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IAS अधिकारी बनने के लिए ओडिशा की शुभलक्ष्मी चलाती हैं चाय की दुकान

IAS की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है जिसे पास करने के लिए मज़बूत इरादों के साथ आर्थिक मदद की भी ज़रूरत होती है लेकिन ओडिशा की रहने वाली शुभलक्ष्मी ने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए खुद पैसे जमा करने की ठानी है जिसके लिए वह एक चाय की दुकान चलाती हैं. यहाँ पढ़ें पूरी जानकारी.

odisha girl shubhlaxmi runs a tea stall to become an ias officer
odisha girl shubhlaxmi runs a tea stall to become an ias officer

संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा आयोजित करवाई जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक हैं लेकिन यह परीक्षा जितनी अधिक प्रतिष्ठित है इसे पास करना उतना  ही मुश्किल भी होता है. IAS बनने का ख्वाब तो हर छात्र देख लेता है लेकिन इस परीक्षा के लिए मेहनत करने का हौसला महज़ कुछ लोग ही कर पाते हैं. 

इस परीक्षा को पास करने के लिए बहुत सी किताबों और अन्य संसाधनों की ज़रूरत पड़ती है जिनके ऊपर ठीक-ठाक खर्चा आता है परन्तु यदि उम्मीदवार किसी आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार से तल्लुल रखता हो तो उसके लिए मुश्किलें और अधिक बढ़ जाती हैं. 

अपने संसाधनों को जुटाने और परिवार का सहारा बनने के लिए मेहनत की ऐसी ही एक मिसाल हैं ओडिशा की शुभलक्ष्मी. 

कौन है शुभलक्ष्मी 

ओडिशा के सिमिनाई गाँव की रहने वाली शुभलक्ष्मी 19 वर्षीय है. फिलहाल शुभलक्ष्मी अपनी ग्रेजुएशन के पहले वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं लेकिन अपने करियर को लेकर शुभलक्ष्मी का इरादा आयने की तरह साफ़ है. शुभलक्ष्मी का दृढ़ संकल्प है की उन्हें एक IAS अधिकारी ही बनना है. 

जहाँ शुभलक्ष्मी की उम्र की लडकियां अपना अधिकांश समय पार्टी,शॉपिंग और सोशल मीडिया जैसी चीज़ों में बिताती हैं वहीं शुभलक्ष्मी अपने पिता का वो मज़बूत कंधा बनना चाहती हैं जो उनके परिवार का बोझ उठाने में सक्षम हो. 

शुभलक्ष्मी का परिवार 

शुभलक्ष्मी आर्थिक रूप से एक पिछड़े  परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इनके पिता एक दिहाड़ी मज़दूर है जिनकी दैनिक आय 250 रूपये है और इनकी माँ एक डायबिटीज़ की मरीज़ हैं इसके अलावा शुभलक्ष्मी समेत वह तीन भाई-बहन हैं. 

शुभलक्ष्मी का कहना है की वह अपने परिवार पर कोई बोझ नहीं बनना चाहती व साथ ही उनके पिता की आय से उनके घर का गुज़ारा करना बेहद मुश्किल था इसलिए शुभलक्ष्मी ने अपने पिता की मदद कर अपने घर का सहारा बनने की ठानी. 

शुभलक्ष्मी चलाती है चाय की दुकान 

अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग करने के लिए शुभलक्ष्मी ने कोयला मार्केट समिति से चाय की दुकान खोलने के लिए इजाज़त मांगी और उन्होंने शुभलक्ष्मी को इजाज़त दे दी जिसके बाद शुभलक्ष्मी ने महात्मा गाँधी मार्ग पर एक ऑर्गेनिक चाय की दुकान खोली और फिलहाल शुभलक्ष्मी वही चाय की छोटी सी दुकान चलाती हैं. 

शुभलक्ष्मी इस चाय की दुकान से होने वाली इनकम से अपने परिवार का खर्चा उठाने में अपने पिता की मदद करती हैं और साथ ही IAS की तैयारी के लिए कुछ राशि जोड़ती हैं. 

शुभलक्ष्मी का मानना है की जीवन में सफलता को हासिल करने के लिए सिवाय मेहनत और मज़बूत इच्छा शक्ति के कोई भी शॉर्ट कट नहीं होता. एक छोटे से गाँव की बड़े इरादे रखने वाली शुभलक्ष्मी का कहना है की उन्हें अपने जीवन में अपना IAS का सपना पूरा करने के अलावा और कुछ हासिल करने की इच्छा नही है.