इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने श्रीलंका के खिलाफ रावलपिंडी में खेले गए ट्राई सीरीज के तीसरे मुकाबले में तूफानी बल्लेबाजी करते हुए वनडे क्रिकेट का सबसे तेज दोहरा शतक जड़ दिया। उन्होंने महज 114 गेंदों में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की और भारतीय बल्लेबाज शुभमन गिल का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। महज 22 दिन पहले ही गिल ने यह रिकार्ड बनाया था। इसके साथ ही हैरी ब्रूक इंग्लैंड के लिए वनडे में पहला दोहरा शतक जड़ने वाले बल्लेबाज भी बन गए है।
शुभमन गिल का टूटा रिकॉर्ड
हैरी ब्रूक ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से गेंदबाजों को दबाव में रखा। उन्होंने केवल 114 गेंदों में 200 रन का आंकड़ा पार कर वनडे क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने का नया रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड भारत के शुभमन गिल के नाम था, जिन्होंने 30 सितंबर 2026 को वेस्टइंडीज के खिलाफ गुवाहाटी में 117 गेंदों में दोहरा शतक पूरा किया था।
ब्रूक ने गिल से तीन गेंद पहले यह उपलब्धि हासिल कर ली। इस पारी के साथ उन्होंने अपनी बल्लेबाजी क्षमता का प्रदर्शन करने के अलावा इंग्लैंड क्रिकेट के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की।
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इंग्लैंड के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर
हैरी ब्रूक ने सिर्फ सबसे तेज दोहरा शतक ही नहीं बनाया, बल्कि इंग्लैंड की ओर से वनडे क्रिकेट में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। उन्होंने 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बेन स्टोक्स के बनाए 182 रन के रिकॉर्ड को तोड़ दिया।
इंग्लैंड के लिए वनडे में सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर की सूची में अब ब्रूक 202 रन के साथ टॉप पर आ गए है।
वनडे में सबसे तेज दोहरे शतक लगाने वाले बल्लेबाज
वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसे कम गेंदों में हासिल करना बल्लेबाज की असाधारण क्षमता को दर्शाता है।
114 गेंद: हैरी ब्रूक बनाम श्रीलंका, रावलपिंडी, 2026
117 गेंद: शुभमन गिल बनाम वेस्टइंडीज, गुवाहाटी, 2026
126 गेंद: ईशान किशन बनाम बांग्लादेश, चटगांव, 2022
128 गेंद: ग्लेन मैक्सवेल बनाम अफगानिस्तान, मुंबई, 2023
136 गेंद: पथुम निसांका बनाम अफगानिस्तान, पल्लेकेले, 2024
400 से ज्यादा रन बनाने में भी इंग्लैंड का दबदबा
वनडे क्रिकेट में बड़े स्कोर बनाने के मामले में भी इंग्लैंड दुनिया की प्रमुख टीमों में शामिल है। आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वनडे में नौ बार 400 या उससे अधिक रन बनाए हैं। इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका दोनों के नाम आठ-आठ बार यह उपलब्धि दर्ज है।
