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पहली ट्रेन में महज़ 400 यात्रियों ने किया था सफ़र, जानिये और क्या था ख़ास

रेलवे भारतीय जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण अंग है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग ट्रेन से सफ़र करते हैं लेकिन भारत की पहली ट्रेन में महज़ 400 यात्रियों ने ही सफ़र किया था. यहाँ पढें पूरी जानकारी. 

only 400 passengers traveled in the first train know what else was special
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भारतीय लोगों के जीवन में ट्रेन एक बेहद ज़रूरी हिस्सा है. भारतीय रेलवे का नेटवर्क दुनिया के टॉप 5 रेलवे नेटवर्क में शामिल है. इसके अलावा रेलवे के द्वारा करीब 15 लाख कर्मचारियों को रोज़गार दिया जाता है. 

भारतीय रेल देश के बड़े हिस्से को कवर करती है और इसके अलावा कोने-कोने तक पहुँचने के प्रयास में है. रोज़ बड़ी संख्या में लोग भारतीय रेलवे का इस्तेमाल करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं देश की पहली ट्रेन में महज़ 400 लोग ही मौजूद थे. 

भारतीय रेलवे का इतिहास 

भारत में  रेलवे को लाने का श्रेय ब्रिटिश लोगों को जाता है. वर्ष 1832 में ब्रिटिश लोगों के द्वारा देश में पहली बार रेलवे प्रणाली विकसित करने का विचार प्रस्तुत किया गया था. हालांकि उस समय ब्रिटेन में भी यात्रा अपनी प्रारंभिक अवस्था में थी लेकिन ब्रिटिश लोगों को भारत में रेल नेटवर्क फैलाने के फायदों के बारे में बखूबी जानकारी थी. 

वर्ष 1844 में भारत के गवर्नर -जनरल लॉर्ड हार्डिंग ने निजी उद्यमियों को रेल नेटवर्क स्थापित करने की अनुमति दे दी और आख़िरकार वर्ष 1845 में दो कंपनियां गठित कर ली गयी जिनका नाम  "ईस्ट इंडियन रेलवे कंपनी" और "ग्रेट इंडियन पेनिनसुला" रेलवे" था।

कब चली थी पहली ट्रेन 

source: me mumbai

भारत में पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को चलाई गयी थी. इस ट्रेन ने छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से ठाणे के बीच 34 किलोमीटर की दूरी तय थी. यह ट्रेन दोपहर 3 बजकर 35 मिनट पर चली थी और 4 बजकर 45 मिनट पर ठाणे पहुंची थी. 

ज्ञात हो की पहली ट्रेन में 30 बोगियां थी और 3 इंजन सुल्तान, सिन्धु और साहिब की मदद से इस ट्रेन को चलाया गया था. महज़ 400 यात्रियों के साथ ट्रेन ने अपना पहला सफ़र पूरा किया था. 

ज्ञात हो की वर्ष 1845 में कोलकाता में ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेल कंपनी की स्थापना के बाद वर्ष 1850 में इसी कंपनी ने रेल लाइन बिछाने का काम शुरू किया था. 

धीरे-धीरे आए बदलाव 

पहली ट्रेन चलने के बाद भी लगातार बदलावों को लाने के प्रयास किये जा रहे थे जिससे की मुनाफा अधिक कमाया जा सके. वर्ष 1856 में भारत में पहला भाप का इंजन बनाना शुरू किया गया था और इसके बाद धीरे-धीरे रेल की पटरियां बिछाई गयी. ज्ञात हो की पहले ट्रेन नैरोगेज पर चलती थी और उसके बाद मीटरगेज और ब्रॉडगेज लाइन बिछाई गयी. देश की पहली सुपरफास्ट ट्रेन दिल्ली और हावड़ा के बीच ब्रॉडगेज पर ही चलाई गयी थी.