By Mahima Sharan26, Jan 2025 10:19 AMjagranjosh.com
व्हाइट कॉलर
व्हाइट-कॉलर वर्कर एक सैलरी बेस्ड होते हैं, जो आम तौर पर ऑफिस के आम वर्कर और मैनेजमेंट को दर्शाते हैं।
ब्लू कॉलर
ब्लू-कॉलर वर्कर मजदूर वर्ग का एक सदस्य होता है जो मैनुअल श्रम करता है या तो प्रति घंटे मजदूरी कमाता है या किए गए काम की मात्रा के लिए उसे टुकड़ा दर पर भुगतान किया जाता है।
पिंक कॉलर
पिंक-कॉलर वर्कर भी मजदूर वर्ग का एक सदस्य होता है जो सेवा उद्योग में काम करता है। वे वेटर, रिटेल क्लर्क, सेल्सपर्सन, कुछ बिना लाइसेंस वाले सहायक कर्मियों और लोगों के साथ संबंधों से जुड़े कई अन्य पदों पर काम करते हैं।
गोल्ड कॉलर
उच्च मांग वाले क्षेत्रों जैसे डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, पायलट, एक्चुअरी और साइंटिस्ट में अत्यधिक कुशल पेशेवरों इस कैटेगरी में आते हैं।
ग्रे कॉलर
ग्रे कॉलर काम के लिए शारीरिक और बौद्धिक दोनों तरह के श्रम की आवश्यकता होती है, और इसके लिए विशेष प्रशिक्षण या कॉलेज की डिग्री की आवश्यकता हो सकती है जैसे की इलेक्ट्रीशियन, नर्स, तकनीशियन, आदि।
रेड कॉलर
सभी प्रकार के सरकारी कर्मचारी इस कैटेगरी में आते हैं। रेड कॉलर का अर्थ है वे कर्मचारी, जिन्हें बजट से मुआवजे प्राप्त होता है।
हर क्षेत्र का खास कॉलर और अर्थ होता है। शिक्षा से जुड़ी तमाम खबरों के लिए जुड़े रहे jagranjosh के साथ