By Priyanka Pal03, Aug 2024 06:27 PMjagranjosh.com
भगवद गीता के 7 श्लोक
भगवद गीता में जीवन से जुड़े हर पहलू पर मार्गदर्शन मिलता है। इसके श्लोक आपका मन शांत कर सकते हैं।
क्रोध
क्रोध से मोह होता है, जिसके कारण ध्यान भटक जाता है। ध्यान के भटकने से बुद्धि नष्ट हो जाती है और मनुष्य की बर्बादी होनी शुरू हो जाती है।
कर्म
भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि तुम्हें केवल अपना कर्म करना चाहिए, उसके परिणाम के बारे में सोचना नहीं चाहिए। तुम कर्म करने से भाग नहीं सकते।
सुख
हे अर्जुन युद्ध में वीरगति प्राप्त करने पर तुम्हें स्वर्ग की प्राप्ति होगी और विजयी होने पर धरती के सुखों का भोग मिलेगा।
धर्म
जब – जब धर्म का लोप होता है और अधर्म में वृधि होती है, तब – तब मै धर्म के उत्थान के लिए स्वयं अवतार लेता हूं।
कल्याण
सज्जन पुरुषों के कल्याण के लिए दुष्कर्मियों के विनाश के लिए और धर्म की स्थापना के लिए मैं युगों – युगों से प्रत्येक युग में जन्म लेता आया हूं।
कर्म का फल
कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, लेकिन कर्म के फलों में कभी नहीं इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो और ना ही काम करने में तुम्हारी आसक्ति हो।
आसक्ति
जब कोई किसी चीज के बारे में बार – बार सोचता है, तो मन में उसेक लिए आसक्ति पैदा होती है। आसक्ति से इच्छा पैदा होती है। इच्छा पूरी न होने पर क्रोध पैदा होता है।
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