Bhai Dooj: कैसे शुरू हुई भाई दूज की दिलचस्प परंपरा? जानें
By Mahima Sharan15, Nov 2023 12:24 PMjagranjosh.com
भाई दूज
भाई दूज पांच दिन के दिवाली त्योहार के बाद मनाई जाती है। यह त्योहार कार्तित मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथी को मनाई जाती है। यह भाई-बहन के प्यार का दिन है।
भाई बहन का पर्व
इन दिन बहन अपने भाई के माथ पर तिलक लगाकर उसके लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की प्राथना करती है। इस दिन भाई अपनी बहनों को शगुन के तौर पर उपहार देते हैं।
भविष्य पुराण
भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन यमुना ने अपने भाई यम को अपने घर पर भोजन करने के लिए आमंत्रित किया था। भाई दूज के दिन मृत्यु के देवता यमराज की भी पूजा की जाती है।
यम और यमी की कहानी
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, जिसके बाद से भाई दूज या यम द्वितीया की परंपरा शुरू हुई। सूर्य के पुत्र यम और यमुना दोनों भाई-बहन थे। यमुना के कई बार बुलाने के बाद एक दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे।
यमराज ने यमुना को दिया वचन
इस दिन यमुना ने यमराज को तिलक लगाकर उनके सुखी जीवन की कामना की। इसके बाद जब यमराज ने बहन यमुना से वरदान मांगने को कहा तो यमुना ने कहा, तुम हर वर्ष इस दिन मेरे घर आया करो और इस दिन जो भी बहन अपने भाई को तिलक करेगी, उसे तुम्हारा भय नहीं रहेगा।
यमुना नदी में स्नान
बहन यमुना की बातें सुनकर यमराज बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया। इसी दिन से भाई दूज पर्व की शुरूआत हुई। इस दिन यमुना नदी में स्नान करने का बहुत महत्व है क्योंकि कहा जाता है कि जो भाई-बहन भाई दूज के अवसर पर यमुना नदी में स्नान करते हैं उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है।
भगवान श्री कृष्ण और सुभद्रा की कहानी
एक अन्य कथा के अनुसार भाई दूज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण राक्षस नरकासुर का वध करके द्वारका लौटे थे। इस दिन भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने फल, फूल, मिठाई चढ़ाकर और कई दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था।
लंबी उम्र की कामना
सुभद्रा ने भगवान श्री कृष्ण के माथे पर तिलक लगाया था और उनकी लंबी उम्र की कामना की थी। तभी से भाई दूज के अवसर पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं उनके कलाई पर कच्चा सूत बांधती है और बदले में भाई उन्हें उपहार देते हैं।