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India’s Slowest Train: कहां चलती है सबसे धीमी ट्रेन, कितनी है रफ्तार और क्या है किराया?

भारत की सबसे धीमी ट्रेन में यात्रा कर आपको रास्ते से प्यार हो जाएगा। ट्रेन से यात्रा के दौरान आपको सुंदर-सुंदर दृश्य देखने को मिलेंगे,जो इस यात्रा को और भी यादगार बना देते हैं, तो आइए जानते हैं सबसे धीमी रफ्तार वाली ट्रेन के बारे में

जानें कहां से कहां तक चलती है भारत की सबसे धीमी ट्रेन
जानें कहां से कहां तक चलती है भारत की सबसे धीमी ट्रेन

आपने भारत की सबसे तेज रफ्तार वाली ट्रेनें भोपाल-शताब्दी और वंदे भारत एक्सप्रेस के बारे में सुना होगा, जो अपनी तेज रफ्तार की वजह से मुसाफिरों का कम समय लेते हुए उन्हें उनकी मंजिलों तक पहुंचा देती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसी भी ट्रेन है, जिसकी रफ्तार पूरे देश में सबसे कम है। इस ट्रेन का नाम है मेट्टूपालयम ऊटी नीलिगिरी पैसेंजर ट्रेन। इस ट्रेन की रफ्तार 10 किलोमीटर प्रतिघंटा है, जो कि पांच घंटे में 46 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इसकी प्रमुख वजह है इसका पहाड़ी इलाकों में चलना। अपनी इतनी रफ्तार के कारण यह सबसे तेज चलने वाली ट्रेनों से करीब 16 गुना धीमी बताई जाती है। 

326 मीटर से 2203 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचती है ट्रेन

पहाड़ो में सफर के दौरान यह ट्रेन 326 मीटर की ऊंचाई से 2203 मीटर तक की ऊंचाई तक का सफर तयर करती है। नीलगिरी पर्वतीय रेलवे के तहत चलने वाली यह ट्रेन 46 किलोमीटर की दूरी के दौरान विभिन्न सुंदर प्राकृतिक स्थलों से होते हुए गुजरती है, जो इसमें बैठने वाले पर्यटकों को आनंदित करते हैं। नीलगिरी पर्वतीय रेलवे का निर्मााण का प्रस्ताव सबसे पहले 1854 में लाया गया था, हालांकि पहाड़ों के कठिन रास्तों को देखते हुए उस समय इस प्रस्ताव पर काम नहीं हो सका। इसके बाद साल 1891 में इस प्रस्ताव पर काम शुरू हुआ और इसे पूरे होने में 17 साल लगे। 

ट्रेन में बैठने के लिए है फर्स्ट व सेकेंड क्लास सुविधा

ट्रेन में बैठकर सफर करने के लिए फर्स्ट व सैकेंड क्लास कोच की सुविधा है। फर्स्ट क्लास में सेकेंड क्लास के मुकाबले सीटों की संख्या कम है। वहीं, कुछ साल पहले ही इसमें एक बोगी को और जोड़ा गया है। यदि स्टेशनों की बात करें तो यह मुख्य स्टेशनों में वेलिंगटन, कुन्नूर, केटी, लवडेल और अरवंकाडु स्टेशनों से होकर गुजरती है। 

रास्ते में कितने पड़ते हैं पुल और सुरंग 

ट्रेन 46 किलोमीटर की यात्रा के दौरान 100 से अधिक पुल और कई छोटी-बड़ी सुरंग से होकर गुजरती है। इस दौरान ट्रेन चाय के बागान, बड़े नालों, गहरी खाइयों, पथरीले इलाकों, घने जंगलों और पहाड़ियों से होकर गुजरती है। सबसे अधिक सुंदर रास्ता मेट्टूपालयम से कुन्नूर के बीच का है। इस रास्ते की सुदंरता यात्रियों को अधिक आकर्षित करती है। खूबसूरत सफर व इसकी अन्य खूबियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र UNESCO ने 2005 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया है। सड़ी गर्मी से बचने के लिए अक्सर लोग इस रूट का सफर करते हैं। आपको यहां यह भी बता दें कि 19वीं सदी में जब इस रेलवे का निर्माण किया गया, तब ब्रिटिश शासन में चेन्नई सरकार का ग्रीष्मकालीन मुख्यालय ऊटी हुआ करता था। 

किस दिन चलती है ट्रेन और कैसे होगी टिकट

यह ट्रेन मेट्टुपालयम से ऊटी स्टेशन के बीच हर दिन संचालित की जाती है। यह मेट्टुपालयम स्टेशन से सुबह 7ः10 बजे निकलती है और दिन में 12 बजे तक ऊटी पहुंच जाती है। वहीं, ऊटी से यह दोपहर दो बजे निकलकर शाम 5ः30 बजे तक मेट्टूपालयम स्टेशन पर सफर समाप्त करती है। ट्रेन में आरक्षण कराने के लिए यात्रियों को आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर जाना होगा। फर्स्ट क्लास के टिकट के लिए आपको 545 और सेकेंड क्लास की टिकट के लिए करीब 270 रुपये का भुगतान करना होगा।