भारत में आपने बस्तर जिले के बारे में पढ़ा या सुना ही होगा। यह जिला छत्तसीगढ़ के दक्षिण में स्थित है, जिसका मुख्यालय जगदलपुर है। छत्तीसगढ़ में यूं, तो कई नदियों का प्रवाह होता है, लेकिन इनमें एक नदी ऐसी भी है, जिसे ‘बस्तर की जीवनरेखा’ भी कहा जाता है। इस नदी के ऊपर पर भारत का प्रसिद्ध चित्रकूट वॉटरफॉल भी मौजूद है। आगे हम इस वॉटरफॉल के बारे में जानेंगे। साथ ही, ‘बस्तर की जीवनरेखा’ कही जाने वाली नदी के बारे में भी जानकारी लेंगे।
किस नदी को कहते हैं ‘बस्तर की जीवनरेखा’
अब हम यह जान लेते हैं कि किस नदी को ‘बस्तर की जीवनरेखा’ भी कहा जाता है। आपको बता दें कि इंद्रावती नदी को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग की जीवन रेखा कहा जाता है। यह गोदावरी नदी की सबसे बड़ी सहायक नदियों में से एक है।
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कहां से निकलती है इंद्रावती नदी
इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिसा के कालाहांडी जिले में पूर्वी घाट की रामपुर थुआमूल पहाड़ियों से करीब 915 मीटर की ऊंचाई पर होता है। इसकी कुल लंबाई 535 किलोमीटर है, जिसका अधिकांश हिस्सा छत्तीसगढ़ में मौजूद है।
इंद्रावती की प्रमुख सहायक नदियां
इंद्रावती नदी ओडिसा से निकलने के बाद छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ हिस्सो में बहती है। आखिर में आकर यह बीजापुर के पास गोदावरी नदी में मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियां नारंगी, बोर्डिंग, कोठारी, नंदराज और डंकिनी-शंखिनी नदी है।
इंद्रावती नदी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य
-आपको बता दें कि इंद्रावती नदी पर चित्रकूट झरना स्थित है। यह झरना लगभग 300 मीटर चौड़ा है, जो कि घोड़े की नाल के आकार का है। इस कारण इसे ‘भारत का निआग्रा फॉल’ भी कहा जाता है।
-इंद्रावती नदी के नाम पर बीजापुर जिले में 'इंद्रावती नेशनल पार्क' बनाया गया है, जो भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है। यह एशियाई जंगली भैंसों का भी नेचुरल घर है।
-बस्तर की आदिवासी जनजातियां जैसे गोंड, मारिया, मुरिया का जीवन, संस्कृति और त्यौहार पूरी तरह से इंद्रावती नदी से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग इस नदी को पवित्र माता का दर्जा देते हैं।
-यदि पौराणिक कथाओं पर गौर करें, तो इस नदी का नाम देवराज इंद्र की पत्नी 'इंद्राणी' के नाम पर पड़ा माना जाता है। स्थानीय लोककथाओं में इंद्रावती और उसकी सहायक नदियों को लेकर कई कहानियां सुनने को मिलती हैं।
-आपको बता दें कि ओडिसा और छत्तीसगढ़ के बीच इंद्रावती नदी के पानी के बंटवारे को लेकर 'जोरा नाला' बिंदु पर लंबे समय से जल-विवाद रहा है, क्योंकि मानसून के समय नदी का बड़ा हिस्सा ओडिसा की ओर मुड़ने लगता है।
