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UPSC Success Story: Engineer होते हुए मयंक दुबे ने Hindi माध्यम से क्रैक की सिविल सेवा, मिली 147 रैंक

UPSC Success Story: यूपीएससी सिविल सेवा पास करने वाले हर शख्स की एक कहानी होती है। आज हम आपको छत्तीसगढ़ के मयंक दुबे की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पृष्टभूमि होने के बावजूद हिंदी साहित्य के वैकल्पिक विषय के साथ सिविल सेवा परीक्षा को पास किया। 

UPSC Success Story: Engineer होते हुए मयंक दुबे ने Hindi माध्यम से क्रैक की सिविल सेवा, मिली 147 रैंक
UPSC Success Story: Engineer होते हुए मयंक दुबे ने Hindi माध्यम से क्रैक की सिविल सेवा, मिली 147 रैंक

UPSC Success Story: देशभर में सिविल सेवा को पास करने के लिए लाखों युवा सपने देखते हैं। यह सपने देश के अलग-अलग हिस्सों में देखे जाते हैं। लेकिन, सिर्फ कुछ सैकड़ों युवा ही इस सपने को सच कर पाते हैं। क्योंकि, इस परीक्षा को पास करना बहुत कठिन होता है। वहीं, कई युवा यूपीएससी की परीक्षा के दौरान असफल होने पर हार मान लेते हैं। लेकिन, कई युवा होते हैं, जो लगातार मेहनत करते रहते हैं और सिविल सेवा को पास कर लेते हैं। आज हम आपको छत्तीसगढ़ के रहने वाले मयंक दुबे की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग बैकग्राउंड होने के बावजूद हिंदी माध्यम को अपना वैकल्पिक विषय चुना और सिविल सेवा में चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त की।

 

मयंक दुबे का परिचय

मयंक दुबे मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रायपुर के रहने वाले हैं। उनकी स्कूली शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से हुई पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(एनआईटी) रायपुर में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। मयंक की माता घरों में छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करती थी। 

 

इंजीनियरिंग के बाद शुरू की सिविल सेवा की तैयारी

मयंक दुबे ने बेशक इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था, लेकिन उनका मन सिविल सेवा परीक्षा को पास कर अधिकारी बनने का था। इसके लिए उन्होंने स्नातक पास करने के बाद सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी थी।



तीन बार फेल, चौथे प्रयास में पाई 147 रैंक 

मयंक दुबे तैयारी के साथ पहले प्रयास में शामिल हुए, लेकिन वह पहली बार फेल हो गए। हालांकि, उन्होंने फिर से तैयारी शुरू की और दूसरा प्रयास किया। वह इस प्रयास में भी असफल हो गए। लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी में जुटे रहे। वह तीसरी बार फिर से परीक्षा में बैठे, लेकिन इस बार भी उन्हें असफलता हाथ लगी। इसके बाद उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और दिन-रात एक कर तैयारी की। इसके बाद उन्होंने चौथा प्रयास किया और इस बार उन्होंने 147 रैंक हासिल कर सिविल सेवा परीक्षा का पास कर लिया। 

 

इंजीनियरिंग के बावजूद हिंदी साहित्य को चुना वैकल्पिक विषय

मयंक की इंजीनियरिंग की पढ़ाई अंग्रेजी में हुई। लेकिन, उन्होंने मेंस परीक्षा में अपना वैकल्पिक विषय हिंदी साहित्य चुना। इससे पहले उनके पास भूगोल वैकल्पिक विषय था। लेकिन, बाद में उन्होंने हिंदी साहित्य को अपना वैकल्पिक विषय चुना। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि वह हिंदी में सहज महसूस करते थे। इसलिए उन्होंने हिंदी साहित्य को अपना वैकल्पिक विषय चुना। 

 

इतने अंक किए हासिल 

मयंक दुबे ने यूपीएससी की सिविल सेवा में 2025 अंकों में से 974 अंक हासिल किए। इसमें से लिखित परीक्षा में 806 और इंटरव्यू में 168 अंक हासिल किए। मयंक ने यह निश्चित किया था कि यदि इस बार वह परीक्षा पास नहीं करते, तो वह अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करते। मयंक वुडन क्राफ्ट की हॉबी रखते हैं। 

 

 

 

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