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NavIC होगा भारत की आत्मनिर्भरता की ओर अहम कदम, जानें कैसे

भारत में नेविगेशन सपोर्ट के लिए विदेशी नेविगेशन सिस्टम्स का ही प्रयोग किया जाता रहा है लेकिन अब भारत के पास अपना स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम है जिससे की भारत नेविगेशन के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा . यहाँ पढें पूरी जानकारी . 

know how navic will be an important step towards india aatmnirbhrta
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ऐपल , सैमसंग व शाओमी सहित अन्य मोबाइल फ़ोन निर्माता कम्पनियों के सामने यह प्रस्ताव रख दिया गया है कि वर्ष 2023 से लॉन्च किये जाने वाले सभी स्मार्टफोन्स में नेविगेशन के लिए नाविक (NavIC) का इस्तेमाल किया जाएगा इसलिए सभी स्मार्टफोन्स को नाविक( NavIC) नेविगेशन सपोर्ट के साथ बनाया जाए . हालांकि इस खबर से मोबाइल निर्माता कंपनियों में थोडा हड़कंप तो मचा हुआ है लेकिन फिर भी इस क़दम को आत्मनिर्भरता की तरह देखा जा रहा है . 

क्या है नाविक (NavIC)

नाविक (NavIC) एक स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली है जिसका अर्थ है नेविशगेशन विद इंडियन कॉन्सटिलेशन ( Navigation with indian constellation) . यह ऐप उसी तरह काम करेगी जैसे की GPS सिस्टम करता है . इसका अविष्कार भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (ISRO) के साथ मिलकर इंडियन रीज़नल नेविगेशन सिस्टम ( Indian Regional Navigation Satellite System) ने किया है . यह एक स्वतंत्र स्टैंड अलोन नेविगेशन सिस्टम है .

कब हुई नाविक की शुरुआत 

नाविक (NavIC) के निर्माण की शुरुआत 2006 में 17 करोड़ डॉलर से अधिक बजट के साथ की हुई . इस प्रोजेक्ट को 2011 तक पूरा हो जाना था लेकिन किन्हीं कारणवश यह प्रोजेक्ट 2018 में पूरा हुआ . हालांकि 2018 तक इस प्रोजेक्ट में सफलता मिल जाने के बाद भी यह अब तक  व्यापक रूप से प्रयोग में नही है क्योंकि केवल इस सिस्टम को बनाना ही काफी नही है . इसके पूर्ण रूप से संचालन के लिए मोबाइल फ़ोन्स के हार्डवेयर में भी बदलाव के साथ कुछ अन्य बदलावों की ज़रूरत होगी . 

कैसे अलग है अन्य नेविगेशन सिस्टम से 

नाविक (NavIC) को अन्य नेविगेशन सिस्टम्स से अलग बनाने में सबसे बड़ा हाथ उसके द्वारा कवर किये जाने वाला एरिया का है. नाविक के द्वारा 1500 किलोमीटर तक का एरिया कवर किया जा सकता है . वर्तमान में नाविक( NavIC )केवल भारत और इसके आस-पास के क्षेत्र को ही कवर करता है. नाविक के सैटेलाइट दोहरी फ्रीक्वेंसी के बैंड प्रदान करते है जिसके चलते नाविक (NavIC) अन्य नेविगेशन की तुलना में अधिक सटीक जानकारी देता है . हालांकि फिलहाल तो नाविक भारत और इसके आसपास के क्षेत्र में ही अपनी सेवाओं का विस्तार करता है लेकिन भारत की 2021 उपग्रह नेविगेशन मसौदा नीति में इस बात का उल्लेख किया गया है कि सरकार  नाविक (NavIC) सिग्नल की उपलब्धता को बढाने के लिए ' रीज़नल से ग्लोबल तक कवरेज का विस्तार' करने की दिशा में गंभीरता से काम करेगी।

वर्तमान में कहाँ काम कर रहा है नाविक (NavIC)

गौरतलब है की भले ही 2018 में नाविक (NavIC) तैयार हो गया था लेकिन फिर भी अब तक नाविक का व्यापक रूप से प्रयोग नही किया जा रहा है . वर्तमान में बहुत कम दायरे में नाविक का प्रयोग किया जा रहा है . वर्तमान में नाविक( NavIC ) का प्रयोग सार्वजनिक वाहनों की ट्रैकिंग व गहरे पानी में गये मछुआरे को आपातकालीन अलर्ट देने जैसी जगहों पर किया जा रहा है . यह फिलहाल अभी ऐसी जगहों पर ही काम कर रहा है जहाँ टेरेरेस्टियल नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं है।इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित जानकारी को ट्रैक करने और प्रदान करने के लिए भी नाविक (NavIC) का प्रयोग किया जा रहा है . 

कैसे बनेगा भारत नाविक (NavIC)से आत्मनिर्भर 

वर्तमान में नेविगेशन सिस्टम के लिए भारत को US के GPS पर  निर्भर रहना पड़ता है लेकिन नाविक (NavIC) से भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम होगा जिसके ज़रिये संचालन और अधिक आसान होगा . साथ ही विदेशी नेविगेशन सिस्टम्स का संचालन सम्बंधित देशों के रक्षा एजेंसियों के द्वारा किया जाता है ऐसे में भारतीय नागरिकों की सेवाओं को नीचा या अस्वीकार भी किया जा सकता है और साथ ही रणनीतिक तौर पर भी विदेशी नेविगेशन पर निर्भर रहना ठीक नही माना जाता . इसके अलावा नाविक (NavIC) मेक इन इंडिया के कांसेप्ट को भी अधिक मज़बूती प्रदान करता है  नाविक (NavIC)को लेकर यह कहा जा रहा है की इस स्वदेशी रूप से विकसित प्रणाली के उपयोग से देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।