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ब्रिटिश राज में इस तरीके से हुआ करती थी सिविल सेवा की परीक्षा

ब्रिटिश राज के दौरान भी सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन करवाया था और जिसके लिए परीक्षा हुआ करती थी लेकिन उसका प्रारूप कुछ अलग था. यहाँ पढ़ें पूरी जानकारी. 

know how civil services exam was conducted during british rule
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वर्तमान में संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा सिविल सेवा की परीक्षा का आयोजन करवाया जाता है. यह एक उच्च स्तरीय परीक्षा है जिसे ऑल इंडिया लेवल पर आयोजित करवाया जाता है. आम तौर पर सिविल सेवा परीक्षा को UPSC परीक्षा ही कहा जाता है. इस परीक्षा को क्वालीफाई करने के बाद उम्मीदवार IAS,IPS,IRS व IFS के पद पर कार्यभार संभालते हैं. यह पद उम्मीदवारों को उनकी रैंक के अनुसार दिए जाते हैं. 

लगभग 200 वर्षो तक भारत अंग्रेजों का गुलाम रहा जिस दौरान भारत पूर्ण रूप से अंग्रेजों की शर्त पर ही जीता था. ब्रिटिश राज के दौरान भी IAS की परीक्षा आयोजित करवाई जाती थी हालाँकि उस समय का प्रारूप आज से काफी अलग था. 

ब्रिटिश राज के दौरान सिविल सेवा परीक्षा 

ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए सिविल सेवकों का चयन कंपनी के निर्देशकों के द्वारा किया जाता था. उम्मीदवारों का चयन कर उन्हें विशेष ट्रेनिंग के लिए लंदन के हेलीबरी कॉलेज भेजा जाता था और वहां से ट्रेनिंग पूरी हो जाने के बाद उन्हें भारत वापिस भेज दिया जाता था. 

भारत में मेरिट के आधार पर सिविल सेवा परीक्षा की अवधारणा को 1854 में लॉर्ड मैकाले की रिपोर्ट के द्वारा लाया गया था यह रिपोर्ट ब्रिटिश संसद की एक प्रवर समिति ने बनाई थी. 

लंदन में होती थी परीक्षा आयोजित 

1854  में प्रस्तुत की गयी लॉर्ड मैकाले की रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रतियोगी परीक्षा के लिए मेरिट के आधार पर सिविल सेवा परीक्षा का सिस्टम लागू होना चाहिए. रिपोर्ट में दी गयी प्रस्तावना के चलते 1854 में लंदन में सिविल सेवा आयोग की स्थापना की गयी और ठीक एक साल के बाद वर्ष 1855 में पहली बार परीक्षा का आयोजन करवाया गया. 

गौरतलब है की शुरुआत में इस परीक्षा का आयोजन केवल लंदन में ही किया जाता था. 

परीक्षा का सिलेबस 

अंग्रेजों के द्वारा इस परीक्षा के सिलेबस को इस तरह से तैयार किया गया था जिससे की भारतीयों को यह परीक्षा देने में काफी कठिनाई होती थी. इस परीक्षा में ज़्यादातर नंबर यूरोपीयन क्लासिकी के हुआ करते थे जिस कारण भारतीयों को यह परीक्षा मुश्किल लगती थी. 

भारत में परीक्षा कराने की उठाई मांग 

भारतीय लोगों के द्वारा लगातार यह मांग उठायी जाती थी की सिविल सेवा परीक्षा को लंदन में नहीं बल्कि भारत में आयोजित करवाना चाहिए लेकिन उनकी इस मांग पर शुरुआत में अधिक गौर नहीं किया गया. 

आखिरकार 50 वर्षों तक संघर्ष करने के बाद 1922 में जाकर इस परीक्षा को भारत में आयोजित करवाया गया. गौरतलब है की सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले पहले भारतीय श्री सत्येन्द्रनाथ टैगोर थे. 

ब्रिटिश राज के दौरान योग्यता 

ब्रिटिश राज के दौरान इस परीक्षा को देने के लिए उम्मीदवारों में निम्नलिखित योग्यता होना अनिवार्य था. 

  • उम्मीदवार कम से कम बीते 7 वर्षों से भारत में रहने वाला भारतीय या यूरोपीय होना चाहिए. 
  • जहाँ उम्मीदवार को काम करना है उस जिले की भाषा आना अनिवार्य था . 
  • डिपार्टमेंटल टेस्ट के अलावा अन्य टेस्ट भी क्वालीफाई करना अनिवार्य था.
  • उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 और अधिकतम आयु 23 वर्ष होनी चाहिए  . 
  • घुड़सवारी की परीक्षा पास करना अनिवार्य होता था.