दो देशों के बीच तनातनी की वजह बना जासूसी गुब्बारा क्या हैं, जानिएPrakhar Pandey
By Prakhar Pandey15, Feb 2023 05:15 PMjagranjosh.com
स्पाई बैलून यानी जासूसी गुब्बारों को लेकर दो देशों के बीच तनातनी का माहौल हैं। आइये जानते है कि क्या होता है जासूसी गुब्बारा।
तनातनी &जासूसी गुब्बारे को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बना हुआ हैं। दरअसल अमेरिका ने अपने हवाई क्षेत्र के अंदर एक चीनी जासूसी गुब्बारों को मार गिराया हैं।
चीन का जवाब &&वहीं चीन का कहना है कि गुब्बारा रास्ता भटकने की वजह से अमेरिका की सीमा में चला गया था। और जासूसी गुब्बारे को नष्ट करने के जवाब में वो अमेरिका के खिलाफ कारवाई भी करेगा।
जासूसी गुब्बारे &इन गुब्बारो का इतिहास काफी पुराना हैं, इसे निगरान गुब्बारा भी कहते हैं। यह एक पुराना आविष्कार है जिसका उपयोग आज के समय में भी निगरानी के लिए किया जाता हैं।
आकार &जासूसी गुब्बारा का आकार 8 कारों से ज्यादा होता हैं, ये गुब्बारे आकार में काफी बड़े होते हैं और काफी लंबी ऊंचाई पर उड़ान भरकर निगरानी करते हैं।
इस्तेमाल &&जासूसी गुब्बारों के इस्तेमाल की वजह निगरानी करना होता हैं। आज कल के मार्डन स्पाई बैलून में काफी मार्डन हाईटेक डिवाइस लगाई जाती हैं। जिससे ये लंबी ऊंचाई पर उड़ते हुए भी अपने टारगेट पर निगरानी रखते हैं।
मौसम जानने के लिए इस्तेमाल &&स्पाई ब्लून को ज्यादातर मौसम का मिजाज जानने के लिए प्रयोग किया जाता हैं। लेकिन चीन जैसे देश कुछ एडवांस उपकरणों का उपयोग करके इसे जासूसी के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
सैटेलाइट से बेहतर कैसे &सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में रहकर मानक स्टैंडर्ड के तहत निगरानी कर सकते हैं। लेकिन जासूसी गुब्बारे उनके मुकाबले साफ तस्वीर उपलब्ध करा सकते हैं।
फर्स्ट यूज &इन जासूसी गुब्बारों का सबसे पहले इस्तेमाल फ्रांस ने 1794 में फ्लेरस की लड़ाई के समय पर किया था।
वर्ल्ड वॉर &&स्पाई बलून का प्रयोग वर्ल्ड वॉर में सभी देश अपने दुश्मन देशों पर नजर रखने के लिए करते थे, ताकि उनकी मूवमेंट पर नजर रखा जा सकें।
कब कब हुआ प्रयोग &फर्स्ट और सेकंड वर्ल्ड वॉर में इन गुब्बारों को प्रयोग हुआ था। इसके अलावा फ्रांस ने 1859 में ऑस्ट्रिया के खिलाफ और अमेरिकी सिविल वॉर में 1861 से 1865 तक इसका खूब इस्तेमाल हुआ था।
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