PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: अब तक घर की छत पर सोलर पैनल लगवाना और सरकारी सब्सिडी पाना ही बड़ी बात थी। लेकिन आगे तस्वीर बदल सकती है। सरकार अब सिर्फ यह नहीं देखना चाहती कि कितने घरों में सोलर पैनल लगे, बल्कि यह भी देखना चाहती है कि उनसे सच में कितनी बिजली बन रही है और सिस्टम कितने समय तक सही चल रहा है। ऐसे में पीएम सूर्य घर योजना की सब्सिडी व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है।
यानी आने वाले समय में सरकारी मदद सिर्फ पैनल लगाने पर नहीं, बल्कि उसके परफॉर्मेंस और ग्रिड को मिलने वाले फायदे से भी जुड़ सकती है। हालांकि, ये बदलाव अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं।
सब्सिडी मिलेगी, लेकिन नए तरीके से?
मौजूदा व्यवस्था में सब्सिडी मुख्य रूप से सोलर सिस्टम की क्षमता के आधार पर मिलती है। नए मॉडल में सरकार सहायता को दो हिस्सों में बांटने पर विचार कर सकती है।
पहला हिस्सा सोलर सिस्टम लगाने के खर्च में मदद के लिए और दूसरा हिस्सा बिजली उत्पादन, सिस्टम की देखभाल और बैटरी स्टोरेज जैसे प्रदर्शन से जुड़े पहलुओं पर आधारित हो सकता है।
आय के हिसाब से भी सब्सिडी में बदलाव संभव है। कम आय वाले परिवारों को ज्यादा मदद और ज्यादा कमाई वाले परिवारों को कम सरकारी सहायता देने का मॉडल अपनाया जा सकता है।
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बैटरी होगी अगला बड़ा फोकस
सोचिए, दिन में धूप खूब है और आपके सोलर पैनल जरूरत से ज्यादा बिजली बना रहे हैं। ऐसी अतिरिक्त बिजली को बेकार जाने देने के बजाय बैटरी में स्टोर कर सकते हैं।
यही वजह है कि सरकार घरेलू बैटरी के साथ-साथ बिजली नेटवर्क और सब-स्टेशन स्तर पर बड़े बैटरी स्टोरेज सिस्टम को भी बढ़ावा देने पर विचार कर रही है। इससे पीक टाइम में बिजली की मांग को संभालने और ग्रिड पर आने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
अपनी छत नहीं है? फिर भी मिल सकता है फायदा
फ्लैट या अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों के लिए भी रास्ता खुल सकता है। प्रस्तावित विकल्पों में वर्चुअल नेट मीटरिंग, ग्रुप नेट मीटरिंग, बालकनी सोलर और बिल्डिंग की बाहरी दीवारों पर सोलर सिस्टम जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।
ऐसे में कह सकते हैं कि सोलर का फायदा सिर्फ उन लोगों तक सीमित नहीं रहेगा जिनके पास बड़ी निजी छत है।
कम आय वाले परिवारों के लिए सामुदायिक सोलर
हर परिवार अपने घर पर 1-2 किलोवाट का सोलर सिस्टम नहीं लगा सकता। ऐसे परिवारों के लिए सामुदायिक सोलर प्लांट का विकल्प लाया जा सकता है। करीब 100 किलोवाट के सामुदायिक सोलर प्लांट से कई परिवारों को जोड़ने का मॉडल भी विचार में है।
अब सिर्फ पैनल लगाना नहीं, बिजली बनाना भी जरूरी
सरकार का फोकस अब इंस्टॉलेशन की संख्या से आगे बढ़कर सिस्टम की क्वालिटी पर हो सकता है। यानी यदि किसी घर में सोलर सिस्टम लगा है, तो यह भी देखा जाएगा कि वह अपनी क्षमता के मुताबिक बिजली बना रहा है या नहीं।
इसके लिए बिजली उत्पादन की गारंटी, सर्विस की तय अवधि और खराबी या कम उत्पादन की स्थिति में बीमा जैसे विकल्प भी लाए जा सकते हैं।
AI बताएगा सिस्टम सही चल रहा है या नहीं
सोलर सिस्टम की निगरानी में AI और डेटा का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है। इससे सिस्टम की परफॉर्मेंस पर नजर रखने और खराब उपकरणों की पहचान करने में मदद मिलेगी। मिली जानकारी के अनुसार, सरकार 100 से ज्यादा इन्वर्टर और सोलर उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए साझा डेटा सिस्टम तैयार करने पर भी काम कर रही है।
योजना का बदल सकता है स्वरूप
सरल शब्दों में कहें तो सिर्फ सोलर पैनल लगाओ नहीं, उससे सही मात्रा में बिजली भी बनाओ। यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो PM Surya Ghar Yojana का फोकस पैनल की संख्या से हटकर बिजली उत्पादन, बैटरी स्टोरेज, सिस्टम की क्वालिटी और ग्रिड के फायदे पर जा सकता है।
फिलहाल ये सभी बदलाव प्रस्तावित हैं। अंतिम नियम और सब्सिडी का नया ढांचा आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
