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जानिये एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियों का छात्रों के जीवन पर क्या असर पड़ता है

सभी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. छात्रों के जीवन पर इन गतिविधियों के प्रभाव जानने के लिए कई शोध किये जा चुके हैं. यहाँ पढ़ें पूरी जानकारी. 

know the impact of extracurricular activities on students
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दुनिया भर के स्कूलों और विश्वविद्यालयों में एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियों पर दिन-प्रतिदिन ध्यान बढ़ता जा रहा है. अब लगभग हर स्कूल और विश्वविद्यालय में पढ़ाई के साथ-साथ एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियाँ भी आयोजित करवाई जाती हैं. इन  एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियों का छात्रों के जीवन पर पड़ रहे प्रभावों को जानने के लिए समय-समय पर अध्ययन भी किये जाते हैं जिनके परिणामों के द्वारा नई थ्योरी बनाने में सहायता भी मिलती है. 

छात्रों ने किया शोध 

द ऑहियो स्टेट यूनिवर्सिटी ( The Ohio State University) के कुछ छात्रों के द्वारा एक शोध किया गया है जिसे एप्लाइड डेवलपमेंटल साइकोलॉजी ( Applied Developmental Psychology) के एक जर्नल में पब्लिश किया गया है. इस शोध में छात्रों पर एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियों के प्रभाव को जानने का प्रयास किया गया और साथ ही कम उम्र से ऐसी गतिविधियों में भाग लेने पर छात्र को क्या फायदा पहुँचता है, के ऊपर जानकारी हासिल करने की कोशिश की गयी है.

इस शोध को करने के लिए शोधकर्ताओं ने माता-पिता और प्राइमरी केयर टेकर्स से प्रश्नावली में कुछ प्रश्नों के उत्तर भरवाएं जिनके आधार पर शोध के परिणाम निकाले गये हैं.

शोध के परिणाम 

इस शोध में पाया गया है कि एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियों में सबसे अधिक भागीदारी दर्ज करने वाली एक्टिविटी, एथलेटिक्स में  किंडरगार्टन के श्वेत बच्चे अन्य जातियों के मुकाबले 2.6 गुना अधिक भाग लेते हैं. 

साथ ही इस अध्ययन में यह भी पाया गया है की उच्च शिक्षा प्राप्त औरतों के बच्चे स्पोर्ट्स में कम शिक्षित औरतों के बच्चों के मुकाबले अधिक भागीदारी लेते हैं. अन्य प्रकार की स्कूल गतिविधियों में भी इसी प्रकार के निष्कर्ष निकाले गये हैं. 

एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियों का भाषा विकास में योगदान 

इस रिपोर्ट में ऑहियो यूनिवर्सिटी के एक एसोसिएट प्रोफेसर ने यह बताया है की किंडरगार्टन की उम्र में बच्चों के  भाषा कौशल  का विकास हो रहा होता है लेकिन कुछ वर्षों के बाद इन्हीं बच्चों के भाषा विकास में एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा. 

सुधार की राह 

शोध के द्वारा प्राप्त नतीजों के अनुसार यह बताया गया है की एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियों के भाग लेने वाले गैप को पॉलिसी मेकर्स और अन्य लीडरों के द्वारा कम करने के बारे में सोचा जाना चाहिए. 

साथ ही शोधकर्ताओं का कहना था की बच्चों को कम उम्र से ही एक्स्ट्रा करीकुलर गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर देना चाहिए जिससे की निचले वर्ग के आर्थिक-सामजिक बैकग्राउंड वाले छात्रों को भी वह सुविधाएं प्राप्त हो सकें जो की अन्य छात्रों के पास पहले से ही हैं.