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आखिर क्या है कार्बन बॉर्डर टैक्स , जिसका देश कर रहे हैं विरोध

कार्बन बॉर्डर टैक्स दुनियाभर के देशों के लिए फिलहाल एक चर्चा का विषय बना हुआ है और भारत समेत कुछ अन्य देश इसका विरोध भी कर रहे हैं. जानिये क्या होता है यह टैक्स और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ. 

what is carbon border tax which many countries are opposing
what is carbon border tax which many countries are opposing

दुनियाभर के कई देशों में कार्बन बॉर्डर टैक्स एक चर्चा का विषय बना हुआ है. हाल-फिलहाल में मिस्र (Egypt) में एक जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मलेन कॉप-27 का आयोजन किया गया था जिसमें भारत और चीन समेत कुछ अन्य बेसिक देशों ने कार्बन बॉर्डर टैक्स को लेकर आपत्ति जताई है.

 ज्ञात हो की बेसिक चार देशों का वो समूह है जो की इंडस्ट्रियल देश के तौर पर विकसित हुए हैं. इस समूह का गठन २००९ में हुआ था जिसमेंं भारत, ब्राजील, साउथ अफ्रीका और चीन शामिल है.

इन समूह देशों ने एक सांझा बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है की कार्बन बॉर्डर टैक्स का असर अंतर्राष्ट्रीय कारोबार पर पड़ेगा इसलिए इसे नज़रअंदाज़ किया जाना चाहिए. 

क्या होता है कार्बन बॉर्डर टैक्स 

जो देश जलवायु परिवर्तन के नियमों को लागू करने के लिए अब तक सख्त कदम नहीं उठा रहे हैं, उन देशों में तैयार किये जा रहे उत्पादों पर आयात शुल्क लगाने की बात की जा रही है जिसे कार्बन बॉर्डर टैक्स का नाम दिया जा रहा है. 

कार्बन बॉर्डर टैक्स का मुनाफे पर प्रभाव 

जो देश कार्बन बॉर्डर टैक्स देने के दायरे में आ रहे हैं उनके मुनाफे पर इससे काफी असर पड़ेगा. दरसल कार्बन बॉर्डर टैक्स चुकाने के कारण उनके मुनाफे की राशि कम हो जाएगी और इसी वजह से इस टैक्स का विरोध किया जा रहा है.

लागू करने का कारण 

 कार्बन बॉर्डर टैक्स का लागू होना एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है. इस टैक्स को लागू करने का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों को एक सख्त आदेश देना है. 

कार्बन बॉर्डर टैक्स और यूरोपीय यूनियन 

कार्बन बॉर्डर टैक्स के पक्ष में यूरोपीय यूनियन खड़ा हुआ है. यूरोपीय यूनियन का कहना है की इस टैक्स को लागू करने से पर्यावरण को काफी फायदा पहुंचेगा इसलिए इस टैक्स का विरोध करना गलत है. 

गौरतलब है की यूरोपीय संघ के अलावा अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में भी इस टैक्स को लागू किया गया है व साथ ही कनाडा और जापान में इसे लागू करने की योजना बनाई जा रही है. 

कार्बन बॉर्डर टैक्स और भारत 

इस मामले पर भारत का कहना है की जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकसित देश किसी पर ज़बरदस्ती दबाव नहीं बना सकते हैं. जलवायु परिवर्तन के लिए हुए शिखर सम्मलेन COP27 में भारत ने कहा है की महज़ कोयले को ही नहीं बल्कि दूसरे जीवाश्म इंधन के प्रयोग को भी घटाने की ज़रूरत है. 

इस मामले पर पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का कहना है की पेरिस समझौते को केंद्र में रखते हुए देश वही करेंगे जो वहां की परिस्थितियों के अनुसार ठीक होगा.  

ऊर्जा के लिए बेहतर स्त्रोतों के इस्तेमाल का अर्थ यह बिलकुल भी नहीं है की कार्बन का स्तर शून्य करने के लिए देशों को समान स्तर पर कदम उठाने हो बल्कि भारत के लिए इसका अर्थ एक ऐसी रणनीति बनाना है जो समय के साथ इसके उत्सर्जन को घटाने में मदद करे.