By Mahima Sharan08, Jan 2025 11:38 AMjagranjosh.com
घंटियों का शहर
जब बात राजस्थान की आती है, तब इसे किसी परिचय की आवश्यकता नहीं हैं। राजस्थान का इतिहास बलिदान, वीरता और प्रतिष्ठा से भरा पड़ा है। राजस्थान की ज़मी अपने समृद्ध इतिहास के लिए ही जानी जाती है। यह धरती शौर्य और गौरव का प्रतीक है, क्योंकि इसी भूमि पर भारत के वीर और निडर योद्धाओं का जन्म हुआ था। वैसे तो यहा की हर शहर अपनी एक विशेषता छिपाए बैठा है, लेकिन आज हम आपको राजस्थान के एक ऐसे शहर के बारे में बताएंगे जिसे घंटियों का शहर कहा जाता है। आइए जानते हैं आखिर एक शहर घंटियों का शहर क्यों और कैसे बन गया?
कब बना राजस्थान
बता दें कि पहले राजस्थान को मरुकान्तर और राजपूताना नाम से जाना जाता था। बाद में इसे बदलकर राजस्थान रखा गया। राजस्थान का गठन 1 नवंबर, 1956 में हुआ था। बात अगर जिलों की करें तो, राजस्थान में 50 जिले हैं, जिनमें से 10 संभागों में आते हैं। यहां के 33 जिले बेहद ही प्रसिद्ध है। वहीं, राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटें है, जिसमें 10 सीटें राज्य सभा और 25 सीटें लोकसभा की भी मौजूद है।
घंटियों का शहर
वहीं, राजस्थान में एक ऐसा शहर है जिसे घंटियों के शहर कहा जाता है। दरअसल हम 'झालरापाटन' शहर की बात कर रहे है, जो 'झालावाड़' जिले में स्थित है। लेकिन, क्या आप यह जानते हैं आखिर इसे यह नाम क्यों दिया गया? अगर नहीं, तो कोई बात नहीं आज हम आपको इसके इतिहास और कारणों के बारे में बताएंगे।
क्यों कहा जाता है घंटियों का शहर?
'झालरापाटन' शहर राजस्थान की एक घाटी और चंद्रभागा नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां कई प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जहां बड़ी-बड़ी घंटिया लगीं हुई हैं और इन्हीं बड़ी घंटियों के कारण इस शहर को घंटियों के शहर के नाम से जाने जाना लगा।
चारों ओर गूंजती है आवाज
इतनी विशाल घंटियां होने के कारण यहां हमेशा ही घंटियों की आवाज गूंजती रहती हैं, जो यहां के वातावरण में शांति और आध्यात्मिक भावना घोलती है। बता दें कि इस शहर में शांतिनाथ जैन मंदिर और पह्माभ सूर्य जैसी मुख्य मंदिर भी मौजूद है।
यही कारण है कि राजस्थान के इस राज्य को घंटियों के शहर के नाम से जाना जाता है। शिक्षा से जुड़ी तमाम खबरों के लिए जुड़े रहे jagranjosh के साथ
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