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जानिये कौन है प्रो. वेंकी जिन्हें ब्रिटेन ने “ order of merit award” से किया सम्मानित

भारतीय मूल के प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन को ब्रिटेन के द्वारा  “ order of merit award” से सम्मानित किया गया है. जानिये कौन है प्रोफेसर वेंकी और क्या है “ order of merit award”. 

know who is prof venki ramakrishnan who was awarded the order of merit by britain
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भारतीय मूल के प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन को ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने प्रतिष्ठित “ऑर्डर ऑफ़ मेरिट अवार्ड”  से नवाज़ा है. प्रोफेसर रामकृष्णन को यह अवार्ड विज्ञान के क्षेत्र में उनकें योगदान के लिए दिया गया है. 

ब्रिटेन की महारानी ने किया था चयन 

ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिज़ाबेथ ने अपने मृत्यु के उपरान्त सितंबर में छः नियुक्तियां की थी जिनमें भारतीय मूल के प्रोफेसर वेंकी भी शामिल थे . हालांकि महारानी यह सम्मान खुद देने के लिए जीवित नहीं रहीं इसलिए उनके उत्तराधिकारी किंग चार्ल्स तृतीय के द्वारा यह सम्मान दिया गया है.

बकिंघम पैलेस ने जारी किया बयान 

बीते शुक्रवार शाम बकिंघम पैलेस की ओर से एक बयान जारी किया गया है जिसमें कहा गया था कि महामहिम राजा ऑर्डर ऑफ़ मेरिट के लिए छः नई नियुक्तियां करके प्रसन्न हैं. आदेशानुसार यह नियुक्तियां विज्ञान,कला, साहित्य,सशस्त्र बलों व संस्कृति की क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट सेवा करने वालों को मान्यता के रूप में दिया जाता है. साथ ही जारी बयान में यह भी बताया गया है की इन सारी नियुक्तियों को सितंबर में महामहिम महारानी एलिज़ाबेथ के द्वारा चुना गया था. 

ऑर्डर ऑफ़ मेरिट अवार्ड 

Source: the gazette 

आपको बता दें की किंग एडवर्ड सप्तम द्वारा वर्ष 1902 में द ऑर्डर ऑफ़ मेरिट अवार्ड को स्थापित किया गया था. महाराजा की निजी पसंद के आधार पर अवार्ड विज्ञान,कला, साहित्य,सशस्त्र बलों व संस्कृति की क्षेत्र में बढ़ावा देने वाले लोगों को दिया जाता है. 

कौन हैं प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन 

Source: the sentinel assam

प्रोफेसर रामकृष्णन भारतीय मूल के प्रोफेसर हैं. इनका जन्म तमिलनाडु के चिदंबरम में हुआ था. प्रोफेसर वेंकी ने ब्रिटेन जाने से पहले अमेरिका में जीव विज्ञान की पढ़ाई की थी. वेंकी कैंब्रिज विश्वविद्यालय में मॉल्यूकलर बायोलॉजी रिसर्च सेंटर एमआरसी लैब के ग्रुप लीडर थे. 

नोबेल प्राइज़ से भी किये जा चुके हैं सम्मानित 

विज्ञान के क्षेत्र में प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन का योगदान उल्लेखनीय है. वर्ष 2009 में राइबोसोमल संरचना पर उनके काम के लिए उन्हें नोबेल प्राइज़ से भी नवाज़ा जा चुका है.

इसके अलावा रामकृष्णन को वर्ष 2012 में “knighted” की उपाधि भी दी गयी थी. प्रोफेसर रामकृष्णन राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के विदेशी सदस्य भी रहे हैं.  साथ ही वर्ष 2015 के नवंबर से वर्ष 2020 के नवंबर तक रामकृष्णन ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष भी रहे हैं. 

अध्यक्ष पद की फेयरवेल के दौरान कही यह बड़ी बात 

अध्यक्ष पद की फेयरवेल के दौरान वेंकी का कहना था की "विडंबना यह है कि भारत के संपर्क में आने वाले पहले फेलो रॉबर्ट क्लाइव और वारेन हेस्टिंग्स या थॉमस मैकाले और रिचर्ड टेम्पल जैसे एडमिनिस्ट्रेटर्स थे जो किसी भी रूप में भारतीयों को अपने बराबर नहीं मानते थे लेकिन उन्होंने कभी सोचा नहीं होगा की भारत में जन्मा कोई व्यक्ति उनका साथी होगा व अध्यक्ष की तो कभी कल्पना भी नहीं की गयी होगी. 

वर्तमान में प्रोफेसर वेंकी रामकृष्णन उच्च जीवों में राइबोसोम की क्रिया को देखने के लिए इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का इस्तेमाल कर रहे हैं. प्रो. वेंकी के द्वारा मानवीय समझ को एडवांस किया गया है जिसके द्वारा यह पता लगाया जा सकता है की राइबोसोम  कैसे काम करता है और एंटीबायोटिक्स इसे कैसे रोक सकते हैं.