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UPSC Success Story: दोस्ती का मिला साथ तो तीन दोस्तों ने प्रशासनिक अधिकारी बन चखा सफलता का स्वाद

यूपीएससी सिविल सेवा से जुड़ी कई कहानियां हैं, जिसमें आशा, निराशा, उम्मीदें, सफलता और असफलता के कारक जुड़े हुए हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें तीन दोस्तों ने सफलता की रणनीति बनाई और देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा कही जाने वाली सिविल सेवा को एक साथ पास कर प्रशासनिक अधिकारी बन गए।

UPSC Success Story: दोस्ती का मिला साथ तो तीन दोस्तों ने प्रशासनिक अधिकारी बन चखा सफलता का स्वाद
UPSC Success Story: दोस्ती का मिला साथ तो तीन दोस्तों ने प्रशासनिक अधिकारी बन चखा सफलता का स्वाद

सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी अक्सर तैयारी के दौरान लोगों से मिलना-जुलना कम कर देते हैं। साथ ही अपने नजदीकी दोस्तों से भी दूरी बना लेते हैं, लेकिन जब दोस्त ही आपको आपके सपनों तक पहुंचाने में मदद करे तो दूरी को बढ़ाने के बजाय कम किया जाता है। इसका उदाहरण आईपीएस साद मियां खान, आईएएस विशाल मिश्रा और आईएएस गौरव विजयराम कुमार ने पेश किया है। इन तीन दोस्तों ने एक साथ सिविल सेवा की तैयारी शुरू की एक साथ परीक्षा को पास कर दुनिया के सामने दोस्ती की एक अलग मिसाल पेश की।  



मूल रूप से बिजनौर के रहने वाले साद मियां खान की अपने दोस्तों में सबसे टॉप रैंक 25 है। साद ने अपने दोस्त विशाल मिश्रा के साथ एचबीटीआई कानपुर से बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। दोनों की दोस्ती 2007 में हुई थी और दोनों ने 2012 में सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। इसके बाद दो दोस्तों की जोड़ी की नई दिल्ली में तीसरे व्यक्ति गौरव से मुलाकात हुई और मुलाकात दोस्ती में बदल गई। इसके बाद शुरू हुई सिविल सेवा की तैयारी। हालांकि, बीच में विशाल ने बीटेक के बाद आईआईटी कानपुर से एमटेक की पढ़ाई की, जबकि साद अपनी तैयारी में जुटे रहे, लेकिन अलग होने के बाद भी दोनों के बीच दोस्ती में कमी नहीं आई। वहीं, गौरव ने चंडीगढ़ से बीई-ऑनर्स मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद दिल्ली पहुंच सिविल सेवा की तैयारी करने का विकल्प चुना।



तीनों दोस्त ने सिविल सेवा में इस तरह की एक दूसरे की मदद

साद ने तैयारी के दौरान  2013 से 2017 तक चार बार सिविल सेवा की परीक्षा दी, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। हालांकि, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने पांचवें प्रयास में क्वालीफाई कर किया। साद के मुताबिक, सामान्य अध्ययन में पिछड़ने के कारण उन्होंने चार प्रयास में असफलता का स्वाद चखा। साल  2017 में उन्होंने यूपीएससी मेन्स के जीएस पेपर 1 में 129 अंकों के साथ अच्छा स्कोर किया। उनके जीएस 2, जीएस 3 और जीएस 4 के अंक क्रमशः 120, 127 और 94 थे। उस समय उनका वैकल्पिक विषय भूगोल था। वह अपनी तैयारी के दिनों को याद करते हुए कहते हैं, "अपने शुरुआती प्रयासों में मैंने उत्तर में इंट्रो और निष्कर्ष लिखने या कोई विशेष उदाहरण देने या एक चित्र बनाने जैसे परिवर्तन किए, लेकिन मैं अपने उत्तर में उक्त प्रक्रिया को विकसित करके अपने उत्तरों को एक समग्र बदलाव देने में सक्षम था। पांचवां प्रयास में  साद मियां खान ने यूपीएससी 2017 में 25 रैंक हासिल कर आखिरकार सफलता का स्वाद चखा।

 

गौरव कुमार अपनी तैयारी के बारे में बताते हैं, "मैं अपने दोस्तों के साथ सभी योजनाओं, मुद्दों और प्रश्नों पर चर्चा करता था। उन्होंने मुझे बेहतर रणनीति बनाने में मदद की और इस तरह मेरे लिए एक प्रतिक्रिया व्यवस्था बनी, जिससे मुझे तैयारी में मदद मिली । वे मेरे जीवन में रत्न की तरह हैं, हमेशा मेरे ज्ञानवर्धन करते हैं। साथ ही मेरे रास्तों और मेरे लिए चीजों को आसान बनाते हैं’’।

 

वहीं, आईएएस गौरव अपने दोस्त विशाल को उनकी तैयारी के दौरान लगातार साथ देने के लिए धन्यवाद देते हैं। वह अपने पहले तीन प्रयासों में सफल नहीं हुए। गौरव के मुताबिक, "प्रारंभिक प्रयास में, मैं मुख्य परीक्षा के लिए अच्छी तरह से तैयार नहीं था और बाद के प्रयास में, मैंने सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों में अच्छा स्कोर नहीं किया,"। गौरव ने यूपीएससी 2017 में 34 रैंक हासिल कर सफलता हासिल की है। 



विशाल ने अधिकारी बन किए सरहानीय काम

विशाल मिश्रा उत्तराखंड से हैं और उन्होंने साद मियां खान के साथ एचबीटीआई कानपुर में पढ़ाई की है। वह पेशे से इंजीनियर हैं और उन्होंने आईआईटी कानपुर से एमटेक भी किया है। विशाल ने UPSC CSE 2017 में  49 रैंक हासिल की और 2018 बैच के IAS अधिकारी बन गए। विशाल को उत्तराखंड में जिला उधमसिंह नगर में रुद्रपुर के संयुक्त दंडाधिकारी के रूप में कोसी नदी परियोजना में उनके प्रयासों के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने उधमसिंह नगर में तालाबों के कायाकल्प कार्यक्रम पर भी कई काम किए हैं। सिविल सेवा पास करने के बाद साद मियां खान ने IPS चुना और यूपी कैडर में चले गए, जबकि गौरव को आजमगढ़ का ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था।

 

तीन दोस्तों ने यह साबित किया है कि यदि आपके मन में किसी चीज को पाने की लगन है, और आपके पास यदि अच्छे और सच्चे मित्र हैं, तो आपको आपके लक्ष्य से भटकने के बजाय लक्ष्य को पाने में मदद मिलती है। यह जरूरी नहीं है कि दोस्ती के साथ किसी भी लक्ष्य को पाया नहीं जा सकता, यदि आपके पास अच्छे दोस्त हैं, तो वह भी आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद करेंगे।