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क्या है अमेरिका की फ्रेंड शोरिंग नीति जो हो रही है दुनिया भर में चर्चित

दुनियाभर में एक कारोबार नीति की चर्चा की जा रही है व भारत को भी इस नीति को अपनाने की सलाह दी जा रही. जानिए क्या है यह नीति और इसके फायदे व नुकसान. 

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कोरोना के बाद से देशभर की अर्थव्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गयी है जिसकी भरपाई अब तक नही हो पायी है और वहीं एक बार फिर से दुनियाभर के उत्पादों की सप्लाई लेन पर बुरा असर पड़ना शुरू हो गया है. यह असर रूस और यूक्रेन की जंग के कारण  पड़ रहा है. 

दुनिया भर में फ्रेंडशोरिंग रणनीति की चर्चा हो रही है. कुछ समय पहले अमेरिका की ट्रेजरी सेक्रेटरी जेनेट योलेन भारत आई थी और भारत आकर उन्होंने फ्रेंडशोरिंग रणनीति की वकालत की और साथ ही भारत को यह सलाह भी दी है वह भी यह रणनीति अपनाए.

क्या है फ्रेंडशोरिंग रणनीति  

source: washington international trade 

फ्रेंडशोरिंग तालमेल बिठाने की एक नीति है जिसके तहत कोई एक देश कच्चा माल खरीदने से लेकर उत्पादों की सप्लाई तक उस देश के साथ तालमेल बिठाने का प्रयास करेगा जहाँ से सप्लाई चैन के टूटने का खतरा है. 

जिन देशों में राजनीतिक अस्थिरता और ऐसी घटनाएं जिनसे दो देशों के व्यापार पर बुरा असर पड़े, का खतरा कम होता है अमेरिका ऐसे देशों में इस नीति को बढ़ावा दे रहा है. साथ ही अमेरिका ऐसे देशों को अपने यहाँ कारोबार शुरू करने का मौका भी दे रहा है.  

फ्रेंडशोरिंग रणनीति के फायदे 

जिन देशों में चीज़े काफी सीमा तक स्थिर हैं उनके साथ व्यापार बढ़ाने पर देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. साथ ही इससे कच्चे माल के आयात उत्पादों के निर्यात पर बुरा असर नहीं पड़ता है. 

यदि भारत और अमेरिका के सन्दर्भ में इस नीति के बारे में बात की जाए तो ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है की इस नीति को अपनाने से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. 

फ्रेंडशोरिंग रणनीति के नुकसान

यकीनन फ्रेंडशोरिंग रणनीति के बहुत से फायदे हैं लेकिन इसके साथ ही इस नीति को अपनाने से कुछ नुकसानों का अंदाज़ा भी लगाया जा रहा है. 

ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है की फ्रेंडशोरिंग नीति को अपनाने से दुनिया अलग-थलग हिस्सों में बंट सकती है जिसके कारण कई देश मानव हित के लिए करने वाले कामों से पीछे हट सकते हैं. ऐसा माना जा रहा है की लंबे समय तक उस रणनीति का इस्तेमाल करने पर इस नीति के नकारात्मक प्रभाव दिखने शुरू हो जाएंगे क्योंकि फ्रेंडशोरिंग नीति को अपनाने के बाद देश केवल उन्हीं देशों से व्यापार के लिए सीमित हो जाएंगे.