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आखिर क्या होता है “Act of God” और कैसे किया जाता है इंश्योरेंस में लागू

मोरबी हादसा या फिर कोई और प्राकृतिक आपदा अक्सर एक शब्द का इस्तेमाल किया जाता है “Act of God” जिसके ज़रिये अधिकांश तौर पर जवाबदेही से बचने का प्रयास किया जाता है. जानिये क्या है “Act of God” और किन परिस्थितियों में लागू किया जाता है.

what is act of god and how applied in insurance services
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हाल ही में गुजरात में हुई विनाशाकरी घटना के कारण एक बहस छिड़ गयी है की इस मोरबी दुर्घटना को किसी इंसान की लापरवाही का अंजाम माना जा सकता है या फिर यह घटना कुदरत के खेल में शामिल की जानी चाहिए. 

इसके अलावा पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है जिसक कारण देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गयी है. बड़ी संख्या में गरीबी रेखा के नीचे वाले लोगों का जीवन बर्बादी की ओर पहुँच गया तो क्या इस स्थिति का ज़िम्मेदार किसी इंसान या सिस्टम को ठहराया जा सकता है या फिर यह एक्ट ऑफ़ गॉड कहा जाएगा. 

अक्सर इस मामले पर बहस की जाती है कि एक्ट ऑफ़ गॉड क्या है और किस तरह की घटनाओं को एक्ट ऑफ़ गॉड की श्रेणी में रखा जाना चाहिए. 

एक्ट ऑफ़ गॉड (Act of God )

एक्ट ऑफ़ गॉड एक फ्रेंच टर्म है. इस सिद्धांत को फाॅर्स मैज्योर क्लॉज़ (FMC) के तौर पर समझा जाता है. एक्ट ऑफ़ गॉड का सिद्धांत एक ऐसी स्थिति के बारे में बताता है जिसमें दोनों तरफ की पार्टियां किसी भी घटना के दायित्व से मुक्त हो जाती है क्योंकि उस घटना का होना व न होना किसी इंसान या अथॉरिटी के हाथ में नहीं होता बल्कि यह घटनाएं पूर्ण रूप से कुदरती होती हैं. प्राकृतिक आपदा व युद्द जैसी आपातकालीन स्थितियों को इस श्रेणी में रखा जाता है. 

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार एक्ट ऑफ़ गॉड 

source: equity pandit

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जारी किये गये आदेश के अनुसार ऐसी कोई प्राकृतिक त्रासदी जो किसी भी तरह के मानव हस्तक्षेप से रहित हो,को एक्ट ऑफ़ गॉड कहा जाता है लेकिन हर बार किसी तूफ़ान या हवा के झोंके को बहाने के रूप में प्रयोग कर जवाबदेही से भागा नहीं जा सकता . एक्ट ऑफ़ गॉड केवल उन बड़ी प्राकृतिक त्रासदियों को ही माना जाएगा जिन्हें किसी भी तरह के मानव हस्तक्षेप से रोका नहीं जा सकता. 

फाॅर्स मैज्योर क्लॉज़ (FMC) 

इस क्लॉज़ का अधिकांश रूप से इस्तेमाल कमर्शियल अनुबंधों और संकट की स्थितियों में किया जाता है. यह एक क्लॉज़ है जिसके लागू होने के बाद दोनों पार्टियां सभी तरह के दायित्वों से मुक्ति पा सकती हैं. 

उदाहरण के तौर पर यदि कोई इंश्योरेंस कंपनी किसी संकट के चलते फाॅर्स मैज्योर क्लॉज़ (FMC) को लागू कर दे तो वह इंश्योरेंस की रक़म देने से इंकार कर सकती है.

कब होता है एक्ट ऑफ़ गॉड इंश्योरेंस में लागू 

एक्ट ऑफ़ गॉड का प्रयोग ऐसे मामलों में किया जाता है जिसमें किसी अन्य पार्टी को बीमा या कोई और क्लेम देने से बचना हो. यह एक डिफेन्स के रूप में काम करता है जिसके द्वारा जवाबदेही से बचा जा सकता है 

एक्ट ऑफ़ गॉड व महामारी 

देश की सरकार के द्वारा इस एक्ट की जो नीति बनाई गयी है उसमें महामारी,व्यापारिक प्रतिबंधों व बॉयकॉट जैसी स्थितियों को शामिल किया गया है. बाढ़ व कोरोना महामारी जैसी स्थितियां इसी नीति के उदाहरण हैं. 

विचार-विमर्श किया जा सकता है 

ज्ञात हो की एक्ट ऑफ़ गॉड एकतरफा हिसाब से लागू नहीं किया जा सकता बल्कि ऐसी स्थिति में भी दोनों पार्टियों के बीच बातचीत की गुंजाइश बाकी रहती है जिसके द्वारा किसी न किसी तरह से को समाधान निकालने की कोशिश की जाती है.