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Hockey Stadium: पढ़ें क्यों खास है ओड़िसा में 261 करोड़ रुपये से बना भारत का सबसे बड़ा हॉकी स्टेडियम

Hockey Stadium: ओड़िसा जनवरी, 2023 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने के लिए तैयार है। इसके लिए भुवनेश्वर और राउरकेला में मैच का आयोजन किया जाएगा। ओड़िसा ने खिलाड़ियों व दर्शकों को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से भारत का सबसे बड़ा हॉकी स्टेडियम तैयार किया है। आइये जानते हैं क्या है स्टेडियम की खासियत। 

Hockey Stadium: पढ़ें क्यों खास है ओड़िसा में 261 करोड़ रुपये से बना भारत का सबसे बड़ा हॉकी स्टेडियम
Hockey Stadium: पढ़ें क्यों खास है ओड़िसा में 261 करोड़ रुपये से बना भारत का सबसे बड़ा हॉकी स्टेडियम

Hockey Stadium:  जनवरी 2023 में भारत हॉकी विश्व कप की मेजबानी कर रहा है। इसके लिए ओड़िसा राज्य विशेष रूप से अपनी भूमिका निभा रहा है। राज्य में एक नहीं बल्कि दो शहरों को मैच की मेजबानी के लिए चुना गया है, जो कि भुवनेश्वर और राउरकेला है। इतने बड़े मैच को देखते हुए हॉकी के लिए तैयार किए गए स्टेडियम को भी विशेष रूप से तैयार किया गया है, जिससे यहां आने वाले दर्शकों व खिलाड़ियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। यह स्टेडियम भारत में सबसे बड़ा हॉकी स्टेडियम है, तो आइये जानते हैं स्टेडियम की खासियत। 

 

13 जनवरी से 29 जनवरी तक चलेगा आयोजन

पुरुषों का हॉकी विश्व कप का आयोजन 13 जनवरी से शुरू होकर 29 जनवरी, 2023 तक चलेगा। भुवनेश्वर ने पूर्व में प्रमुख हॉकी आयोजनों की मेजबानी की है, जबकि इस्पात शहर के नाम से मशहूर राउरकेला पहली बार इस तरह के अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजन की मेजबानी करेगा। राउरकेला में इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए ओड़िशा सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने महान आदिवासी क्रांतिकारी बिरसा मुंडा के नाम पर भारत का सबसे बड़ा हॉकी स्टेडियम बनाया है। इस स्टेडियम में 21,000 लोगों के बैठने की क्षमता है। अत्याधुनिक स्टेडियम में हॉकी के कुल 20 मैच खेले जाएंगे।

 

स्टेडियम को बनाने की अनुमानित लागत 261 करोड़ रुपये

इस बात का कोई आधिकारिक आंकड़ा तो नहीं है कि स्टेडियम के निर्माण की लागत कितनी है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस परियोजना पर अनुमानित रूप से 261 करोड़ रुपये का खर्च है। 




3600 टन स्ट्रक्चरल स्टील और 4,000 टन टीएमटी स्टील से किया गया है तैयार

स्टेडियम के निर्माण के लिए 3,600 टन स्ट्रक्चरल स्टील और 4,000 टन टीएमटी स्टील का इस्तेमाल किया गया है। हर सीट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दर्शकों को बिना किसी रुकावट के मैच देखने को मिल सके। इस स्टेडियम को विकसित करने के लिए बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के कुल 1200 प्रवासी श्रमिकों ने 24 घंटे काम किया है।

 

खिलाड़ियों को लंबी दूरी तय करनी की नहीं है आवश्यकता

इस स्टेडियम तक पहुंचने के लिए खिलाड़ियों को लंबी दूरी की यात्रा करने की भी आवश्यकता नहीं होगी। यहां जिम, स्विमिंग पूल, आवास और अभ्यास पिचों सहित सभी सुविधाएं एक-दूसरे के करीब है। नया बना हवाई अड्डा स्टेडियम के नजदीक है।

 

खिलाड़ियों व उनके सहायकों के लिए 225 कमरों का बनाया गया आवास 

 राउरकेला में पांच सितारा होटल नहीं है, इसलिए विभिन्न देशों से आने वाले खिलाड़ियों और सहायक कर्मचारियों के रहने के लिए 225 कमरों के आवास की भी व्यवस्था की गई है। यह आवास टूर्नामेंट के दौरान प्रबंधन के लिए ताज समूह को सौंप दिया गया है। खिलाड़ियों के परिवारों और दोस्तों से राउरकेला में पहले से मौजूद 60 होटलों की सेवाओं का उपयोग करने का अनुरोध किया गया है।

 

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