भारत के राजचिन्ह में प्रयुक्त ‘सत्यमेव जयते’ से जुड़ी कुछ खास बातें
By Prakhar Pandey25, Feb 2023 04:30 PMjagranjosh.com
भारत
भारत का राजचिन्ह में आने वाले शब्द ‘सत्यमेव जयते’ किस उपनिषद से लिए गए हैं। जानिए इस शब्द से जुड़ी ये महत्वपूर्ण जानकारीयां।
सत्यमेव जयते
'सत्यमेव जयते' पवित्र हिंदू वेदों के समापन भाग मुंडक उपनिषद का एक कोट (quote)है। इसे मुंडक उपनिषद से लिया गया हैं।
इंडियन एंब्लेम
भारत का राष्ट्रीय राज चिन्ह अशोक की सारनाथ शेर राजधानी में से एक से लिया गया हैं।
चिन्ह
इस चिन्ह के बीच में चार शेर हैं, जो पीठ के बल खड़े हैं,एक हाथी,एक सरपट दौड़ने वाला घोड़ा,एक बैल की उत्कीर्ण मूर्तियां और एक घंटी के आकार वाले कमल पर एक पहिए द्वारा अलग किए जाने पर तीनों एक साथ लगे हैं
प्रतीक
अशोक के स्तंभों के चार शेर एक के बाद एक साहस, शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक हैं। यह एंब्लेम भारत के गौरव का प्रतिनिधित्व करता है।
तीन प्रतीको का दर्शन
हाथी बुद्ध की शुरुआत या उनकी अवधारणा को दर्शाता है। बैल बुद्ध-वृषभ की राशि है और घोड़ा उस जानवर को दर्शाता है जिसे बुद्ध अपने गढ़ से निकलते समय सवार हुए थे। सिंह ज्ञान का सूचक है।
कहां लगा सकते हैं राष्ट्रीय चिन्ह?
राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय सचिवालय, भवन, राजभवन या राज निवास, राज्य विधायिका, उच्च न्यायालय, राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवालय भवन।
और
और विदेश में भारत के राजनयिक मिशन का परिसर उनकी मान्यता के देशों में मिशन प्रमुखों के निवास विदेशों में भारत के वाणिज्य दूतावासों के कब्जे वाले भवनों के प्रवेश द्वार पर लगाए जा सकते हैं।
संविधान
26 जनवरी 1950 को संविधान के साथ अपनाए गए राष्ट्रीय चिन्ह में तीन शेर दिख रहे थे और एक छिपा हुआ था।
लेटरहेड का हिस्सा
राष्ट्रीय प्रतीक भारत के राष्ट्रपति और केंद्र और राज्य सरकारों की आधिकारिक मुहर है और भारत सरकार के आधिकारिक लेटरहेड का एक हिस्सा है।