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जानें भारत के ऐसे 9 scientists के बारे में जिन्होंने बढ़ाया है देश का गौरव

आदिकाल से ही विज्ञान के क्षेत्र में भारत की धरती पर नए नए आविष्कार किये गये है . इसी कड़ी में भारतीय  साइंटिस्ट्स (scientists  )ने अपना अहम योगदान दिया है . तो आइये जानते हैं ऐसे ही  साइंटिस्ट्स (scientists ) के बारे में . 

list of india nine scientists  who made india proud
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आदिकाल से ही भारत की धरती पर नए नए अविष्कार किये जा रहे हैं . भारत ने अपने अविष्कारों के मोतियों से ऐसी माला बनाई है जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है . भारत के साइंटिस्ट्स (scientists ) के द्वारा किये जाने वाले आविष्कारों ने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपना परचम फैलाया है . ऐसे ही नौ साइंटिस्ट्स ( scientists ) के बारे में आप इस लेख में पढ़ेंगे . 

(1 )  मेघनाद साहा 

Source: wikipedia 

6 अक्टूबर 1893 को बांग्लादेश के ढाका में जन्में मेघनाद साहा भारत के प्रसिद्द खगोलविज्ञानी थे . इनके द्वारा दिया गया साहा समीकरण काफी प्रसिद्द है . इस साहा समीकरण में इन्होनें तारों में भौतिक और रासायनिक स्थिति का विवरण दिया था . इनके इस समीकरण ने तारों पर बाद में किये गये सभी अविष्कारों के लिए एक बेस का काम किया है क्योंकि 1956 में इनकी मृत्यु के बाद के तारों पर किये गये सभी आविष्कार साहा समीकरण पर ही आधारित हैं . मेघनाद साहा को बहुत कम उम्र में अपने आविष्कार के लिए ख्याति हासिल हों गयी थी और साथ ही वह “रॉयल सोसाइटी फेलो “भी चुनें गए. डॉ.साहा के सिद्धांत  जिसमें ऊंचे तापमान पर तत्वों के व्यवहार का विवरण था ,  को यूरोप के प्रख्यात वैज्ञानिक आइंस्टाइन ने संसार को एक विशेष देन का नाम दिया . 

(2 ) श्रीनिवास रामानुजन

 

Source: wikipedia 

 श्रीनिवास रामानुजन ही वह हस्ती है जिनके नाम पर राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है .  श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसम्बर 1887 में तमिलनाडू के ईरोड गांव में हुआ था . बचपन से ही इनकी रूची गणित में थी यही कारण है इन्होने महज़ 32 साल की उम्र में गणित के लगभग 3900 सिद्धांत बना लिए थे . ब्रिटेन के प्रोफेसर हार्डी के द्वारा रामानुजन को दुनिया का सबसे  महान गणितज्ञ कहा जाता था . 

वर्ष 2005 में  श्रीनिवास रामानुजन के नाम पर गणितज्ञों के लिए पुरस्कार शुरू किया गया . 

(3) डॉ एपीजे अब्दुल कलाम 

Source: britanicca 

15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडू के रामेश्वरम में जन्मे एपीजे अब्दुल कलाम आज़ाद को किसी भी परिचय की ज़रूरत नही है . हालांकि  डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंटिस्ट (scientist) नही बनना नहीं चाहते थे बल्कि वह तो एक पायलट बनने का सपना देखा करते थे. परन्तु जब किन्ही कारणवश वह पायलट नही बन पाए  तो उन्होंने अपना रुझान अन्तरिक्ष की ओर कर लिया जिसके बाद जो साइंस के क्षेत्र में उनका योगदान रहा है वो अभूतपूर्व है .  1974 में भारत के पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से 1998 में किये गए दूसरे परिक्षण तक इन्होने एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका को बखूबी निभाया है . 

1997 में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को भारत रत्न से नवाज़ा गया . 

(4) सी.एन.आर. राव 

Source: wikipedia

30 जून 1934 को बैंगलोर के कन्नड़ परिवार में जन्मे सी.एन.आर. राव  एक रसायन वैज्ञानिक है . सी.एन.आर. राव के द्वारा घन अवस्था और संरचनात्मक रसायन शास्त्र  में मुख्य रूप से काम किया गया है .  भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संस्थान 

( ISRO)  आई आई टी कानपुर ( IIT kanpur)  भारतीय विज्ञान संस्थान, ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय इत्यादि के साथ इनका जुड़ाव रहा है . सी.एन.आर. राव ने 45 वैज्ञानिक  किताबें और 1500 शोध पत्रों को लिखा है , साथ ही इन्हें 60 विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की उपाधि भी हासिल है . 

2013  में इन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था साथ ही इन्हें पद्म भूषण और पद्मश्री से भी इन्हें सम्मानित किया गया है . 

(5 ) जी माधवन नायर 


Source: deccan herald

भारतीय वैज्ञानिकों के नामचीन नामों में एक नाम जी माधवन नायर का भी है . इनका जन्म 31 अक्टूबर 1943 को केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ था , वर्ष 1966 में इन्होंने केरल विश्विद्यालय से ही इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की . जी माधवन नायर 6 वर्ष के लिए ISRO के प्रमुख रहे हैं , इनके इस कार्यकाल के दौरान ISRO ने 25 मिशन सफलतापूर्वक पूरे किये थे , जिनमें से एक चंद्रयान-1 भी है . 

जी माधवन नायर को पद्मश्री , पद्मविभूषण और नई दिल्ली में लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स के द्वारा 2009 में "मैन ऑफ़ द ईयर" के पुरस्कार से भी नवाज़ा गया है . 

(6) राकेश के जैन 

source:nationalmedals.org

डॉ राकेश के जैन भारतीय मूल के एक अमरीकी वैज्ञानिक है . डॉक्टर राकेश जैन की अधिकांश रिसर्च टयूमर बायोलॉजी के क्षेत्र में है . डॉक्टर जैन IIT कानपुर के छात्र रहें है , इन्होंने टयूमर बायोलॉजी पर कार्य किया है इसमें भी विशेष तौर पर रसोली रक्त वाहिकाओं के बीच संबंध तथा कीमाथेरेपी एवं विकिरण के लिए इन्होंने सबसे अधिक काम किया है . 

कीमाथेरेपी एवं विकिरण उपचार के क्षेत्र में इनके अभूतपूर्व कार्य के लिए इन्हें वर्ष  2016 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के द्वारा “नेशनल मैडल ऑफ़ साइंस” से सम्मानित किया गया था . 

(7) होमी जहाँगीर भाभा

 

Source: wikipedia

होमी जहाँगीर भाभा एक ऐसे वैज्ञानिक है जिनके बगैर भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के बारे में शायद सोचा भी नही जा सकता था . इनका जन्म  1909 में मुंबई के एक पारसी परिवार में हुआ था . इनके पिता उस वक्त के एक जाने माने वकील थे . होमी भाभा का शुरू से ही भौतिक विज्ञान और गणित में विशेष रुझान था . भाभा ही वह व्यक्ति हैं जिनके कारण  भारत आज एक परमाणु सम्पन्न देश है . इसके साथ ही नाभिकीय विज्ञान पर भी इन्होंने शोध तब शुरू कर दिया था जब इस क्षेत्र की जानकरी शून्य के बराबर थी . 

होमी भाभा को एडम्स प्राइज़ और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है . 

(8) डॉ के राधाकृष्णन 

Source: twitter

जब भी कभी भारत के महान वैज्ञानिकों की बात की जाती है तो उनमें डॉ के राधाकृष्णन का नाम ज़रूर ही शामिल किया जाता है . इनका जन्म 29 अगस्त 1949  को केरल में हुआ था . केरल विश्वविद्यालय से ही इन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी .  मूलरूप से डॉ के राधाकृष्णन एक अन्तरिक्ष वैज्ञानिक हैं. के राधाकृष्णन ISRO के अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी भी संभाल चुके हैं इसी दौरान राधाकृष्णन ने  GSLV के लिए स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन और मंगल यान के मिशन को भी सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी . इन्हीं की अध्यक्षता में चंद्रयान और मंगलयान को अन्तरिक्ष में भेजा गया था . 

अन्तरिक्ष विज्ञान में अपने योगदान के लिए इन्हें २०१४ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था . 

(9) वेंकटरमन रामाकृष्णन 

Source: royalsociety.org

इनका जन्म तमिलनाडु के चिदम्बरम में वर्ष 1952 में हुआ था . इनका सबसे अहम कार्य कोशिका के अंदर प्रोटीन का निर्माण करने वाले राइबोज़ोम का गहन अध्ययन है जिसके लिए इनके साथ दो वैज्ञानिक और भी थे . इनके इस शोध के बारे में यह कहा जाता है की राइबोज़ोम पर आगे किये जाने वाले अध्ययनों में इनका शोध बेहद कारगर साबित होगा . 

अपने इसी शोध के लिए वेंकटरमन रामाकृष्णन को नोबेल पुरूस्कार से सम्मानित किया गया था .