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Mount Kailash : जानें माउन्ट कैलाश के अनसुलझे रहस्य, आखिर कोई क्यों नहीं चढ़ पाता है इस पर्वत पर

माउंट कैलाश यानी वो कैलाश पर्वत जिसे हिन्दू ग्रंथों में माना जाता है भगवान शिव का निवास स्थान माना गया है. इस कैलाश पर्वत के कई ऐसे रहस्य हैं जो आज भी अनसुलझे हैं आइये जानें कुछ ऐसे रहस्यों के बारे में 

Mount Kailash
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Mount Kailash: माउन्ट कैलाश हिन्दुओं का एक पवित्र धार्मिक स्थान है इस पर्वत के विषय में कई ऐसे रहस्य हैं जिन्हें अभी तक नासा भी सुलझा नहीं पाया है. इस कैलाश पर्वत का वर्णन शिव पुराण, स्कन्द पुराण और मत्स्य पुराण में कैलाश पर्वत के नाम से एक अलग अध्याय दिया गया है इसके साथ ही कई अन्य ग्रंथों में भी इसे बहुत पवित्र, अद्भुत और रहस्यमयी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि माउन्ट कैलाश भगवान शिव का निवास स्थान है. माउन्ट एवेरस्ट जो कि विश्व का सबसे विशाल पर्वत है, की चढ़ाई कई लोग कर चुके हैं लेकिन आपको जान कर हैरानी होगी कि कैलाश पर्वत की चढ़ाई के बारे में अभी तक कोई रिकॉर्ड नहीं है. जबकि इस पर्वत की ऊंचाई माउन्ट एवेरस्ट से करीब 2000 मीटर कम है. आइये जानें इस पर्वत के कुछ रहस्यों के बारे में 

पृथ्वी का केंद्र माना जाता है-
कैलाश पर्वत को पृथ्वी का केंद्र माना जाता है. पृथ्वी के उत्तरी सिरे पर उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी सिरे पर दक्षिणी ध्रुव स्थित है.   और इन्हीं दोनों सिरों के बीच विश्व का सबसे विशाल पर्वत हिमालय निर्मित है और इसी हिमालय में स्थित है कैलाश पर्वत. दोनों ध्रुवों के मध्य में स्थित होने के कारण इसे पृथ्वी का केंद्र माना जाता है. ये पर्वत न केवल हिन्दुओं का बल्कि बौद्धों, जैनों और सिखों का भी धार्मिक स्थल है. इस केंद्र को एक्सिस मुंडी कहा जाता है. एक्सिस मुंडी का अर्थ आकाशीय ध्रुव या भौगोलिक ध्रुव का केंद्र या नाभि होता है. ये आकाश और पृथ्वी के बीच ऐसा केंद्र होता हैं जहाँ सारी दिशाएँ मिलती हैं. ऐसा माना जाता है कि यहाँ अत्यधिक मात्रा में चुम्बकीय शक्ति है. रूस के वैज्ञानिकों के अनुसार, एक्सिस मुंडी में अलौकिक शक्तियों का प्रवाह होता है.

आखिर कैलाश अपनी बनावट कैसे अन्य पर्वतों से भिन्न है ?
कैलाश पर्वत का आकार किसी पिरामिड के अनुसार है, जो इसकी बनावट को अन्य पर्वतों से अलग करता है. इस पर्वत पर करीब 100 छोटे- छोटे पिरामिड स्थित हैं और ये इन्हीं छोटे छोटे पिरामिडों से मिलकर एक बड़ा पिरामिड बनाता है. ये पर्वत एकांत में स्थित है और इसके आस-पास कोई अन्य बड़ा पर्वत स्थित नहीं है. कैलाश की संरचना कम्पास के 4 दिक् बिन्दुओं के समान है. कहते हैं इस पर्वत की अद्भुत बनावट के कारण ही इस पर्वत पर चढाई करना असंभव है. और दुनियाभर के वैज्ञानिकों के लिए ये अभी भी रिसर्च का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है. इस पर्वत पर रिसर्च करने वाले ह्यूरतलीज का कहना है कि इस पर्वत पर चढाई करना असंभव है. 

यहाँ स्थित हैं 2 रहस्यमयी सरोवर 
कैलाश पर्वत के पास 2 रहस्यमयी सरोवर स्थित हैं. पहला मानसरोवर, जो विश्व की शुद्ध ताजे जल की उच्चतम झील है. और एशिया की प्रमुख नदियों का उद्गम यहीं से हुआ है. इस झील का आकार सूर्य के समान है. ऐसी मान्यता है कि मानसरोवर झील में माता पार्वती स्नान करती हैं. दूसरी महत्वपूर्ण झील है राक्षस ताल जो ऊंचाई पर स्थित खारे पानी की सबसे बड़ी झील है. और इस झील का आकार चाँद के समान है. ऐसी मान्यता है कि ये दोनों झीलें सौर और चन्द्र के बल को प्रदर्शित करती हैं. 

यति मानव का रहस्य
हिमालय के निवासियों का कहना है कि यहाँ यती मानव रहता है. कुछ लोग इसे हिमालयी मानव, हिम मानव और जंगली मानव भी कहते हैं. विश्व के लगभग 30 से ज्यादा वैज्ञानिकों का मानना है कि यहाँ हिम मानव रहते हैं. 

डमरू और ओम की आवाज 
कैलाश मानसरोवर के पास हमेशा एक ध्वनि की आवाज आती है जो किसी जहाज की आवाज जैसी लगती है लेकिन यदि इस आवाज को गौर से सुना जाये तो ये आवाज ओम और डमरू की प्रतीत होती है. कुछ वैज्ञानिक इस आवाज को हिम के पिघलने की मानते हैं जबकि कुछ इस आवाज को प्रकाश और ध्वनि के समागम की ध्वनि मानते हैं लेकिन इन बातों का अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिला है. 

कैलाश के ऊपर लाइट के चमकने का कारण 
कैलाश पर्वत के ऊपर अक्सर 7 प्रकार की लाइट्स जगमगाती हुई देखीं गईं हैं वैज्ञानिक इसका कारण यहाँ बड़ी मात्रा में मौजूद  चुम्बकीय तत्व को मानते हैं. नासा के वैज्ञानिको के अनुसार, यहाँ कई प्रकार का चुम्बकीय बल मिलता है जिसके कारण यहाँ इस प्रकार की लाइट्स निर्मित होती हैं.

कैलाश को चुने के लिए वहां जाने वाले लोगों को सरकार से विशेष अनुमति लेनी पडती है.