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जानें क्या होता है वर्चुअल स्कूल? कैसे अलग हैं दिल्ली सरकार और NIOS के वर्चुअल स्कूल?

वर्चुअल ओपन स्कूल ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म होते हैं, जिसका उद्देश्य पढ़ाई को रिजल्ट ओरिएंटेड बनाना होता है इसने जरिये स्टूडेंट्स को सस्ती और विश्वस्तरीय शिक्षा दी जाती है आइये जानें इनके बारे में कुछ विशेष बातेंI

Virtual School
Virtual School

हाल ही वर्चुअल स्कूल काफी चर्चा का विषय रहा है केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों ही अपने-अपने वर्चुअल स्कूल को देश का पहला वर्चुअल स्कूल बता रहीं हैं, तो आपके मन में भी ये सवाल होगा की जब ऑनलाइन शिक्षा पहले से चल रही है तो ये स्कूल कैसे अलग हैं? आज हम यहाँ आपके लिए 
वर्चुअल स्कूल के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी लेके आयें हैंI जिससे आपको वर्चुअल स्कूल से जुडी सभी समस्याओं का जवाब मिल जायेगाI 


आखिर क्या होते हैं वर्चुअल स्कूल?

वर्चुअल स्कूल में स्टूडेंट्स के सिलेबस के अनुसार, शिक्षा प्रदान की जाती है ये ऑनलाइन शिक्षा का एक व्यापक रूप है। इन स्कूलों के माध्यम से स्टूडेंट्स किसी क्लास या किसी लेक्चर को लाइव या रिकॉर्ड कर के देख सकते हैं और कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट के माध्यम से उसकी मूल्यांकन प्रणाली में शामिल हो सकतें हैंI COVID-19 महामारी के दौरान, भारत के अधिकांश स्कूल वर्चुअल मोड मोड़ पर शिक्षा दी जानें लगी है, इसमें छात्रों और टीचर्स के बीच संवाद भी ऑनलाइन माध्यम से होता हैI  

 

NIOS के वर्चुअल स्कूल

CBSE और ICSE की तरह ही NIOS ही एक केंद्रीय बोर्ड हैI NIOS अपने वर्चुअल स्कूल को ‘वर्चुअल ओपेन स्कूल’ के तौर पर प्रमोट करता है  इसकी शुरूआत अगस्त 2021 से हुई। NIOS की वेबसाइट के मुताबिक, वर्चुअल ओपन स्कूल एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म होता है, जिसका उद्देश्य  रिजल्ट ओरिएंटेड, सस्ती और विश्व-स्तरीय शिक्षा को बढ़ावा देना है इसके माध्यम से शिक्षा देश के किसी भी भाग में रह रहे स्टूडेंट्स को आसानी से सुलभ हो जाती हैंI NIOS  वर्चुअल स्कूल में विभिन्न कक्षाओं के लिए रजिस्टर्ड 12वीं कक्षा तक के स्टूडेंट्स के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम और विभिन्न स्किल आधारित कोर्सेस आयोजित किये जातें हैं, जिसका शेड्यूल NIOS की आधिकारिक वेबसाइट, virtual.nios.ac.in पर पहले ही जारी कर दिया जाता है।

क्लासेस के बाद छात्रों को असाइनमेंट ऑनलाइन जारी किए जाते हैं और स्टूडेंट्स को इन्हें सॉल्व कर के अपने डैशबोर्ड पर ऑनलाइन अपलोड करना होता   है। इन असाइनमेंट के मूल्यांकन/चेकिंग के मार्क्स को टीचर्स/इंस्ट्रक्टर्स स्टूडेंट्स के ऑनलाइन डैशबोर्ड पर उसी समय अपलोड कर देते हैं। NIOS  द्वारा इन स्टूडेंट्स के लिए पब्लिक और ऑन-डिमांड परीक्षाओं का आयोजन निर्धारित केंद्रों पर किया जाता है और उत्तीर्ण होने पर प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है। NIOS की विज्ञप्ति के अनुसार, जहां वर्ष 2022 के सत्र में 4.46 लाख असाइनमेंट स्टूडेंट्स ने अपलोड किए तो वहीं वर्तमान सत्र के लिए 10 लाख से अधिक असाइनमेंट के मूल्यांकन/चेकिंग का अनुमान लगाया गया है।

दिल्ली के वर्चुअल स्कूल 

दूसरी ओर दिल्ली सरकार अपने द्वारा स्थापित वर्चुअल स्कूल को देश का पहला वर्चुअल स्कूल बता रही हैI  हाल ही में 31 अगस्त 2022 से दिल्ली में वर्चुअल स्कूल स्थापित किया गया था और राज्य सरकार द्वारा इसे ‘दिल्ली मॉडल वर्चुअल स्कूल’ यानि डीएमवीएस के नाम से प्रमोट किया जा रहा है। डीएमवीएस दिल्ली स्कूल शिक्षा बोर्ड (डीबीएसई) से सम्बन्ध है, इसमें डीबीएसई द्वारा निर्धारित सिलेबस के अनुसार ऑनलाइन क्लासेस का आयोजन किया जायेगा I इस वर्चुअल स्कूल में स्टूडेंट्स दिल्ली सरकार द्वारा लांच किए गए ऑनलाइन पोर्टल, dmvs.ac.in पर जाकर 9वीं से 12वीं तक की कक्षाओं के लिए ऑनलाइन दाखिला ले सकते हैं। कक्षाओं के बाद स्टूडेंट्स के लिए ऑनलाइन माध्यम से दो टर्म-ईंड परीक्षाओं का आयोजन किया जायेगा I ये परीक्षाएं कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) होंगी, जिनके लिए छात्रों को दिल्ली आना होगा। उत्तीर्ण होने के बाद स्टूडेंट्स को मार्कशीट और सर्टिफिकेट डीबीएसई द्वारा जारी किए जाएंगे।