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कौन हैं ये चीता मित्र और कब से आम लोग देख सकेंगे चीते

भारत की धरती पर लगभग 70 सालों के बाद चीतें वापिस आए हैं जिनके स्वागत के लिए पूरा भारत तैयार है और साथ ही उनके लिए भारतीय परिवेश को आसान बनाने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं . ऐसा ही एक कदम है चीता मित्र , जानिये इनकी पूरी जानकारी.

 who are chitah mitras and when can people see cheetahs
who are chitah mitras and when can people see cheetahs

हमारे इको सिस्टम में छोटी से छोटी चीटीं से लेकर बड़े से बड़े हाथी तक की एहमियत है यदि इनमें से कुछ भी लुप्त हो जाता है तो यह इको सिस्टम के लिए दुखद है. लेकिन भारत में लगभग पिछले 70 साल से भी अधिक समय से  चीते लुप्त हो गये थे लेकिन अब एक बार फिर से भारत में चीतों को बहाल कर लिया गया है . मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में 5 मादा व 3 नर चीते अफ्रीका से लाये गयें है. 

इन चीतों के आने से पहले ही देश में इनके स्वागत की तैयारियां शुरू हो गयी थी विशेषकर मध्य प्रदेश में , क्योंकि यह चीतें अफ्रीका से लाये गये हैं इसलिए भारतीय पर्यावरण को इनके अनुकूल करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है . हालांकि कुनो नेशनल पार्क में चीतों के अनुकूल वातावरण काफी हद तक तैयार कर लिया गया है और निरंतर अन्य प्रयास भी किये जा रहे हैं . चीतों को भारत में बसाने की इस कड़ी में एक नई पहल और की गयी है जिसे  “चिता मित्र” का नाम दिया गया है .

कौन है चीता मित्र

Source: latestly.com

चीतों के भारत में लाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने अपने इलाकों में चीतों को लेकर जागरूकता फ़ैलाने के लिए लगभग 400 चीता मित्रों को नियुक्त किया है . हालांकि इन चीता मित्रों की सबसे बड़ी ख़ास बात यह होगी की यह लोग कभी भी चीतों से मिलेंगे नहीं बल्कि आसपास के आम नागरिकों को चीतों और उनकी विशेषताओं के बारें में गहनता से समझाने के लिए 51 गाँवों से लोगों को विशेष ट्रेनिंग दी गयी है.

क्या रहेगा चीता मित्रों का काम 

चीता मित्र चीतों के जीवन में अहम भूमिका अदा करेंगे . भले ही यह कभी चीतों से मिलेंगे नही लेकिन फिर भी चीतों की सुरक्षा और जीवन को आसान करने में यह मित्र ख़ास योगदान देंगे . चीता मित्र घूम-घूमकर लोगों में यह जागरूकता फैलाएंगे की चीतें से आम लोगों को कोई खतरा नहीं है और न ही चीते इंसानों पर कोई हमला करेंगे इसलिए यदि कोई चीता कभी जंगल से बाहर रिहायशी इलाके में आ भी जाता है तो कोई घबराकर किसी भी प्रकार का गलत कदम न उठाए बल्कि तुरंत इस बात की जानकरी वन-विभाग को दें. 

चीता मित्रों की ट्रेनिंग 

चीता मित्रों की नियुक्ति के लिए यूँ ही किसी को भी नही बुलाया गया बल्कि इसके लिए आसपास के गाँव के पढ़े- लिखे व योग्य लोगों को ही चुना जाना था इसलिए इस सूची में  स्कूल टीचर, हेड ,पटवारी, समाज सेवक व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया .गौरतलब है कि चीता मित्रों में एक पुराना डकैत भी शामिल है जिसका यह कहना है की वह जंगल के इलाके को बखूबी जानता है इसलिए वह चीतों को शिकारियों से बचाने में अहम भूमिका निभाएगा .

आम लोग कब देख सकेंगे चीते 

मध्य प्रदेश के वन विभाग अधिकारी का कहना है की चीतों को यूँ ही जंगल में रहने के लिए नही छोड़ा जा सकता क्योंकि यह चीतें अफ्रीका से लाए गये हैं इसलिए यह भारतीय परिवेश में आसानी से खुद को ढाल नही सकते . एक महीने के लिए इन चीतों को विशेष परिवेश में छोड़ा गया है और इसके बाद इन चीतों को दुबारा एक महीने के लिए कुछ बड़े परिवेश में छोड़ा जाएगा जिसके बाद ही वह जंगल में रहने के लिए जा सकते हैं.