1. Home
  2. Hindi
  3. निजी स्कूलों के शिक्षकों के लिए खुशखबरी, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ग्रेच्युटी लाभ का आदेश

निजी स्कूलों के शिक्षकों के लिए खुशखबरी, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ग्रेच्युटी लाभ का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों की याचिकाओं को खारिज करते हुए छह हफ्ते में शिक्षकों को ब्याज सहित ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया है और  ग्रेच्युटी का भुगतान (संशोधन) कानून 2009 के प्रावधानों को पूर्व तिथि से लागू करने को वैध ठहराया है।आइये जानें इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें 

Private School teachers
Private School teachers

टीचर्स डे आने ही वाला है और इसके पहले ही भारत की सबसे बड़ी अदालत ने निजी स्कूल के शिक्षकों को एक बड़ा तोहफा दिया हैI सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में निजी स्कूल के शिक्षकों को भी ग्रेच्युटी का लाभ देने का आदेश दिया हैI ग्रेच्युटी का भुगतान (संशोधन) कानून 2009 के प्रावधानों को पूर्व की तिथि से लागू करने को वैध ठहराया है और निजी स्कूलों को आदेश दिया है कि वे स्कूल टीचर्स को ग्रेच्युटी का भुगतान करें I

सर्वोच्च न्यायालय ने गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की याचिकाएं खारिज करते हुए ग्रेच्युटी का भुगतान (संशोधन) कानून, 2009 के प्रावधानों को पूर्व की तिथि यानी 3 अप्रैल, 1997 से लागू करने को वैध ठहराया है। कोर्ट ने निजी स्कूलों की याचिकाएं खारिज करते हुए आदेश दिया कि स्कूल 6 हफ्ते के अन्दर कानून के मुताबिक शिक्षकों को ब्याज सहित ग्रेच्युटी का भुगतान करें। कोर्ट ने कहा कि यदि स्कूल ऐसा नहीं करते हैं तो शिक्षकों को अपने हक़ के लिए उचित फोरम में जाने का अधिकार होगा।

सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला देश भर के गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित करेगा I अब शिक्षकों को ग्रेच्युटी कानून का फायदा कानून लागू होने की तिथि यानी 3 अप्रैल, 1997 से मिलेगा। ऐसे शिक्षक जो अब नौकरी छोड़ चुके हैं या रिटायर हो गए हैं उन्हें भी पूर्व तिथि से ग्रेच्युटी कानून का लाभ दिया जायेगा। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला निजी स्कूलों के लिए एक बड़ा झटका है। शिक्षकों के हक में यह अहम फैसला जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने निजी स्कूलों के संघ और स्कूलों की अलग से भी दाखिल याचिकाओं को खारिज करते हुए 29 अगस्त को दिया। 
इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन आफ इंडिया और अन्य निजी स्कूलों ने बहुत सी याचिकाएं दाखिल कर इस कानून को सही ठहराने वाले देश के विभिन्न न्यायालयों के फैसलों को चुनौती दी थी। साथ ही बहुत से स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट में डायरेक्ट रिट याचिका दाखिल कर ग्रेच्युटी का भुगतान (संशोधन) कानून, 2009 की धारा 2(ई) और 13ए की वैधानिकता को चुनौती दी थी जिसमें शिक्षकों को ग्रेच्युटी का लाभ पूर्व की तारीख 3 अप्रैल, 1997 से देने का प्रावधान था।

निजी स्कूलों की तरफ से वकील कपिल सिब्बल और रवि प्रकाश गुप्ता थे। स्कूलों की दलील थी कि वे पहले की तिथि से लागू कानून के मुताबिक शिक्षकों को ग्रेच्युटी देने में असमर्थ हैं। स्कूलों का कहना था कि एक ग्रेच्युटी फंड होता है जिसमें प्रतिवर्ष 15 दिन का ग्रेच्युटी का पैसा जमा होता है, लेकिन पूर्व तिथि से कानून लागू करने के लिए उनके पास ग्रेच्युटी फंड का पैसा नहीं है। अचानक आए आर्थिक भार का अंतत: असर छात्रों पर पड़ेगा। यह भी कहा कि सरकार कानून को पूर्व तिथि से लागू नहीं कर सकती।

साल 2004 में अहमदाबाद प्राइवेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन मामले सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून में दी गई कर्मचारी की परिभाषा में शिक्षक शामिल नहीं हैं, लेकिन विधायिका इस चीज को सुधार सकती है। इस फैसले के बाद सरकार ने 2009 में संशोधन कानून पारित किया था और शिक्षकों को ग्रेच्युटी का लाभ दिया। इस संशोधित कानून को निजी स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।