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जानें इस साल के अंत तक Remittances मामले में कितने देशों को पीछे छोड़ देगा भारत, विश्व बैंक की रिपोर्ट

हाल ही में माइग्रेशन और डेवलपमेंट पर विश्व बैंक ने रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुमान है कि इस साल के अंत तक विदेशों में रह रहे भारतीय अपने देश में करीब 100 अरब डॉलर यानि आठ लाख करोड़ रुपये भेज चुके होंगे। 

जानें इस साल के अंत तक Remittances मामले में कितने देशों को पीछे छोड़ देगा भारत, विश्व बैंक की रिपोर्ट
जानें इस साल के अंत तक Remittances मामले में कितने देशों को पीछे छोड़ देगा भारत, विश्व बैंक की रिपोर्ट

कॉलेज और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी कर छात्रों का सपना होता है कि वह विदेश में जाकर अधिक पैकेज पर एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के लिए काम करें। इसके लिए कई छात्र मेहनत भी करते हैं और हम हर साल कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान कई ऐसे खबरें सुनते और पढ़ते हैं कि फलां छात्र को फलां कंपनी में अच्छे पैकेज पर प्लेसमेंट मिल गया। छात्र विदेशों में नौकरी करते हुए अपनी कमाई के कुछ हिस्से को भारत में स्थित अपने घरों में भी भेजते हैं। इससे  Remittance(प्रेषण) फ्लो बढ़ता है। 



विश्व बैंक ने हाल ही में कहा है कि पहली बार कोई देश Remittances के तौर पर 100 अरब डॉलर की राशि पाने जा रहा है। इससे पहले किसी भी देश को इतनी बड़ी संख्या में राशि प्राप्त नहीं हुई है। तो आइये जानते हैं कि क्या होता है Remittances और इसके प्राप्त होने पर किसी देश पर कितना पड़ता है प्रभाव। साथ ही बड़ी मात्रा में इस राशि के पहुंचने पर भारत किन देशों को पीछे छोड़ देगा। 

 

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड के साथ-साथ अन्य विपरित वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद यह राशि बहुत बड़ी राशि है। इतनी राशि प्राप्त होने पर भारत रेमिटेंस फ्लो के मामले में चीन, मेक्सिको और फिलीपींस को पीछे छोड़ेते हुए आगे निकल जाएगा। क्योंकि, इन देशों में भी इतनी बड़ी संख्या में रेमिटेंस फ्लो नहीं है। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विदेश में कितने भारतीय नौकरी कर रहे हैं।  

 

रेमिटेंस फ्लो के मामले में लेटिन अमेरिका और केरिबियन रीजन में 9.3 % की वृद्धि, दक्षिण एशिया में 3.5 %, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में 2.5 % और पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 0.7 % की वृद्धि का अनुमान है। वहीं, विश्व बैंक की प्रवासन और विकास रिपोर्ट में कहा गया है कि रेमिटेंस आंकड़ों को लेकर भारत में रेमिटेंस फ्लो में 12 % की वृद्धि दर्ज की जाएगी। ऐसा होने पर भारत रेमिटेंस फ्लो परसेंटेज के मामले में मिक्सिको, फिलीपिंस और चीन से आगे निकल जाएगा। वहीं, भारत के अलावा दक्षिण एशिया में रेमिटेंस अनुमानित 3.5 % से बढ़कर 163 बिलियन डॉलर हो गया है। 

 

आखिर क्यों बढ़ रहा है रेमिटेंस फ्लो

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और सिंगुपार आदि देशों में रह रहे भारतीय लोग कमाई कर अपनी कमाई का कुछ हिस्सा भारत भेज रहे हैं। अमेरिका और अन्य सहयोग और आर्थिक विकास संगठन(OECD) देशों में हुई वेतन वृद्धि और मजबूत हुए श्रम बाजार से भारत को फायदा मिला। भारतीयों की कमाई बढ़ने से देश में आने वाले रुपये के फ्लो में भी इजाफा हुआ है। 

 

रिपोर्ट के मुताबिक, गल्फ कोअपरेशन काउंसिल के गंतव्य देशों में इस साल की दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र में 200 अमेरिकी डॉलर भेजन की लागत औसत 4.1 % हुआ करती थी, जो कि इससे एक साल पहले के 4.3 % से कम है।



साल  2022 में विकासशील क्षेत्रों में रेमिटेंस फ्लो को कई कारकों के साथ बढ़ाया गया, कोविड महामारी के बाद अर्थव्यवस्था के फिर से खुलने से विदेशों में रह रहे प्रवासीय भारतीयों को फिर से रोजगार के अवसर मिलना शुरू हो गए। आपको बता दें कि भारत के सकल घरेलु उत्पाद(GDP) का लगभग 03 % के लिए रेमिटेंस  महत्वपूर्ण माना जाता है। यह माना जा रहा है कि संयुक्त अरब अमीरात(UAE) और सऊदी अरब सहित पांच खाड़ी देशों की हिस्सेदारी विश्व बैंक की समान अवधि में 54 % से घटकर 28 % हो गई, इस वजह से भी भारत में रेमिटेंस फ्लो बढ़ा है। 

 

क्या होता है रेमिटेंस

अब आपक बताते हैं कि रेमिटेंस क्या होता है और यह कितना महत्वपूर्ण है। दरअसल, रेमिटेंस विेदेश में काम कर रहे किसी देश के नागरिक द्वारा अपने देश में घरेलू आय के लिए भेजा गया रुपये का एक गैर वाणिज्यिक हस्तांतरण(Commercial Transfer) होता है। 

 

प्रवासी द्वारा भेजे गए रुपये उस देश की GDP में भी बढ़ोतरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। GDP किसी भी विकासशील देश के लिए बहुत अहम कारक माना जाता है। 

 

आपको बता दें कि भारतीयों से विदेश से आने वाली कमाई ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(FDI) को भी पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2021-2022 में जितनी रकम FDI से आई थी, यह राशि उससे करीब 17%  अधिक है। साल 2021-2022 में  FDI से 83.57 अरब डॉलर की राशि प्राप्त हुई थी। आपको यहां यह भी बता दें कि बीते 14 सालों से भारत रेमिटेंस को लेकर पहले पायदान पर बरकरार है। बीते इन सालों में भारत को मिलने वाली रेमिटेंस राशि में भी इजाफा हुआ है।