1. Home
  2. Hindi
  3. Bhart ka Samvidhan: जानें क्या हैं भारत के संविधान की विशेषताएं

Bhart ka Samvidhan: जानें क्या हैं भारत के संविधान की विशेषताएं

भारत के संविधान में कुछ ऐसी विशेषताएं हैं. जो इसे दुनिया के अन्य संविधानों से अलग बनातीं हैं. आइये जानें संविधान की विशेषताएँ और इसकी प्रस्तावना के बारे में 

salient features of constitution
salient features of constitution

Bhart ka Samvidhan: आजादी की एक लम्बी लड़ाई के बाद भारत के लोगों ने अपना एक अलग संविधान बनाया है जो विश्व का सबसे बड़ा संविधान है. इस संविधान के अलग-अलग भागों को अलग-अलग देशों से लिया गया है. जिस कारण ये विश्व के अनेक प्रख्यात संविधानों का मिश्रण है. हमारे संविधान में कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य संविधानों से अलग बनाती हैं.आइये जाने हमारे संविधान की विशेषताओं के बारे में 

विश्व का सबसे लम्बा लिखित संविधान 


किसी भी संविधान को 2 भागों में विभाजित किया जाता है लिखित संविधान और अलिखित संविधान. अमेरिका और भारत का संविधान लिखित संविधान है जबकि ब्रिटेन का संविधान अलिखित संविधान है. भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है. भारत के संविधान में मूल रूप से 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थी जबकि वर्तमान में अनेक संशोधनों के बाद इसमें 25 भाग, 12 अनुसूचियां और 470 अनुच्छेद हैं. उल्लेखनीय है कि विश्व के किसी भी अन्य संविधान में इतने अधिक अनुच्छेद और अनुसूचियां नहीं हैं. भारत के संविधान को इतना बड़ा बनाने के पीछे मुख्यत 4 प्रमुख कारण हैं:
1. भारत का अत्यधिक भौगोलिक विस्तार और विविधता
2. ऐतिहासिकता अर्थात संविधान में कई पूर्व के अनुच्छेदों को सम्मिलित किया गया है जिसके कारण यह अत्यधिक विस्तृत हो गया है. उदाहरण- भारत शासन अधिनियम 1935 
3. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक ही संविधान है.
4. संविधान सभा में बड़ी संख्या में कानून के विशेषज्ञों और वकीलों की उपस्थिति थी.

नम्यता और अनाम्यता का समन्वय -


संविधान दो तरह के होते हैं नम्य और अनम्य. अनम्य संविधान अर्थात कठोर संविधान वो संविधान होते हैं जिनमें संशोधनों करने के लिए एक कठोर प्रकिया से गुजरना पड़ता है. उदाहरण अमेरिका का संविधान. और नम्य संविधान वो होते हैं जिनमे संशोधन के लिए किसी विशेष प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती है जैसे ब्रिटेन का संविधान. भारत का संविधान कठोरता और नम्यता का मिश्रण है अर्थात इसके कुछ उपबधों को विशेष प्रक्रिया द्वारा जैसे दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वालों का दो -तिहाई बहुमत और प्रत्येक सदन में उपस्थित सांसदों का बहुमत, कुछ को संसद के विशेष बहुमत और आधे से अधिक राज्यों के अनुमोदन से ही संशोधित किया जा सकता है जबकि कुछ अन्य प्रावधानों को सामान्य प्रक्रिया द्वारा ही संशोधित किया जा सकता है. 

संघीय व्यवस्था :
संविधान में सरकार की संघीय व्यवस्था दी गई है जो कुछ परिवर्तनों के साथ एकात्मक है. संघ का अर्थ है राज्य और संघ को बराबर अधिकार दिए गए हैं जैसे केंद्र और राज्य में अलग-अलग सरकारे, शक्तियों का समान विभाजन, लिखित संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका, द्विसदनीय व्यवस्था आदि जबकि कुछ प्रावधान ऐसे हैं जो संघ को अधिक सर्वोच्च बनाते हैं जैसे- एक सशक्त केंद्र, एक संविधान, एकल नागरिकता, सर्वोच्च न्यायालय के रूप में एकीकृत न्यायपालिका, केंद्र द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति आदि.

सरकार का संसदीय रूप :
भारत के संविधान में सरकार के अध्यक्ष स्वरूप को अपनाया गया है. अर्थात वास्तविक और नाममात्र के कार्य पालकों की उपस्थित, बहुमत वाले दल की सत्ता, विधायिका अर्थात संसद के प्रति कार्यपालिका अर्थात मंत्री परिषद की संयुक्त जवाबदेही, विधायिका में मंत्रियों की सदस्यता अर्थात किसी व्यक्ति को मंत्री बनने से पूर्व या 6 माह बाद तक किसी एक सदन (राज्य सभा या लोक सभा) का सदस्य होना अनिवार्य है साथ ही प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा मंत्री परिषद का नेत्रत्व, निचले सदन का नेत्रत्व. उपरोक्त विशेषताओं से स्पष्ट होता है कि भारत में सरकार का संसदीय स्वरूप है जो कि ब्रिटेन से लिया गया है जबकि अमेरिका में सरकार का अध्यक्ष स्वरूप है. संसदीय प्रणाली को वेस्टमिन्स्टर स्वरुप भी कहा जाता है.

एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका :
भारतीय संविधान एक स्वतंत्र और एकीकृत न्यायपालिका के गठन की व्यवस्था करता है. भारत की न्याय प्रणाली में सर्वोच्च न्यायालय का स्थान सबसे ऊपर है इसके नीचे विभिन्न राज्यों के हाईकोर्ट और उसके नीचे जिला न्यायालय आते हैं. सर्वोच्च न्यायालय देश की शीर्ष अदालत है और ये देश के नागरिकों को मौलिक अधिकारों की रक्षा की गारंटी देता है. संविधान में सर्वोच्च न्यायालय की स्वतंत्रता के लिए कई प्रावधान किये गयें हैं जैसे यहाँ के जजों को कार्यकाल की सुरक्षा, उनके लिए निर्धारित सेवा शर्ते, सर्वोच्च न्यायालय के सभी व्ययों का संचित निधि पर आधारित होना आदि. 

संविधान के विभिन्न स्त्रोत :
भारत के संविधान के उपबंध अलग-अलग देशों से लिए गए हैं लेकिन संविधान का एक बड़ा भाग भारत शासन अधिनियम 1935 से लिया गया है, जबकि मौलिक अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका से और मौलिक कर्तव्य आयरलैंड से लिए गए हैं. वहीं संविधान के अन्य प्रावधान जर्मनी, जापान, साउथ अफ्रीका, कनाडा आदि देशों से लिए गए हैं.