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National Education Day 2022 : जानें शिक्षा के क्षेत्र में अबुल कलाम आज़ाद का योगदान, क्यों है यह दिन ख़ास

आज़ाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने देश में शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है. उनके जन्म दिवस के उपलक्ष में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस घोषित किया गया है. जानिये इस वर्ष क्या है राष्ट्रीय शिक्षा दिवस की थीम और अन्य जानकारियाँ. 

know the contribution of abul kalam azad in the field of education why this day is special
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मानव जीवन में शिक्षा का विशेष महत्त्व है. शिक्षा के बल पर इंसान अपने पूरे जीवन को बदल सकता है. वर्ष  2008 में मिनिस्ट्री ऑफ़ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट के द्वारा 11 नवंबर को नेशनल एजुकेशन डे के रूप में घोषित किया गया था तब से यह दिन राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में जाना जाता है. आज पूरा देश मिलकर यही नेशनल एजुकेशन डे मना रहा है. 

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस (National Education Day) : 

प्रति वर्ष की तरह आज भी पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जा रहा है. यह शिक्षा दिवस स्वतंत्रा सेनानी और स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की बर्थ एनिवर्सरी के उपलक्ष में मनाया जाता है. मौलना अबुल कलाम आज़ाद के शिक्षा के क्षेत्र में दिए गये योगदान को केंद्र में रखते हुए उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस घोषित किया गया. 

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस का उद्देश्य 

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस का उद्देश्य सभी लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना है. यह दिन विशेष तौर पर लोगों को शिक्षा का उनके जीवन में महत्त्व बताने के लिए समर्पित है इसलिए इस दिन सभी लोगो में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने और लोगों को साक्षर बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. 

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद 

source: wikipedia

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जन्म 11 नवंबर, 1888 को हुआ था. मौलाना आज़ाद न केवल एक बड़े विद्वान थे बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में भी आज़ाद ने विशेष योगदान दिया है. बहुत कम उम्र से ही आज़ाद ने उर्दू भाषा में शायरी लिखना शुरू कर दिया था. शिक्षा क्षेत्र के अलावा कलाम ने पत्रकार के रूप में काम करके भी काफी लोकप्रियता हासिल की. 

शिक्षा के क्षेत्र में मौलाना आज़ाद का योगदान 

शिक्षा के क्षेत्र में मौलाना आज़ाद का अभूतपूर्व योगदान रहा है. मौलाना आज़ाद ने केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष के के रूप में Adult literacy, Universal Primary Education व 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा पर विशेष ज़ोर दिया है. 

इन संस्थानों की स्थापना में दिया योगदान 

मौलाना आज़ाद की शिक्षा को बढ़ाने में विशेष रुचि थी जिसके चलते उन्होंने बहुत से शिक्षण संस्थानों की स्थापना में भी विशेष योगदान दिया. 

मौलाना आज़ाद को वर्ष 1920 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना के लिए कमेटी के फाउंडेशन सदस्य के रूप में चुना गया था और इसके बाद यूनिवर्सिटी को दिल्ली शिफ्ट करने में भी आज़ाद ने खास मदद की. 

इसके अलावा आज़ाद ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग , IIT खड़गपुर व अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद जैसे शिक्षण संस्थानों की स्थापना में ख़ास भूमिका निभाई है. 

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2022 की क्या है थीम 

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का मानना था की स्कूल वह प्रयोगशालाएं है जहाँ भविष्य के नागरिक तैयार किये जाते हैं . किसी प्रणाली का उद्देश्य होता है की वह एक ऐसे दिमाग को विकसित कर सकें जिसे गुमराह न किया जा सके. प्रति वर्ष शिक्षा मंत्रालय एक नयी थीम पर काम करता है इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षा दिवस की थीम “Changing course,Transforming Education” है.