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IAS Success Story: सुबह जिम और दिनभर पढ़ाई , पहले IPS फिर IAS बने अभिषेक

IAS Success Story: सिविल सेवा की परीक्षा पास करने का कई लोगों का सपना होता है। हालांकि, बहुत कम ही लोग इसमें सफलता प्राप्त कर पाते हैं। आज हम आपको आईएएस अधिकारी अभिषेक सुराणा का कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने असफलता के बाद भी हार नहीं मानी और जिम करने के साथ-साथ सिविल सेवा को क्रैक कर पहले आईपीएस फिर आइएएस अधिकारी बनने का सफर पूरा किया।

IAS Success Story: सुबह जिम और दिनभर पढ़ाई , पहले IPS फिर IAS बने अभिषेक
IAS Success Story: सुबह जिम और दिनभर पढ़ाई , पहले IPS फिर IAS बने अभिषेक

IAS Success Story: देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में शुमार सिविल सेवा में हर साल लाखों युवा बैठते हैं। इसमें से केवल सैकड़ों युवाओं को ही अधिकारी बनने का अवसर मिलता है। यही वजह है कि इसे देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक में गिना जाता है। आज हम आपको आईएएस अधिकारी अभिषेक सुराणा की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी को छोड़कर सिविल सेवा में जाने का मन बनाया और अपने इस फैसले पर टिके रहने के साथ सुबह जिम व दिनभर पढ़ाई कर सिविल सेवा को क्रैक कर पहले आईपीएस फिर आइएएस अधिकारी बन गए। अभिषेक की यह कहानी आपको प्रेरित कर सकती है। तो आइये जानते हैं अभिषेक के सफर के बारे में। 

 

अभिषेक भीलवाड़ा से हैं, जो भारत का कपड़ा शहर है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का अध्ययन करने चले गए। पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपने चार साल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बिताए थे। इस दौरान उन्हें राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) जैसे विभिन्न प्रकार के अनुभवों से अवगत होने का मौका मिला। वह विभिन्न सह-पाठयक्रम गतिविधियों और कई मुद्दों पर विभिन्न प्रकार के एनजीओ में भागीदार के रूप में सक्रिय थे।

 

आईआईटी के बाद बार्कलेज में लगी थी नौकरी

कई आईआईटीयन की तरह अभिषेक सुराणा बार्कलेज जैसी बड़ी कंपनियों में कार्यरत थे। उन्होंने सिंगापुर में काम किया और वहां 1.5 साल बिताए। उस समय उन्हें लगा कि जीवन उनके लिए बहुत आरामदायक है। उसके बाद वे एक स्टार्टअप के लिए चिली गए। यह एक मोबाइल-आधारित एप स्टार्ट-अप था। हालांकि, अभिषेक तब भी संतुष्ट नहीं थे। वह जीवन में विविधता चाहते थे, जो उन्हें पता था कि केवल सिविल सेवा ही उन्हें दे सकती है।

 

 

 

अभिषेक के मुताबिक, उनके दादा उनकी उपलब्धियों के पीछे मूल प्रेरणा थे। उनके दादा ने उन्हें सिविल सेवा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उनके दादाजी स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवा में थे। अभिषेक के अनुसार, दादा ने कहा था कि परिवार में से किसी एक को सरकारी सेवा में होना चाहिए। हालांकि, उस समय कभी सरकारी सेवा में आने का नहीं सोचा था।




पहले फेल फिर बाद मेंं मिली सफलता

अभिषेक ने 2014 में पहली बार सिविल सेवा की परीक्षा दी थी, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सके। उन्होंने इसके बाद फिर प्रयास किया। हालांकि, वह फिर से नाकाम रहे। तीसरे प्रयास में अभिषेक सुराणा ने 250वीं रैंक हासिल की और आईपीएस के लिए क्वालीफाई किया। हालांकि, इसके बाद भी वह नहीं रूके। उन्होंने फिर से परीक्षा की तैयारी की और इस बार परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल की और आइएएस बन गए। 

 

सुबह उठकर जाते थे जिम, फिर लाइब्रेरी में करते थे तैयारी

अभिषेक पढ़ाई के साथ-साथ सेहत को लेकर भी गंभीर थे। यही वजह थी कि वह जल्दी सोकर और सुबह जल्दी उठकर 6:00 बजे तक जिम चले जाते थे। एक घंटे की कसरत के बाद वह राजेंद्र नगर में अपने कमरे में वापस पहुंच जल्दी नाश्ता करने के बाद लाइब्रेरी में जाते थे। उनके अगले 12 घंटे वही लाइब्रेरी में बितते थे।

 

अभिषेक के मुताबिक, “मैंने हमेशा सुना था कि यदि आप जीवन में बहुत जल्दी सहज हो जाते हैं, तो आप सही काम नहीं कर रहे हैं,”। वह कहते हैं, "सामाजिक क्षेत्र के साथ काम करने का झुकाव हमेशा से रहा है, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं यूपीएससी की परीक्षा पास कर लूंगा"।

 

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