जानें 'चोल वंश' से जुड़ी ये कुछ खास बातें


By Priyanka Pal10, Jan 2023 11:51 AMjagranjosh.com

सबसे लंबे समय तक राज करने वाले वंशजों में से एक है चोल वंश जिसकी स्थापना तीसरी शताब्दी में हुई थी।

चोल वंश के बारे में अशोक के अभिलेखों में इस इश वंश का जिक्र मिलता है।

चोल राजवंश को तंजावुर में बृहदीशवर मंदिर शानदार वास्तुकला के मंदिरों के निर्माण कार्य का श्रेय दिया जाता है।

चोल राजाओं का साम्राज्य श्रीलंका, मालाबार कोस्ट, लक्ष्यद्वीप और मालदीव से लेकर उत्तर में गंगा के मैदान तक फैला था।

कांजीवरम सिल्क साड़ियों की उत्पत्ति उस समय में मानी जाती है जब राजराजा प्रथम ने सौराष्ट्र के बुनकरों को कांचीपुरम में बसने के लिए आमंत्रित किया था।

महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर दिया जाता था इसका प्रमाण महिलाओं ने कई महत्वपूर्ण पदों जैसे राजाओं के बॉडीगार्ड के रूप में तो कुछ महिलाओं ने शांतिदूत के रूप में भी काम किया।

चोलों के पास जहाजों का एक बेड़ा था जो किसी भी हमले के खिलाफ बचाव करने में सक्षम था यह उस समय की सबसे उन्नत समुद्री रक्षा प्रणालियों में से एक थी।

चोल के शासनकाल में दक्षिण भारत में कला और साहित्य का विकास हुआ।

तमिल कवियों अप्पार, सांबंदर और सुंदरार के प्रसिद्ध कार्यों को संकलित किया गया और थिरुमुराई नामक एक संकलन में मिला दिया गया।

पोन्नेरी झील एक कृत्रिम झील थी जिसे राजेंद्र चोल प्रथम ने अपने शासनकाल के दौरान बनाया था, यह भारत की सबसे बड़ी प्राचीन मानव निर्मित झीलों में से एक है।

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