By Priyanka Pal07, Mar 2025 03:06 PMjagranjosh.com
रामायण को ग्लोबल पहचान दिलाने वाली महिला
आज जानिए भारत की एक ऐसी महिला के बारे में जिन्होंने न केवल अपनी कविताओं से लोगों में जागरूकता पैदा की बल्कि ग्लोबल रूप से रामायण को भी पहचान दिलाने का भी काम किया।
टोरू दत्त कौन थीं?
4 मार्च, 1856 को कोलकाता में जन्मी टोरू दत्त एक खुले विचारों वाली महिला थीं। जिन्होंने मात्र 18 साल की उम्र में बंगाली, संस्कृत, अंग्रेजी और फ्रेंच जैसी कई भाषाओं पर पकड़ बनाई।
कविता लिखने का शौक
उन्हें कविताओं को लिखने का इतना शौक था की वे प्राचीन भाषाओं कि कहानियों को इंग्लिश में लिखती थीं।
पहली प्रकाशित किताब
उनके द्वारा प्रकाशित की गई पहली किताब ए शीफ ग्लीन्ड इन फ्रेंच फील्ड्स थी। जो कि फ्रेंच कविताओं से भरी थी।
टोरू दत्त का लेखन
वह भारतीय कहानियों को दुनिया के सामने लाना चाहती थीं। एंशिएंट बैलेड्स एंड लीजेंड्स ऑफ हिंदुस्तान में, उन्होंने अंग्रेजी छंदों में भारतीय महाकाव्यों की कल्पना की।
ग्लोबल रीडर्स को रामायण से जोड़ा
रामायण और महाभारत की कहानियों पर आधारित उनकी कविताएं आधुनिक काव्य शैली के माध्यम से ग्लोबल रीडर्स को भारतीय पौराणिक कथाओं से जोड़ती थीं।
उपनिवेशवादियों के बारे में लिखना
टोरू दत्त ने उन बाधाओं को तोड़ा, जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता भी नहीं था। वे संस्कृति से जुड़े रहते हुए उपनिवेशवादियों के बारे में लिखा करती थीं।
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