Positive India: जानें 7 IAS अफसरों के बारे में जिन्होंने समाज को सुधारने में दिया अद्वितीय योगदान
COVID-19 के संक्रमण को रोकने से लेकर बाल विवाह की प्रथा रोकने और विकलांगों के लिए सार्वजनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने तक, इन IAS अफसरों ने भारत में परिवर्तन का एक उदहारण स्थापित किया है।
सिविल सेवा अधिकारी संसद और विधानों की निर्णयों को आगे बढ़ाते है जैसा कि मंत्रिमंडल द्वारा पारित किया जाता है। यह ना केवल सरकार की नीतियां बनाने और लागू करने में मदद करते हैं, बल्कि उनमें से कई IAS अपने कर्तव्य से परे जा कर समाज में सुधार और बेहतर जीवन प्रदान करने के विभिन्न उपायों का प्रयोग करते हैं। ऐसे ही 7 अनोखे IAS अफसरों के बारे में हम आपको इस लेख में बताने जा रहें हैं। इन अधिकारीयों ने ना केवल अपने कर्तव्यों को निभाया बल्कि एक कदम आगे बढ़ कर समाज में सुधार लाने के लिए अद्भुत प्रयास भी किये। आइये जानते हैं इनके बारे में :
1. IAS अवनीश शरण

IAS अवनीश शरण का 2018 में छत्तीसगढ़ के एक ऐसे जिले में ट्रांसफर हुआ जहाँ के दो आदिवासी समुदाय (बैगा और गोंड) स्वस्थ्य सम्भंधि मूल भूत सुविधाओं से वंचित थे। भौगोलिक बाधाओं की वजह से ना तो यहाँ अस्पताल था और कई बार, सरकारी एंबुलेंस को स्वर्णिम घंटे के दौरान गांवों तक पहुंचाना असंभव हो जाता था।इसके अलावा, इस आदिवासी लोगों के पास स्वास्थ्य सेवाओं और निजी वाहनों के पैसे भी नहीं थे। ऐसे में गाँव के सभी लोगों को काफी परशानी का सामना करना पड़ता था और इन समुदायों के लिए इस समस्या का समाधान लगभग असंभव ही था।
ऐसे में IAS अवनीश शरण ने अप्रैल 2018 में कबीरधाम जिले में DC (डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर) का कार्यभार संभाला। जिले में संगी एक्सप्रेस (फ्रेंड एक्सप्रेस) के नाम से मशहूर अवनीश ने बाइक एम्बुलेंस की एक श्रृंखला शुरू की, जिसने लोगों के स्वास्थय खर्च में 90 प्रतिशत की कटौती की है और जिले में 4,868 से अधिक लोगों को प्रभावित किया है। ये सेवाएं स्थानीय लोगों को आजीविका भी प्रदान करती हैं क्योंकि वे ग्रामीणों को बाइक सवार के रूप में नियुक्त करते हैं। क्योकि जिले के भूगोल से परिचित होने के कारण ये ड्राइवर आपात स्थिति के दौरान सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में पहुंचने के लिए सबसे तेज़ और सबसे छोटा मार्ग है। गाँव में आशा कार्यकर्ता से संपर्क करके फ्री-ऑफ-कॉस्ट मोटरबाइक एम्बुलेंस को कॉल किया जा सकता है। एम्बुलेंस लाभार्थी के घर तक पहुँचती है, इसलिए उन्हें निजी वाहनों के लिए भुगतान नहीं करना पड़ता।
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2. IAS टीना डाबी

जब देश एक वैश्विक महामारी से लड़ रहा है ऐसे में भीलवाड़ा मॉडल की हर और प्रशंसा की जा रही है। राजस्थान का भीलवाड़ा देश में उभरने वाले पहले कोविद -19 समूहों में से एक था और राज्य और जिले के अधिकारियों द्वारा कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। जहाँ देश में लॉक डाउन 25 मार्च से लागू हुआ, भीलवाड़ा प्रशासन ने यह कदम मार्च से ही उठा लिए थे।
इस मोडल को प्रभावी रूप से सक्रिय करने में सबसे पहला नाम आता है भीलवाड़ा की SDM टीना डाबी का। डीएम राजेंद्र भट्ट के कर्फ्यू लगाने के फैसले के बाद टीना ने अपनी टीम के साथ इसे लागू करने के बेहतरीन कदम उठाए। उन्होंने जिले के नागरिको को इस महामारी के प्रति जागरूक किया और उन्हें घर में ही सीमित रहने की आवश्यकता समझाई। साथ ही अपनी टीम के साथ मिल कर उन्होंने पूरे जिले में ज़रूरी सुविधाओं को उपलब्ध करने के पूरे प्रबंध किये। इसी का नतीजा रहा की आज भीलवाड़ा में कोरोना का संक्रमण थम गया है।
3. IAS अथर आमिर खान

जब यूपीएससी के टॉपर अथर आमिर खान ने भीलवाड़ा जिले के बदनोर सब-डिवीजन के एसडीएम के रूप में कार्यभार संभाला, तो उन्होंने सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े हुए क्षेत्र में अलग-अलग मुद्दों की जानकारी ली। उन्होंने यह भी महसूस किया कि बाल विवाह के उच्च प्रसार और सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे की कमी के लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। खान ने बाल विवाह के मामलों को देखने के लिए जिला प्रशासन के मुख्य कार्यालय में एक विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया।
आज, जब राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बदनोर क्षेत्र में एक स्कूली छात्र यदि कई दिनों तक स्कूल नहीं जाता है तो गाँव में सतर्कता दस्ते को सूचित किया जाता है। यदि माता-पिता बच्चे की शादी की योजना बना रहे हैं तो शिक्षक, और पड़ोसी जिला सरकार के अधिकारियों को सतर्क करते हैं। ये अधिकारी परिवार को समझाते हैंऔर उन्हें कानूनी कार्रवाई के बारे में सूचित करते हैं। बाल विवाह के बारे में जागरूकता पर खान के व्यापक अभियान ने स्थानीय आंगनवाड़ी कर्मचारियों, स्वयं सहायता समूहों और ग्राम विकास समितियों को प्रशिक्षित किया है। यह कर्मचारी अब 20-ग्राम पंचायतों में नियमित बैठकें करता है। अथर की इन दोनों पहलों का लाभ अब 6,000 बच्चों तक पहुंच रहा है।
4. IAS मीर मोहम्मद अली

2011 बैच के केरल कैडर के आईएएस मीर मोहम्मद अली ने 2017 में राज्य के कुनूर जिले को देश के पहले प्लास्टिक मुक्त जिला बनाने का काम किया। यह कार्य उन्होंने केवल 5 महीनों में कर दिखाया। इसके अलावा प्लास्टिक कैरी बैग को बन कर हैंडलूम बैग्स को बढ़ावा दिया जिससे की राज्य के बुनकरों को भी फ़ायदा मिला।
उन्हें 2019 में केरला सुचित्वा मिशन का निदेशक नियुक्त किया गया था जहाँ वहअपशिष्ट प्रबंधन योजनाओं (Waste Management Schemes) की देखरेख करते है।
5. IAS पी नरहरि

पी नरहरि क 42 साल की उम्र में विकलांगों के लिए भारतीय बुनियादी ढांचे को सुलभ बनाने और खुले में शौच से मुक्त पहल के लिए काम करने के लिए 40 से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिला कलेक्टर के रूप में अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने बाधा मुक्त वातावरण के लिए निर्माण किया जो यह सुनिश्चित करता है कि विकलांग लोग सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सकें।
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6. IAS शाहिद इक़बाल चौधरी

शाहिद इकबाल चौधरी जम्मू और कश्मीर के एक पहाड़ी जिले में बड़े हुए जहां उन्होंने अक्सर बाढ़ से होने वाली मुश्किलों का सामना किया। इसलिए जब उन्होंने एक IAS अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला तो इस मुद्दे को उठाने और लोगों के जीवन को बदलने का निर्णय लिया।
पिछले चार वर्षों में श्रीनगर के DC के रूप में उन्होंने कश्मीर के बाढ़ से प्रभावित होने वाले गाँवों में 320 पुलों का निर्माण किया है। इस प्रकार हजारों लोगों और स्कूली बच्चों को कनेक्टिविटी का लाभ हुआ है। यात्रा की दूरी को कम करने के अलावा, इस पहल ने बाढ़ में जानमाल के नुकसान को कम किया है। इस कार्य में डीआरडीओ से प्रौद्योगिकी का उपयोग करके पहाड़ी पुलों का निर्माण किया गया और स्थानीय लोगों के लिए 43,000 से अधिक दिन का रोजगार उत्पन्न किया गया।
7. उमाकांत उमराव

जब उमाकांत उमराव को देवास के कमिश्नर के रूप में तैनात किया गया था, तो उन्होंने पाया कि जिले को सबसे बड़ा आर्थिक संकट पानी की कमी था क्योंकि इस क्षेत्र में तीन साल से बारिश की कमी का सामना करना पड़ रहा था। उनकी चुनौती देवास के जल संकट के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य और टिकाऊ समाधान खोजने की थी।
आज उन्होने जो मॉडल बनाया है उसके परिणामस्वरूप देवास में 60-80 एकड़ भूमि में फैले 16,000 तालाब हैं, और हजारों किसान एक वर्ष में 25 लाख रुपये से अधिक कमाते हैं। इसके अतिरिक्त, देवास ने अपने भूजल स्तर में तेजी से वृद्धि और सिंचित भूमि में 20 गुना वृद्धि - 18,000 हेक्टेयर से लेकर 4 लाख हेक्टेयर से अधिक तक देखी है। उमराव का मॉडल 'जल बचाओ जीवन बचाओ' के नारे को खारिज करता है, और 'जल बचाओ लाबो कामो' को बढ़ावा देता है। उनके मॉडल में, बड़े पैमाने पर किसान अपने खेत के केवल 10 वें या 20 वें हिस्से में तालाब बनाने के लिए निवेश करते हैं। सिंचाई के लिए इन तालाबों में एकत्रित पानी से न केवल उन्हें, बल्कि आसपास के छोटे किसानों को भी फायदा होता है।