाडु के रामेश्वरम में विश्राम किया. इन चार धामों में पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर का अपना एक विशेष महत्व है. 


पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर 

यहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने बड़े भाई बलदेव और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं. इस मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में गंग वंश के राजा ने करवाया था. इस मंदिर में भगवान की मूर्तियाँ काठ (लकड़ी) की निर्मित हैं. जिन्हें हर 12 वर्ष में परिवर्तित किया जाता है. हर हिन्दू अपनी लाइफ में एक बार इन चार धामों में से एक जगन्नाथ पूरी जाना ही चाहता है. इस मंदिर की कई ऐसी अनोखी घटनाएँ हैं जिनको जान कर आपको आश्चर्य होगा. उनमें से एक है इस मंदिर का विशालकाय शिखर, इस शिखर पर लगाये जाने वाले ध्वज को प्रतिदिन बदला जाता है और ऐसी मान्यता है कि यदि किसी दिन ऐसा न किया गया तो ये मंदिर अगले 18 वर्षों के लिए बंद हो जायेगा.  

भगवान की मूर्ति परिवर्तित करने का रहस्य -

ऐसी भी मान्यता है कि जब भगवान अपना शरीर त्यागा तब पूरा शरीर पंच तत्व में विलीन हो गया लेकिन उनका ह्रदय किसी जिन्दा इंसान की तरह ही धडकता रहा और वह आज भी सुरक्षित भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के अन्दर है. यहाँ हर 12 वर्ष में भगवान जगन्नाथ जी, सुभद्रा और बलदाऊ की मूर्तियां बदली जाती हैं और उस समय पूरे शहर में अँधेरा कर दिया जाता है. और मंदिर के बाहर सीआरपीएफ की तैनाती कर दी जाती है. इस दौरान मंदिर में सभी की एंट्री बैन होती है और केवल उन पुजारियों को जानें की अनुमति होती है जिन्हें मूर्तियाँ बदलनी होती है. जिस पुजारी को ये मूर्तियाँ बदलनी होती हैं उनकी आँखों पर पट्टी बांध दी जाती है और उन्हें अपने हाथों में ग्लव्स पहन कर ये मूर्तियाँ बदलनी होती हैं. मूर्ति के बदलने के दौरान ब्रह्म पदार्थ को पुरानी मूर्ति से नई मूर्ति में डाल दिया जाता है. और इसी ब्रह्म पदार्थ को भगवान का ह्रदय माना गया है. और मूर्ति बदलने वाले पुजारी के अनुसार, जब वो ब्रह्म पदार्थ को अपने हाथ में लेता है तो उसे ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई खरगोश उसके हाथ पर उछल रहा हो दस्ताने पहने होने के कारण इस वस्तु का पूरी तरह से अनुमान नहीं लगाया जा सकता है.     

सिंह द्वार का रहस्य -
भगवान जगन्नाथ का मंदिर समुद्र के किनारे पर स्थित है और इसके चार दरवाजे हैं जिनमें से एक है सिंह द्वार. कहा जाता है जब तक सिंह द्वार के अंदर कदम नहीं रखा जाता है तब समुद्र की साफ आवाज सुनाई देती है लेकिन इसके अंदर कदम रखते ही समुद्र की आवाज सुनाई देना बंद हो जाती है और पुन बाहर कदम रखते ही आवाज स्पष्ट सुनाई देने लगती है. इसका वैज्ञानिक कारण क्या है ये कोई नहीं जानता. एक और मान्यता है कि सिंह द्वार के बाहर आस-पास जल रही चिताओं की गंध आती है लेकिन जैसे ही मंदिर के अंदर कदम रखे जाते हैं ये गन्ध आना बंद हो जाती है. ये भी अभी तक एक रहस्य बना हुआ है.

मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ते हैं पक्षी :
इस मंदिर के ऊपर से एक भी पक्षी नहीं उड़ता है. आमतौर पर अन्य मंदिर और धार्मिक स्थलों के ऊपर से आपने सामान्यत पक्षियों को उड़ते देखा होगा लेकिन इसके ऊपर से पक्षी नहीं गुजरते हैं लेकिन इसका क्या कारण है ये भी अपने में एक रहस्य बना हुआ है. और इसी कारण मंदिर के ऊपर से अब किसी हवाई जहाज और हेलिकॉप्टर को उड़ने की इजाजत नहीं दी गई है.

मंदिर के झंडे का रहस्य 
ये मंदिर करीब 4 लाख वर्ग फीट एरिया में बना है. और इसकी ऊंचाई करीब 214 फीट है. सामान्यत आपने देखा होगा कि किसी बिल्डिंग या इमारत की परछाई जमीन पर पडती ही है लेकिन क्या आप जानते हैं मंदिर के इतना ऊँचा होने के बावजूद भी इसकी परछाई कभी जमीन पर नहीं पड़ती है. और इसका झन्डा प्रतिदिन बदला जाता है ऐसी मान्यता है कि यदि किसी दिन ऐसा न किया गया तो मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जायेगा. यहाँ का झंडा हमेशा हवा के विपरीत ही लहराता है. मंदिर के शिखर पर स्थित सुदर्शन चक्र को आप किसी भी तरफ से देखें तो उसका सामना आपको अपने ही तरफ लगेगा.  

पुरी की रसोईं का रहस्य 
जगन्नाथ मंदिर की रसोईं विश्व की सबसे बड़ी रसोईं है और यहाँ 500 रसोइये और 300 उनके सहयोगी हैं जो प्रतिदिन भगवान का भोग बनाते हैं. यहाँ प्रतिदिन चाहे जितने भक्त भोजन खालें लेकिन कभी भोजन कम नहीं पड़ता है लेकिन जैसे ही मंदिर का बंद होने का समय आता है प्रसाद अपने आप खत्म हो जाता है.