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पब्लिक सेक्टर बैंक अच्छे वेतनदाता क्यों हैं?

Last Updated: Dec 27, 2018, 08:00 IST

जानिये- क्यों पब्लिक सेक्टर बैंकों में प्राइवेट सेक्टर के बैंकों से अधिक सैलरी मिलती हैं- पूरा विवरण विस्तार से पढ़ें-

Banking jobs
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इस शताब्दी के बाद, बैंकिंग प्रमुख उद्योगों में से एक बन गया है और इसके साथ, समग्र बैंकिंग परिदृश्य में एक बड़ी शिफ्ट को आँका गया है। वर्ष 1969 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद, वित्त और बैंकिंग के संबंध में देश की नीति में एक कठोर परिवर्तन आया है। राष्ट्रीयकरण के 46 साल के बाद से एक चीज स्थिर रही है, जो हैं वित्तीय परिणामों के संदर्भ में बैंकों का प्रदर्शन। लगभग 77 प्रतिशत जमा-धनराशि और 76 प्रतिशत अग्रिम जमा, देश के पब्लिक सेक्टर के बैंकों के पास हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश भर में बैंकिंग परिदृश्य स्थिर है। यह वैश्विक वित्तीय मंदी, जिसे वर्ष 2008 में देखा गया था, से लड़कर भी उभरा हैं। हालांकि बड़े विदेशी बैंक विश्व की महाशक्तियों में मंदी के कारण दबाव महसूस कर रहे थे, लेकिन भारतीय बैंकिंग क्षेत्र अभी भी गुणवत्ता और मात्रा के क्षेत्रों में स्थिर था।

इस दौरान, भारत में पब्लिक सेक्टर के बैंकों का प्रदर्शन न केवल अप्रभावित रहा, बल्कि पिछले दशक से प्रत्येक वर्ष इसमें नई शाखाओं के संचालन और नयी भर्तियों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुयी है। एक बेहतर वेतन संरचना और सुरक्षित भविष्य की संभावना देश के युवाओं को इस उद्योग में शामिल होने और उनके साथ काम करने के लिए आकर्षित करती है। बैंकिंग आज केवल वाणिज्य या अर्थशास्त्र में दिलचस्पी रखने वाले स्नातकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सभी क्षेत्रों के लोग, इस क्षेत्र में शामिल हो रहे हैं। पब्लिक बैंकिंग सेक्टर ने अपने समकक्ष निजी क्षेत्र के बैंकों को भी खुली चुनौती दी है। यद्यपि एक लोकप्रिय धारणा यह भी है कि निजी क्षेत्र के बैंक, पब्लिक सेक्टर के बैंकों की तुलना में हर प्रकार से अच्छा भुगतान करता है, लेकिन पब्लिक सेक्टर बैंकों में काम करने और इस नौकरी से जुड़े वेतन भत्तो के वास्तविक लाभों को और अधिक गहराई से जानने की आवश्यकता हैं।

पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारियों का वेतन और लाभ

निजी क्षेत्र के बैंक में उच्च प्रबंधन अधिकारियों द्वारा प्राप्त वेतन निश्चित रूप से पब्लिक सेक्टर के बैंकों की तुलना में अधिक होता है, लेकिन जब इन बैंकों में जूनियर या मध्य स्तर के प्रबंधन कर्मचारियों की बात आती है, तो पब्लिक सेक्टर के बैंक, निजी क्षेत्र के बैंकों को कड़ी टक्कर देते हैं। भुगतान संरचना का स्ट्रक्चर और ब्रेक-अप इस प्रचलित मिथक को और कमजोर और सभी संदेहों को दूर कर देता हैं कि क्यों पब्लिक सेक्टर के बैंक अच्छे वेतनदाता होते हैं। ऐसा हो सकता है कि निजी बैंक के कर्मचारियों की भर्ती, पब्लिक सेक्टर के बैंकों की तुलना में अधिक वेतन पर होती हैं। परन्तु वेतन में अंतर पब्लिक सेक्टर बैंकों के कर्मचारी को मिलने वाले लाभ और भत्ते में निहित है। गृह ऋण, शिक्षा ऋण, विभिन्न क्लब सदस्यता, भविष्य निधि और ग्रेच्युटी इत्यादि कुछ लाभ हैं जो इन क्रमिकों को बैंक से प्राप्त होते हैं।

इनके अलावा, पब्लिक सेक्टर के बैंकों में अधिकारी स्तर के क्रमिकों को पेंशन और स्टाफ क्वार्टर बैंक प्राधिकरण द्वारा प्रदान किए जाने का भी प्रावधान है। क्वार्टर अक्सर पूर्ण रूप से सुसज्जित और रहने के लिए अद्भुत स्थिति में होते हैं। पब्लिक सेक्टर के बैंक कर्मचारियों को चिकित्सा सुरक्षा भी प्रदान की जाती है और वे अपने आश्रितों को भी ये सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। इन नौकरियों में, घर जाने के लिए छुट्टियों का भी प्रावधान है और इसके साथ सालाना बैंकों द्वारा एक या दो अवकाश को भी प्रायोजित किया जाता है। इन लाभों के साथ-साथ पब्लिक सेक्टर के बैंक कर्मचारियों को अपने बच्चों को बैंक से संलग्नित स्कूलों में प्रवेश कराने का अवसर भी दिया जाता हैं।

पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारियों को प्राप्त लाभ

मौद्रिक लाभ के साथ, पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारी को अन्य विभिन्न पुरस्कारों और सुविधाओं के उपभोग का भी अवसर मिलता हैं जो उनके समकक्ष निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में बेहतर स्थिति को दर्शाता हैं। सबसे महत्वपूर्ण कारक, क्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा और कार्य जीवन का संतुलन होता हैं। पब्लिक सेक्टर के बैंक कर्मचारियों के लिए औसत सर्विस, निजी बैंक के कर्मचारियों की तुलना में बहुत अधिक होती हैं। निजी बैंकों में वैश्विक वित्तीय स्थिति के आधार पर, किसी भी समय नौकरियां खोने का जोखिम होता हैं जबकि पब्लिक सेक्टर के बैंक कर्मचारी इस तरह के जोखिम से प्रतिरक्षित रहते हैं। अत: वे सीमित या निश्चित कार्य के घंटों के साथ अपने जीवन का आनंद ले सकते हैं और निजी बैंक कर्मचारियों की तुलना में उन्हें कम दबाव में कार्य करना होता हैं क्योंकि निजी क्षेत्र में प्रदत्त समय-सीमा का सख्ती से पालन करके लक्ष्य को प्राप्त करना होता हैं।

निजी क्षेत्र की तुलना में पब्लिक सेक्टर के बैंकों में छुट्टियों की पालिसी नीतियां भी बहुत सरल होती हैं। उम्मीदवारों के प्रदर्शन से परे, पब्लिक सेक्टर के बैंक कर्मचारियों को जो कि एक ही पद पर हैं, समान वेतन का भुगतान किया जाता है। इसके विपरीत, निजी क्षेत्र के बैंक अपने कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य करवाकर अतिरिक्त धन अर्जित करने हेतु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मजबूर करते हैं. जिससे कार्यस्थल में तनाव और प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है।

 

First Published: Dec 27, 2018, 08:00 IST

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