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बिना इजाज़त किसी महिला की तस्वीरें खीचनें और वायरल करने पर किस धारा के तहत क्या होगी सज़ा

क्या किसी महिला को उसकी मर्ज़ी के बगैर निजी कार्य करते हुए देखना , एक दंडनीय अपराध है । जाने पूरी जानकारी कि  किस धारा के तहत क्या मिलेगी सज़ा और क्या होगा ज़मानत का प्रावधान

know the punishment under ipc section for taking pictures of a woman without permission and making it viral
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भारतीय आचार संहिता के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को ऐसी अवस्था में देखता है जिसमें वह कोई निजी कार्य कर रही हो और वह कतई किसी के द्वारा देखा जाना पसंद न करें तो कानूनन वह व्यक्ति सज़ा का हक़दार माना जाऐगा। 

 पंजाब स्थित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में उस वक्त हड़कंप मच गया जब गर्ल्स हॉस्टल की एक लड़की बाथरूम में नहा रही दूसरी लड़कियों की वीडियो बनाती हुई पकड़ी गई । खबरों के मुताबिक यह आरोपी लड़की अन्य लड़कियों का वीडियो बनाकर कुछ लड़कों के साथ शेयर करती थी, साथ ही यह बताया जा रहा है कि आरोपी लड़की लगभग 60 लड़कियों के वीडियो बना चुकी है। इस मामले में जब आरोपी लड़की से पुलिस ने बात की तो पता चला कि वह लड़की कुछ लड़कों के कहने पर यह वीडियो बनाती है साथ ही आरोपी लड़की का यह कहना रहा कि वह लड़के उसका प्राइवेट वीडियो लीक करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल कर रहे थे। आरोपी लड़की चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से MBA की पढ़ाई कर रही है। आरोपी लड़की को फिलहाल मोहाली के पास खरड़ पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया है। भारतीय आचार संहिता (Indian Penal Code) के अनुसार पुलिस ने यह मुकदमा धारा 354C व आईटी एक्ट 66A और 67A के तहत दर्ज किया है। 

क्या है IPC की धारा 354C


Source: lawrato.com

यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की इजाज़त के बगैर उसे किसी प्राइवेट हालत में देखता हो या उसकी तस्वीरें खींचता हो जिसमें उस लड़की की मर्ज़ी शामिल न हो तो वह व्यक्ति अपराधी माना जाएगा। IPC 354C में सज़ा व जुर्माना दोनों का प्रावधान है। 

क्या रहेगी सज़ा ?

यदि कोई व्यक्ति IPC की धारा 354C के तहत पहली बार दोषी पाया गया है तो ऐसी स्थिति में अधिकतम तीन साल तक की सज़ा का प्रावधान है जो कि न्यूनतम एक साल हो सकती है। इसके साथ ही आरोपी पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 

यदि कोई व्यक्ति IPC की धारा 354C के तहत दूसरी बार दोषी पाया गया है तो ऐसी स्थिति में अधिकतम सात साल तक की सज़ा हो सकती है लेकिन इसमें न्यूनतम सज़ा की सीमा तीन साल है, साथ ही जुर्माने का भी प्रावधान है या फिर आरोपी पर जुर्माना व कैद दोनों एक साथ भी लगाए जा सकते हैं। 

क्या मिलेगी ज़मानत ?

यदि कोई व्यक्ति पहली बार दोषी पाया गया है तो उसे ज़मानत याचिका दायर करने पर ज़मानत मिल सकती है लेकिन दूसरी बार यदि कोई व्यक्ति आरोपी पाया जाता है तो उसे ज़मानत मिलने का प्रावधान नही है। 

आईटी एक्ट 66A (IT Act 66A)

Source : blog.ipleaders

किसी कम्यूनिकेशन उपकरण ( communication device) या कम्प्यूटर संसाधन ( computer resource) के द्वारा भेजा गया मैसेज जो कि आपत्तिजनक हो या किसी के मान को इससे हानि पहुँचती हो ,एक दंडनीय अपराध है जो कि आईटी एक्ट 66A के तहत आता है । 

सज़ा व ज़मानत का प्रावधान

आईटी एक्ट 66A में दोषी करार किए जाने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की सज़ा सुनाई जा सकती है इसके साथ ही इस एक्ट के तहत जुर्माने का भी प्रावधान है। यह एक ज़मानत योग्य ( bailable offence) अपराध है, दोषी करार किया गया व्यक्ति ज़मानत की याचिका दायर कर सकता है। 

आईटी एक्ट 67 A (  IT Act 67A)

source: lawbug.com

यदि कोई व्यक्ति कोई भी ऐसी सामग्री प्रकाशित करता है या किसी और को इसके लिए बाध्य करता है जो कि लैंगिक रूप से मुखर ( sexually explicit) हो या जिसका सार्वजनिक होना सामान्य न हो तो ऐसी स्थिति में यह एक दंडनीय अपराध माना जाऐगा जो कि आईटी एक्ट 67 A के तहत आता है।

सज़ा व ज़मानत का प्रावधान 

आईटी एक्ट 67 A के तहत पांच साल तक की सज़ा सुनाई जा सकती है और साथ ही दस साल तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है । यदि इस एक्ट में ज़मानत की बात करें तो यह एक्ट ज़मानत के योग्य नही है ( non bailable offence) आईटी एक्ट 67 A के तहत दोषी पाए जाने पर एक ही सूरत में ज़मानत मिल सकती है अगर केस के दौरान लगाए गए आरोप सही साबित न हो पाएं। 

इस पूरे मामले में फिलहाल तीन आरोपियो को गिरफ्तार कर लिया गया है । हालांकि, पुलिस अब भी मामले की गहराई से जांच कर रही है फिलहाल इन तीनों आरोपियो पर धारा 354C व आईटी एक्ट 66A और 67A के तहत मुकदमा दर्ज करके जांच को आगे बढ़ाया गया है।