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Opisthiamimus Gregori: शोधकर्ताओं ने खोजा विलुप्त रेप्टाइल 'ओपिस्टियमिमस ग्रेगोरी' का जीवाश्म, जानें इसके बारे में

Opisthiamimus Gregori: शोधकर्ताओं की एक टीम ने प्राचीन रेप्टाइल की एक नई विलुप्त प्रजाति की खोज की है. जो छिपकली की तरह दिखती है. जिसका नाम ओपिस्टियमिमस ग्रेगोरी (Opisthiamimus Gregori) है. नये खोजे गए सरीसृप का जीवाश्म उसकी पूंछ और उसके पिछले पैरों के हिस्सों के अलावा लगभग पूरा है.  

ओपिस्टियमिमस ग्रेगोरी' जीवाश्म
ओपिस्टियमिमस ग्रेगोरी' जीवाश्म

Opisthiamimus Gregori: शोधकर्ताओं की एक टीम ने प्राचीन रेप्टाइल (सरीसृप) की एक नई विलुप्त प्रजाति के जीवाश्म की खोज की है. जो छिपकली की तरह दिखती है. जिसका नाम ओपिस्टियमिमस ग्रेगोरी (Opisthiamimus Gregori) है. यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस प्रजाति के जीव लुप्त प्राचीन जुरासिक अवधि के डायनासोर के समय में पाए जाते थे. यह तुतारा (Tuatara) सरीसृप के समान प्रजातियों से सम्बंधित है, जो न्यूजीलैंड में पाए जाते है. यह शोध जर्नल ऑफ सिस्टेमैटिक पैलियोन्टोलॉजी में प्रकाशित किया गया है.

नये खोजे गए सरीसृप का जीवाश्म उसकी पूंछ और उसके पिछले पैरों के हिस्सों के अलावा लगभग पूरा है. शोध से सम्बंधित वैज्ञानिक कारानो के अनुसार, छोटे प्रागैतिहासिक जीवों के लिए ऐसा पूर्ण कंकाल दुर्लभ है क्योंकि उनकी अपेक्षाकृत नाजुक हड्डियां जीवाश्म बनने से पहले या बाद में नष्ट हो जाती हैं.

कैसे की गयी खोज?

इसकी खोज संरक्षित जीवाश्म कंकाल के माध्यम से की गयी है. ये नमूने संयुक्त राज्य अमेरिका के व्योमिंग से प्राप्त किये गये थे. इससे जुड़े शोधकर्ताओं ने इसकी खोज को इसलिए आगे बढ़ाया क्योंकि केवल तुतारा प्रजाति को छोड़कर, सरीसृपों का प्राचीन क्रम विलुप्त हो गया है. 

ओपिस्टियमिमस ग्रेगोरी के बारे में:

  • ओपिस्टियमिमस ग्रेगोरी लगभग 150 मिलियन वर्ष पहले, जुरासिक काल में उत्तरी अमेरिका में पाए जाते थे.
  • ये प्राचीन सरीसृप, डायनासोर की प्रजातियों विलुप्त स्टीगोसॉरस और एलोसॉरस के काल में पाए जाते थे.
  • जुरासिक काल के दौरान इससे जुड़ी प्रजातियाँ पूरी दुनिया में पाए जाते थे.

तुतारा रेप्टाइल के बारे में:

 तुतारा न्यूजीलैंड में पाए जाने वाले स्थानिक छिपकली जैसे सरीसृपों की एक प्रजाति है. यद्यपि आनुवंशिकीविदों की बढ़ती संख्या का तर्क है कि सभी जीवित तुतारा एक ही प्रजाति के हैं. मौजूदा तुतारा की दो प्रजातियों स्फेनोडोन गुन्थेरी (Sphenodon guntheri) और एस पंक्टेटस (S. Punctatus) को ही मान्यता दी गयी है. तुतारा नाम माओरी भाषा से लिया गया है और इसका अर्थ 'पीठ पर चोटियाँ' होता है. ये अपेक्षाकृत छिपकली की तरह दिखती है लेकिन इनका इतिहास 200 मिलियन से अधिक वर्षों से भी पुराना है.

शारीरिक बनावट के आधार पर, स्फेनोडोन गुन्थेरी और एस पंक्टेटस एक दूसरे से काफी मिलते-जुलते हैं. इनकी लंबाई औसतन 50 सेमी (20 इंच) और वजन 0.5 और 1 किलोग्राम (1 और 2 पाउंड) के बीच होता है. इनकी आंखें पुतलियों के साथ अच्छी तरह से विकसित होती हैं. इनकी आंखें  कम-तीव्रता वाले प्रकाश के लिए अनुकूलित होती है. तुतारा के सिर के शीर्ष पर एक तीसरी, या पार्श्विका, आंख भी होती है.

जुरासिक काल: 

जुरासिक काल (Jurassic Period), मेसोज़ोइक (Mesozoic Era) युग की तीन अवधियों में से दूसरा था. यह 201.3 मिलियन से 145 मिलियन वर्ष पूर्व तक माना जाता है. इसके पहले के काल को त्रैसिक काल (Triassic Period ) (251.9 मिलियन से 201.3 मिलियन वर्ष पूर्व) कहा जाता है. इसके बाद के काल को क्रेटेशियस काल (Cretaceous Period ) (145 मिलियन से 66 मिलियन वर्ष पूर्व) आया. जुरासिक काल महाद्वीप महाद्वीपों के विघटन, समुद्र विज्ञान और जैविक प्रणालियों में महत्वपूर्ण वैश्विक परिवर्तन का समय था.