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दिल्ली-मुंबई 8 लेन एक्सप्रेसवे : अब दिल्ली से मुंबई का सफ़र 24 घंटों की जगह महज़ 12 घंटों में पूरा

भारत सरकार की इस दूरदर्शी परियोजना के तहत दिल्ली से मुंबई तक का सफ़र अब 24 की जगह केवल 12 घंटों में पूरा किया जा सकेगा. साथ ही अन्य राज्यों से भी कनेक्टिविटी में विशेष सुधार देखा जा सकेगा. यहाँ पढ़ें पूरी जानकारी. 

Now the journey between delhi to mumbai will be completed in just 12 hours instead of 24 hours.
Now the journey between delhi to mumbai will be completed in just 12 hours instead of 24 hours.

भारत सरकार की यह दूरदर्शी परियोजना देश के दो बड़े वित्तीय केंद्रों दिल्ली व मुंबई को जोड़ने की उम्मीद के साथ शुरू की गयी है।  इस परियोजना की ख़ास बात यह भी है की यह केवल भारत का ही सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे नहीं होगा बल्कि यह पूरे विश्व में सबसे बड़ा आठ लेन वाला एक्सप्रेसवे होगा जिसे शायद यात्रा की सुविधा के अनुसार 12 लेन तक भी बढ़ाया जा सकता है।  

 क्या है दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे 

दिल्ली - मुंबई एक्सप्रेसवे एक भारतीय राजमार्ग है जिसके द्वारा भारत के 2 बहुत महत्वपूर्ण वित्तीय केंद्र दिल्ली और मुंबई को जोड़ा जाएगा।  इस राजमार्ग के तैयार हो जाने से इन दोनों शहरों के बीच में जो वर्तमान में रोड से 24 घंटों का सफर है उसका समय आधा होकर मात्र 12 घंटे ही रह जाएगा। इस प्रोजेक्ट की आधारशीला 9 मार्च २०१९ को रखी गयी थी जिसे पूरा होने में मार्च 2013 तक का समय लग जाएगा. 

किन राज्यों से होकर गुज़रेगा यह एक्सप्रेसवे 

1350 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे देश के पांच राज्यों से होकर गुज़रेगा . इन पांच राज्यों में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए 15,000 हेक्टेयर की भूमि का इस्तेमाल किया गया है. यह पांच राज्य हरियाणा , राजस्थान , गुजरात, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र हैं. 

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की लागत 

यह परियोजना भारत सरकार की एक दूरदर्शी परियोजना है जो की वाणिज्य में विशेष भूमिका अदा करेगी.  इससे देश के दो आर्थिक केन्द्रों में आना-जाना बेहद कम समय में किया जा सकता है. इस परियोजना का बजट लगभग 1 लाख करोड़ है जिसमें भूमि कब्ज़े पर आई लागत भी जोड़ी गयी है. इस परियोजना को भारतमाला परियोजना चरण 1 योजना के अनुसार क्रियान्वित जा रहा है. 

इन राज्यों के साथ बेहतर होगी कनेक्टिविटी 

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे दिल्ली और मुंबई के बीच की कनेक्टिविटी को तो बेहतर करेगा ही लेकिन यह एक्सप्रेसवे जिन अन्य राज्यों से होकर गुज़रेगा वहां भी कनेक्टिविटी में काफी सुधार देखने को मिलेगा. 

यह एक्स्प्रेसवे राजस्थान के रंथभौर, हरियाणा के गुरुग्राम व मेवात , मध्यप्रदेश में रतलाम , गुजरात में वडोदरा और सूरत जैसे शहरों से गुजरेगा जो की देश में आर्थिक रूप से विशेष महत्त्व रखते हैं. एक्सप्रेसवे का इन शहरों से कनेक्टिविटी बढ़ाना व्यापार लागत को कम करेगा और साथ ही ट्रांसपोर्ट में आने वाला समय भी काफी सीमा तक कम हो जाएगा.  

एक्सप्रेसवे की विशेषताएं 

यह हाईवे एक एक्सेस कण्ट्रोल हाईवे है जिसमें बीच में से कोई भी दूसरी तरफ नही जा सकता. यह अंदेशा जताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद से फ्यूल की खपत में ३२ करोड़ लीटर की कमी दर्ज की जाएगी. साथ ही CO2 में भी 85 करोड़ मिलीग्राम की ऐतिहासिक कमी दर्ज की जाएगी जिसका मतलब लगभग 4 करोड़ पेड़ लगाने के जितना है जिससे पर्यावरण को काफी फायदा पहुंचेगा . इसके अलाव इस परियोजना में 40 लाख पेड़ लगाने की भी योजना बनाई गयी है . 

वन्य जीवों के लिए विशेष पहल 

इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में वन्यजीवों का भी ख़ास ख्याल रखा जा रहा है. यह एशिया का ऐसा पहला एक्सप्रेसवे है जिसके निर्माण में वन्यजीवों के लिए ग्रीन ओवरपास की विशेष सुविधा दी जाएगी. इसमें आठ लेन की दो सुरंगों का निर्माण किया जाएगा जिनमें से एक राजस्थान के मुकुंदरा सेंचुरी के नीचे से बनाई जा रही है व  दूसरी महाराष्ट्र के इको सेंसिटिव ज़ोन में बनाई जाएगी. वन्यजीव संरक्षण के लिए साढें तीन किलोमीटर के अंतराल में 5 ग्रीन ओवरपास बनाये जा रहे हैं जिन्हें रणथम्भौर नेशनल पार्क , बूंदी रामगण टाइगर रिज़र्व और मुकंदरा टाइगर रिज़र्व के बीच कॉरिडोर पर  बनाया जा रहा है .वन्यजीवों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो इसके लिए साइलेंट कोरिडोर भी लाया जा रहा है जिनमें वन्यजीव आसानी से आ जा सकते हैं.