शिक्षा लें, न लें या फिर कबतक पढ़ाई करें?
आमतौर पर हर कक्षा में केवल कुछ ही छात्र होते हैं जो मन लगाकर पढ़ाई करते हैं, बाकी सभी छात्र माता-पिता के कहने पर ही स्कूल जाते और पढ़ाई करते हैं. यह समझना बहुत ज़रूरी है की छात्रों के पढ़ाई छोड़ देने से क्या प्रभाव हो सकते है? उन्हें पढ़ाई छोड़ देनी चाहिए या नहीं? ज़रूर पढ़े यह लेख
यह कोई नई बात नहीं है की छात्रों को पढ़ाई करना बिलकुल भी पसंद नहीं आता, होमवर्क, एग्ज़ाम्स, अच्छे मार्क्स लाना आदि छात्रों में तनाव का कारण बनता है.
तनाव के कारण छात्रों के मन में कई सवाल उठते है जैसे –
क्यों उन्हें हमेशा पढ़ाई के लिए ज़ोर दिया जाता है?
कबतक वो ऐसे पढ़ाई और परीक्षाओं में उलझे रहेंगे?
क्या अच्छे भविष्य के लिए इतनी पढ़ाई काफ़ी नही?
इस लेख के माध्यम से छात्रों के ऐसे सभी सवालो और दुविधाओ के उत्तर देने की कोशिश की गई है –
आमतौर पर हर कक्षा में केवल कुछ ही छात्र होते हैं जो मन लगाकर पढ़ाई करते हैं, बाकी सभी छात्र माता-पिता के कहने पर ही स्कूल जाते और पढ़ाई करते हैं. कुछ छात्रों के माता-पिता को तो पढ़ाई के लिए बहुत पीछे पड़ना होता है तभी वो मुश्किल से परीक्षाओं में पास हो पाते हैं. ऐसे में माता-पिता को भी परेशानी होती है और छात्रों को भी स्ट्रेस रहता है. कितनी बार तो छात्रों को यह ख़याल आता है कि उन्हें क्यूं रोज़ स्कूल जाना पड़ता है या फिर पढ़ाई करके उनकी ज़िन्दगी कैसे बेहतर हो सकती है? और आजकल तो सोशल मीडिया का ज़माना है जहां कम पढ़े-लिखे लोग भी अच्छे से अपना करियर बनाकर सभी के लिए प्रेरणा बनते हैं, जिससे छात्रों को ऐसे करियर ऑप्शंस के बारें में पता चलता है जहां पढ़ाई को कम महत्त्व दिया जाता है जैसे की ट्रैवलिंग, फोटोग्राफी, म्यूजिक, मॉडलिंग आदि. यह सभी करियर भी छात्रों को पढ़ाई से दूर करने के कारण भी बनते है. हालाँकि, छात्र इन करियर ऑप्शंस के लिए पढ़ाई छोड़ दें यह ज़रूरी नहीं है इसलिए यह समझना बहुत ज़रूरी है की छात्रों के पढ़ाई छोड़ देने से क्या प्रभाव हो सकते है? उन्हें पढ़ाई छोड़ देनी चाहिए या नहीं?
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शिक्षा पर सभी छात्रों का अधिकार है, भारत के संविधान में 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा अनिवार्य है. लेकिन फिर भी कई ऐसे राज्य है जहां छात्रों को स्कूली शिक्षा तक नहीं मिल पाती, और वो चाहते हुए भी पढ़ाई नहीं कर सकते. और एक तरफ सभी सुविधाओं से परिपूर्ण होने के बाद भी छात्र अपनी मर्ज़ी से पढ़ाई छोड़ देना चाहते हैं. यह कोई टिप्पणी नहीं है बल्कि एक ऐसा सच है जिससे अधिकतर अभिवावकों को जूझना पड़ रहा है.
ऐसे में अभिवावकों को न केवल अपने बच्चो को समझाना है बल्कि इसके साथ उन्हें खुद भी समझना है की वो कैसे अपने बच्चो का सही से मार्गदर्शन करें. नीचे बताई गयी बातों पर ध्यान देकर माता-पिता अपने बच्चो की मन की इस दुविधा को दूर कर सकते हैं–
कामयाब लोग जो पढ़ाई से ड्रापआउट कर चुके हैं –
न केवल भारत में बल्कि विश्व में कई ऐसे कामयाब व्यक्ति है जो कम पढ़े-लिखे होने के बाद भी अपने आप एक ऊँचे मुकाम पर पंहुच सके हैं. लेकिन इन सभी व्यक्तियों ने लगातार और कड़ी मेहनत के साथ ही कामयाबी हासिल की है, उनका सफ़र कुछ आसान नहीं रहा था.
अब यहां दो बातें गौर की जाती हैं –
पहली यह की इन सभी व्यक्तियों ने पढ़ाई छोड़ दी थी लेकिन उन्होंने बुनियादी शिक्षा प्राप्त की थी, तभी वो अपनी ज़िन्दगी में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सके.
दूसरी यह की उनकी शिक्षा पूरी न होने के कारण उनको एक सही मार्गदर्शन नहीं मिल सका और उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी और धीरे धीरे सफलता प्राप्त की. यही अगर उनको सही शिक्षा के साथ मार्गदर्शन मिलता तो जल्द ही कामयाबी मिलती.
अधिकतर कामयाब व्यक्तियों की कुछ न कुछ मज़बूरी रही थी जिससे उनकी शिक्षा पूरी न हो सकी और बहुत ही कम ऐसे व्यक्ति रहे जिन्होंने सोच-समझकर पढ़ाई छोड़ दी थी.
दरअसल, ऐसे कामयाब व्यक्तियों की ज़िन्दगी से सही प्रेरणा मिलती है, तो अभिवावक अपने बच्चो को ऐसे कुछ उदाहरणों से समझा सकते हैं की पढ़ाई क्यूं ज़रूरी है और अगर पढ़ाई करने का मन नहीं भी है तो छात्रों को बुनियादी शिक्षा तो प्राप्त कर लेना चाहिए जिससे उन्हें करियर मार्गदर्शन में सहायता मिले.
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क्या छात्रों का कोई और ऐसा कौशल है जो पढ़ाई के बिना उनका कामयाब भविष्य बना सकता है?
अक्सर, कामयाब व्यक्तियों के पास ऐसा कौशल रहता है जिससे वो बिना पढ़ाई के सफलता हासिल कर पाते हैं. सबसे सही उदाहरण है मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर, जिन्होंने अपनी हायर सेकण्ड्री शिक्षा भी पूरी नहीं की क्यूंकि उन्होंने अपनी पढ़ाई से ज़्यादा अपने क्रिकेट के टैलेंट को महत्त्व दिया. उन्होंने अपने इस टैलेंट से ऐसी सफलता प्राप्त की है जिससे आज उनकी पढ़ाई की ओर किसी का ध्यान भी नहीं जाता. कई ऐसे उदाहारण है जहां टैलेंट के चलते कामयाब व्यक्तियों ने अपनी पढ़ाई छोड़ देना सही समझा. तो अगर, कोई छात्र ऐसी कोई प्रतिभा रखते हैं जिससे वो अपना करियर बना कर सफलता प्राप्त कर सकें तो उनके लिए एक लेवल के बाद पढ़ाई छोड़ देना कोई बुरी बात नही, लेकिन वो इस बात पर भी खास ध्यान दें की अपने कौशल को सही से प्रस्तुत करने के लिए भी पढ़ाई ज़रूरी होती है. और अगर बिना पढ़ाई छोड़े वो टैलेंट को करियर बना सकते हैं तो पढ़ाई को जारी रखना सही होगा चाहे बिना स्कूल या कॉलेज के ही की जाए.
पढ़ाई का महत्त्व क्या है? माता-पिता कैसे अपने बच्चो को समझाए की पढ़ाई कितनी ज़रूरी है?
पढ़ाई तो बहुत ही आवश्यक है और यह हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है की कामयाबी के लिए शिक्षा ज़रूरी है या नहीं. यहां तक की कामयाब व्यक्तियों ने इस बात को माना है की पढ़ाई से ज़्यादा अभ्यास या उपयोगी कुशलता प्राप्त करनी चाहिए. लेकिन ऐसे भी कामयाब व्यक्ति है जिन्होंने सफलता प्राप्त करने के बाद भी अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी. यहां तक की वो कुछ न कुछ नया सीखते है और स्कूल या कॉलेजो में जाकर छात्रों के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हैं. सभी कामयाब व्यक्ति हमेशा यही कहते है, की हर व्यक्ति को पढ़ाई को ज़्यादा महत्त्व देना चाहिए क्यूंकि छात्र गलतियाँ करते-करते सफलता प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन अगर सही-गलत का ज्ञान ही नहीं हो तो वो कैसे कामयाबी प्राप्त करेंगे , और ज्ञान तो केवल शिक्षा से ही प्राप्त कर सकते हैं.
अगर छात्रों के मन में पढ़ाई छोड़ने का ख्याल आता है तो माता-पिता को यह पता करना चाहिए की ऐसा क्यूं हो रहा है? छात्रों के मन की जांच पड़ताल की जानी चाहिए.
क्या छात्र पढ़ाई से ऊब गए हैं?
क्या उनको परीक्षाओं के डर के चलते यह ख्याल आता है?
अभिवावकों को उन्हें समझाना चाहिए की परीक्षाओं में फ़ेल होना या पढ़ाई से मन उबना एक बहुत ही आम बात है और उन्हें ऊपर बताई गई बातों को अपने बच्चो को समझाना चाहिए.