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दुनिया के ऐसे देश जहाँ बिकुल नही है प्रदूषण , कार्बन नेगेटिव क्लब में भी है शामिल

आज लगभग पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के हानिकारक प्रभावों को झेल रही है और लगातार इस स्थिति से निकलने की कोशिशें भी चालू हैं . ऐसी स्थिति में दुनिया के यह तीन देश एक मिसाल बनकर उभरे हैं जिनका नाम कार्बन नेगेटिव क्लब में दर्ज किया गया है. 

 

these are the pollution free countries also has their name in carbon negative club
these are the pollution free countries also has their name in carbon negative club

आज के समय में लगभग हर देश जलवायु परिवर्तन की हानियों को झेल रहा है .दुनियाभर के देशों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने की चुनौती सुकून का सांस नहीं लेनी देती लेकिन वहीं दूसरी ओर कुछ देश ऐसे भी है जिन्होंने पूरे विश्व में खुद को एक मिसाल के रूप में कायम करा है अर्थात् इन देशों में कार्बन उत्सर्जन की कोई भी चुनौती नही बची है और न ही यहाँ अब ग्रीनहाउस गैसों का कोई प्रदूषण बचा है . जानिये ऐसा क्या किया है उन देशों ने जिनके चलते आज उनका नाम कार्बन नेगेटिव क्लब ( carbon negative club ) में शामिल हो गया है . लेकिन उससे पहले जान लेते हैं की कार्बन उत्सर्जन और कार्बन नेगेटिव क्या है . 

क्या है कार्बन उत्सर्जन 

कार्बन उत्सर्जन एक तरीके की व्यापार नीति है , इस नीति के तहत सरकार द्वारा आवंटित किये गये कार्बन डाइऑक्साइड आउटपुट को कम्पनियों के द्वारा खरीदने व बेचने की अनुमति देता है . हमारे रोज़ मर्रा के कार्यों में ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिसके कारण कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है जिससे धरती का तापमान बढ़ता है . मानव जीवन और सम्पूर्ण धरटी के लिए इसका कम होना अनिवार्य है तब ही जलवायु परिवर्तन के हानिकारक प्रभावों से बचा जा सकता है . 

क्या है कार्बन नेगेटिव 

कार्बन नेगेटिव का अर्थ किसी देश में कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह से बंद करना नही है बल्कि जब कार्बन उत्सर्जन उस देश के कार्बन अवशोषण से कम होता है तो ऐसी स्थिति कार्बन नेगेटिव कहलाती है . सामन्य शब्दों में जितनी कार्बन डाइऑक्साइड बन रही है उससे अधिक को किसी तरीके से खत्म कर देना . 

कौन- कौनसे देश है कार्बन नेगेटिव 

सूरीनाम 

Source:  world rainforest movement 

सूरीनाम एक ऐसा है जिसका नाम दुनिया के सबसे अधिक जंगल वाले देशों में शीर्ष पर आता है . यह देश दक्षिणी अमेरिका का सबसे छोटा सम्प्रभु राज्य है जिसका लगभग ९७% भाग घने उष्णकटिबन्धीय जंगलों से घिरा हुआ है. यह देश आर्थिक रूप से कृषि उत्पादों ,बॉक्साइट , पेट्रोकेमिकल्स और सोने जैसे प्राक्रतिक संसाधनों पर निर्भर करता है . लेकिन यह देश अपने जंगलों की बेहतरीन तौर पर देख-रेख करता है जिससे सूरीनाम ने अपना नाम कार्बन नेगेटिव क्लब में शामिल किया. 

भूटान 

Source: forbes

भूटान एक ऐसा देश है जिसे नेट जीरो कार्बन की शपथ लेनी की कोई ज़रूरत नही है क्योंकि इस देश में लगभग 90 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण ( absorption) किया जाता है जबकि इस देश में 40 लाख टन से भी कम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है. 

भूटान की इस कामयाबी के पीछे वहां के संविधान का भी हाथ है . भूटान के संविधान के अनुसार वहां 60% जंगल होना अनिवार्य है . यह देश जंगलों के मामले में काफी अमीर देश है यहाँ केवल 60% भूभाग जंगल होना अनिवार्य है लेकिन यहाँ 72% भाग पर जंगल है . साथ ही इस देश में लॉग निर्यात वर्जित है जिसके कारण लकडियाँ भी देश के बाहर नही जा सकती और इसके अलावा यहाँ बिजली भी नदियों पर बने प्लांट से आती है .

पनामा 

Source : panama tourism 

पनामा एक मध्य अमेरिकी देश है जो की दक्षिणी अमेरिका की सीमा पर बसा हुआ है . कार्बन नेगेटिव क्लब की सूची में इस देश का नाम अभी दर्ज किया गया है. यह देश अपने पर्यावरण की खूबसूरती के लिए ही जाना जाता है . यह देश पहाड़ों, नदियों और उष्णकटिबंधीय वातावरण से ग्रस्त है . इस देश का 57% हिस्सा जंगलों से भरा हुआ है जो की इस देश में वन आवरण के विनाश को रोकने के बाद सम्भव हो पाया है . पनामा ने अपने भविष्य के लक्ष्यों में कोयले और भारी इंधन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने को प्राथमिकता  दी है और साथ ही 2070 तक 50,000 हेक्टेयर ज़मीन को जंगल में बदलने का भी इरादा है. 

इन तीनो देशों ने एक औपचारिक गठबंधन किया है जिसमें अधिमान्य व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योगदान की बात की गयी है . गौरतलब है की भारत फिलहाल कई दशकों तक इस सूची में अपना नाम दर्ज कराने में असमर्थ है . प्रधानमन्त्री मोदी ने यह लक्ष्य सामने रखा है की 2070 तक भारत को एक कार्बन शून्य उत्सर्जक देश का खिताब हाथ लगेगा.